राजस्थानी कहावत का अर्थ

Rajasthani Kahawat Ka Arth

Gk Exams at  2018-03-25


Go To Quiz

GkExams on 12-05-2019

अक्ल बिना ऊँट उभाणा फिरै

– मूर्ख व्यक्ति साधन होते हुए भी उनका उपयोग नहीँ कर पाते।

• अभागियो टाबर त्यूंहार नै रूसै

– सुअवसर से भी लाभ न उठा पाना।

• अम्बर को तारो हाथ सै कोनी टूटे

– आकाश का तारा हाथ से नहीँ टूटता।

• अरडावता ऊँट लदै

– दीन पुकार पर भी ध्यान न देना।

• असो भगवान्यू भोलो कोनी जको भूखो भैँसा मेँ जाय

– कोई मूर्ख होगा जो प्रतिफल की इच्छा के बगैर कार्य करे।

• अग्रे–अग्रे ब्राह्मण नहीँ नाला गरजते

– ब्राह्मण सभी कामोँ मेँ आगे रहता है परन्तु खतरोँ के समय पीछे ही रहता है।

• अणदेखी न नै दोख, बीनै गति न मोख

– निर्दोष पर दोष लगाने वाले की कहीँ गति नहीँ होती।

• अम्बर राच्यो, मेह माच्यो

– आसमान का लाल होना वर्षा का सूचक है।

• अत पितवालो आदमी, सोए निद्रा घोर।

अण पढ़िया आतम कही, मेघ आवै अति घोर॥

– अधिक पित्त प्रकृति का व्यक्ति यदि दिन मेँ भी अधिक सोए तो यह भारी वर्षा का सूचक है।

• आँख मीँच्या अँधेरो होय

– ध्यान न देने पर अहसास का न होना।

• आँख गई संसार गयो, कान गयो हंकार गयो

– आँख फूटने पर संसार दिखाई नहीँ देता वैसे ही बहरा होने पर अहंकार समाप्त हो जाता है।

• आँखन, कान, मोती, करम, ढोल, बोल अर नार।

अ तो फूट्या ना भला, ढाल, ताल, तलवार॥

– ये सभी चीजेँ न ही टूटे-फूटे तो ही अच्छा है।

• आँख्या देखी परसराम कदे न झूँठी होय

– आँखोँ देखी घटना कभी झूँठी नहीँ होती।

• आँ तिलां मैँ तेल कोनी

– क्षमता का अभाव।

• आंधा मेँ काणोँ राव

– मूर्खोँ मेँ कम गुणी व्यक्ति का भी आदर होता है।

• आम खाणा क पेड़ गिणना

– मतलब से मतलब रखना।

• आ रै मेरा सम्पटपाट, मैँ तनै चाटूँ तू मनै चाट

– दो मूर्ख लोगोँ की बातचीत निरर्थक होती है।

• आप गुरुजी कातरा मारै, चेला नै परमोद सिखावै

– निठल्ले गुरुजी का शिष्योँ को उपदेश देना।

• आप कमाडा कामडा, दई न दीजे दोस

– व्यक्ति के किये गए कर्मोँ के लिए ईश्वर को दोष नहीँ देना चाहिए।

• आडा आया माँ का जाया

– कठिनाई मेँ सगे सम्बन्धी (भाई) सहायता करते हैँ।

• आडू चाल्या हाट, न ताखड़ी न बाट

– मूर्ख का कार्य अव्यवस्थित होना।

• आप मरयां बिना सुरग कठै

– काम स्वयं ही करना पड़ता है।

• आगे थारो पीछे म्हारो

– जैसा आप करेँगे वैसा ही हम।

• आज मरयो दिन दूसरो

– जो हुआ सो हुआ।

• आज हमां और काल थमां

– जो आज हम भुगत रहे हैँ, कल तुम भुगतोगे।

• आषाढ़ की पूनम, निरमल उगै चंद।

कोई सिँध कोई मालवे जायां कट सी फंद॥

– आषाढ़ की पूर्णिमा को चाँद के साथ बादल न होने पर अकाल की शंका व्यक्त की जाती है।

• आदै थाणी न्याय होय

– बुरे/बेईमान को फल मिलता है।



Comments आठ चरण नोवी ठोड़ी इस बात का उत्तर नही देगा तो उसकी on 12-05-2019

आठ चरण नोवी ठोड़ी इस बात का उत्तर नही देगा तो उसकी नानी मोडी

आठ चरण नोवी ठोड़ी इस बात का उत्तर नही देगा तो उसकी on 12-05-2019

आठ चरण नोवी ठोड़ी इस बात का उत्तर नही देगा तो उसकी नानी मोडी

Mukesh on 12-05-2019

आठ चरण नोवी ठोड़ी इस बात का उत्तर नही देगा तो उसकी नानी मोडी



आप यहाँ पर राजस्थानी gk, कहावत question answers, general knowledge, राजस्थानी सामान्य ज्ञान, कहावत questions in hindi, notes in hindi, pdf in hindi आदि विषय पर अपने जवाब दे सकते हैं।

Labels: , ,
अपना सवाल पूछेंं या जवाब दें।

Comment As:

अपना जवाब या सवाल नीचे दिये गए बॉक्स में लिखें।

Register to Comment