राजस्थानी कहावत का अर्थ

Rajasthani Kahawat Ka Arth

GkExams on 12-05-2019

अक्ल बिना ऊँट उभाणा फिरै

– मूर्ख व्यक्ति साधन होते हुए भी उनका उपयोग नहीँ कर पाते।

• अभागियो टाबर त्यूंहार नै रूसै

– सुअवसर से भी लाभ न उठा पाना।

• अम्बर को तारो हाथ सै कोनी टूटे

– आकाश का तारा हाथ से नहीँ टूटता।

• अरडावता ऊँट लदै

– दीन पुकार पर भी ध्यान न देना।

• असो भगवान्यू भोलो कोनी जको भूखो भैँसा मेँ जाय

– कोई मूर्ख होगा जो प्रतिफल की इच्छा के बगैर कार्य करे।

• अग्रे–अग्रे ब्राह्मण नहीँ नाला गरजते

– ब्राह्मण सभी कामोँ मेँ आगे रहता है परन्तु खतरोँ के समय पीछे ही रहता है।

• अणदेखी न नै दोख, बीनै गति न मोख

– निर्दोष पर दोष लगाने वाले की कहीँ गति नहीँ होती।

• अम्बर राच्यो, मेह माच्यो

– आसमान का लाल होना वर्षा का सूचक है।

• अत पितवालो आदमी, सोए निद्रा घोर।

अण पढ़िया आतम कही, मेघ आवै अति घोर॥

– अधिक पित्त प्रकृति का व्यक्ति यदि दिन मेँ भी अधिक सोए तो यह भारी वर्षा का सूचक है।

• आँख मीँच्या अँधेरो होय

– ध्यान न देने पर अहसास का न होना।

• आँख गई संसार गयो, कान गयो हंकार गयो

– आँख फूटने पर संसार दिखाई नहीँ देता वैसे ही बहरा होने पर अहंकार समाप्त हो जाता है।

• आँखन, कान, मोती, करम, ढोल, बोल अर नार।

अ तो फूट्या ना भला, ढाल, ताल, तलवार॥

– ये सभी चीजेँ न ही टूटे-फूटे तो ही अच्छा है।

• आँख्या देखी परसराम कदे न झूँठी होय

– आँखोँ देखी घटना कभी झूँठी नहीँ होती।

• आँ तिलां मैँ तेल कोनी

– क्षमता का अभाव।

• आंधा मेँ काणोँ राव

– मूर्खोँ मेँ कम गुणी व्यक्ति का भी आदर होता है।

• आम खाणा क पेड़ गिणना

– मतलब से मतलब रखना।

• आ रै मेरा सम्पटपाट, मैँ तनै चाटूँ तू मनै चाट

– दो मूर्ख लोगोँ की बातचीत निरर्थक होती है।

• आप गुरुजी कातरा मारै, चेला नै परमोद सिखावै

– निठल्ले गुरुजी का शिष्योँ को उपदेश देना।

• आप कमाडा कामडा, दई न दीजे दोस

– व्यक्ति के किये गए कर्मोँ के लिए ईश्वर को दोष नहीँ देना चाहिए।

• आडा आया माँ का जाया

– कठिनाई मेँ सगे सम्बन्धी (भाई) सहायता करते हैँ।

• आडू चाल्या हाट, न ताखड़ी न बाट

– मूर्ख का कार्य अव्यवस्थित होना।

• आप मरयां बिना सुरग कठै

– काम स्वयं ही करना पड़ता है।

• आगे थारो पीछे म्हारो

– जैसा आप करेँगे वैसा ही हम।

• आज मरयो दिन दूसरो

– जो हुआ सो हुआ।

• आज हमां और काल थमां

– जो आज हम भुगत रहे हैँ, कल तुम भुगतोगे।

• आषाढ़ की पूनम, निरमल उगै चंद।

कोई सिँध कोई मालवे जायां कट सी फंद॥

– आषाढ़ की पूर्णिमा को चाँद के साथ बादल न होने पर अकाल की शंका व्यक्त की जाती है।

• आदै थाणी न्याय होय

– बुरे/बेईमान को फल मिलता है।



Comments main sochu on 10-04-2021

main sochu

Pukhraj on 14-07-2020

Lado ki bua

saddam on 19-05-2020

शासर गई न बु कवाई न

Kalpana on 04-12-2019

Rajasthani khavato ki prastavna bataiye

आठ चरण नोवी ठोड़ी इस बात का उत्तर नही देगा तो उसकी on 12-05-2019

आठ चरण नोवी ठोड़ी इस बात का उत्तर नही देगा तो उसकी नानी मोडी



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