राजस्थान सामान्य ज्ञान-जलवायु के आधार पर मुख्य ऋतुएँ Gk ebooks


Rajesh Kumar at  2018-08-27  at 09:30 PM
विषय सूची: राजस्थान सामान्य ज्ञान Rajasthan Gk in Hindi >> राजस्थान की जलवायु एवं मृदा >>> जलवायु के आधार पर मुख्य ऋतुएँ

जलवायु के आधार पर मुख्यत: तीन ऋतुएं पाई जाती है।
ग्रीष्म ऋतु – मार्च से मध्य जून
शीत ऋतु – नवम्बर से फरवरी तक
वर्षा ऋतु – मध्य जून से सितम्बर तक 

 
ग्रीष्म ऋतु (Summer)
ग्रीष्म ऋतु में सूर्य के उत्तरायण (कर्क रेखा की ओर) होने के कारण मार्च में तापमान बढने के साथ ही ग्रीष्म ऋतु प्रारम्भ होता हैं जून में सूर्य के कर्क रेखा पर लम्बवत होने के कारण तापमान उच्चतम होते हैं इस समय सम्पूर्ण राजस्थान में औसत तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के लगभग होता है। परन्तु राज्य के पश्चिमी भागों जैसलमेर, बीकानेर, फलौदी तथा पूर्वी भाग में धौलपुर में उच्चतम तापमान 45-50 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाते है। इससे यहॉ निम्न वायुदाब का केन्द्र उत्पन्न हो जाता है। परिणामस्वरूप यहॉ धूलभरी आंधियां चलती है। धरातल के अत्यधिक गर्म होने एवं मेघरहित आकाश में सूर्य की सीधी किरणों की गर्मी के कारण तेज गर्म हवायें जिन्हें ‘लू’ कहते हैं, चलती है। यहॉ चलने वाली आँधियों से कहीं कहीं वर्षा भी हो जाती है। अरावली पर्वतीय क्षेत्र में ऊँचाई के कारण अपेक्षाकृत कसम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस रहता है। रा‍त में रेत के शीघ्र ठण्डी हो जाने के कारण तापमान 14-15 डिग्री सेल्सियस तक रह जाता है। अतः मरूस्थलीय क्षेत्र में तापांतर अधिक 32-33 डिग्री सेल्सियस तक पाये जाते हैं ग्रीष्म ऋतु में राज्य में आर्द्रता कम पाई जाती है। दोपहर के समय यह लगभग 10 डिग्री तक या उससे भी कम रह जाती है।
वर्षा एवं पवनें तीव्र गर्मी के कारण राजस्थान के उतरी व पश्चिमी क्षेत्रों में आगे चली जाती है। इसी कारण राज्य के पश्चिमी भाग में औसतन 20 सेमी वर्षा हो पाती है। राज्य में सर्वाधिक वर्षा (75 से 100 सेमी वार्षिक) दक्षिणी पूर्वी पठारी भाग में होती है। राज्य के पूर्वी मैदानी भाग में वर्षा का सामान्य औसत 50 से 75 सेमी वार्षिक होता है।

वर्षा ऋतु
मध्य जून के बाद राजस्थान में मानसूनी हवाओं के आगमन से वर्षा होने लगती है। फलस्वरूप तापमान में कुछ कमी हो जाती है। परन्तु आर्द्रता के कारण मौसम उमस भरा हो जाता है। इस समय राज्य के अधिकांश भागों का सामान्य तापमान 18 से 30 डिग्री से. ग्रेड हो जता है। वायुदाब कम होने के कारण हिन्द महासागर के उच्च वायुदाब क्षेत्र से मानसूनी पवनें बंगाल की खाडी की मानसून हवाएं एवं अरब सागरीय मानसूनी हवाएं राज्य में आती है। जिनसे यहॉ वर्षा होती है। ये मानसूनी हवाएं दक्षिणी पश्चिमी हवाऐं कहलाती है। राज्य की लगभग अधिकांश वर्षा इन्ही मानसूनी पवनों से होती हैं। यहॉ आने वाली बंगाल की खाडी की मानसूनी पवनें गंगा यमुना के सम्पूर्ण मैदान को पार कर यहॉ आती है। अतः यहॉ आते आते उनकी आर्द्रता बहुत कम रह जाती है। इस कारण राजस्थान में वर्षा की कमी रह जाती है। अरावली पर्वत होने के कारण ये राज्य के पूर्वी व दक्षिणी पूर्वी भाग में ही वर्षा करती है। तथा राज्य के उतर व पश्चिमी भाग में बहुत कम वर्षा कर पाती है। इस मानसूनी हवाओं को यहॉ पुरवाई (पुरवैया) कहते है। अरब सागर की मानसूनी हवाएं अरावली पर्वत के समानान्तर चलने के कारण अवरोधक के अभाव में यहॉ बहुत कम आगे बढ जाती है। राज्य में अधिकांश वर्षा जुलाई-अगस्त माह में ही होती है। सितम्बर में वर्षा की मात्रा कम होती है।
राजस्थान को अरावली पर्वतमाला की मुख्य जल विभाजक रेखा के सहारे सहारे गुजरने वाली 50 सेमी समवर्षा रेखा लगभग दो भिन्न भिन्न जलवायु प्रदेशों में विभक्त करती है। इस समवर्षा (50 सेमी) रेखा के पश्चिमी भाग में वर्षा का अभाव न्यूनता, सूखा, आर्द्रता की कमी, वनस्पति की न्यूनता एवं जनसंख्या घनत्व में कमी पाई जाती है। इसके विपरीत इस समवर्षा रेखा के पूर्वी भाग में आर्द्रता अधिक, अधिक वर्षा, कृषि की अपेक्षाकृत ठीक स्थिति एवं आबादी की गहनता आदि विशेषताएं पाई जाती है। वर्षा की मात्रा राज्य में उतर पूर्व से उतर पश्चिम एवं पूर्व से पश्चिम की ओर कम होती जाती है। पिछले कुछ वर्षो से कभी कभी पश्चिमी भाग में भी वर्षा की मात्रा बढ गई हैं। 
 
शीत ऋतु
22 दिसम्बर को सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में मकर रेखा पर लम्बवत चमकने लगता है। फलस्वरूप उतरी गोलार्द्ध में तापमान में अत्यधिक कमी हो जाती है। राजस्थान के कुछ रेगिस्तानी क्षेत्रों में रात का तापमान शून्य या इससे भी कम हो जाता हैं दिन के तापमान भी बहुत कम हो जाते है। कई बार तापमान शून्य या इससे भी कम हो जाने पर फसलों पर पाला पड जाने से वे नष्ट हो जाती है। शीत ऋतु में राजस्थान में कभी कभी भूमध्य सागर से उठे पश्चिमी वायु विक्षोभों के कारण वर्षा हो जाती है। जिसे मावट कहते है। यह वर्षा रबी की फसल के लिए लाभदायक होती है। इस ऋतु में कभी कभी उतरी भाग से आने वाली ठण्डी हवाएं शीत लहर का प्रकोप डालती है। यहॉ जनवरी माह में सर्वाधिक सर्दी पडती है। वायुमण्डल में इस समय आर्द्रता कम पाई जाती है।
अक्टूम्बर नवम्बर में राज्य में मानसूनी हवाओं के प्रत्यावर्तन का समय (Winter) होता है। सूर्य के दक्षिणायन होने के साथ ही तापमान धीरे धीरे गिरने लगता है। एवं इन माहों में राज्य में 20-30 से. ग्रेड तापमान हो जाता है। इस अवधि में यहॉ वर्षा भी नहीं होती है।


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Jalwayu Ke Aadhaar Par Mukhyat Teen Rituein Pai Jati Hai Grishm Ritu - March Se Madhy June Sheet November February Tak Varsha September Summer Me Surya Uttarayan Kark Rekha Ki Or Hone Karan Tapaman Badhne Sath Hee Prarambh Hota Hain Lambvat Uchhtam Hote Is Samay Sampoorn Rajasthan Average 38 Degree Celcius Lagbhag Parantu Rajya Pashchimi Bhagon Jaisalmer Bikaner Phalaudi Tatha Poorvi Bhag Dholpur 45 50 Pahunch Jate Isse Yahan


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