गुरु अर्जन देव जी शहीदी स्टोरी इन पंजाबी

Guru Arjan Dev Ji Shahidi Story In Punjabi

Gk Exams at  2018-03-25


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GkExams on 26-12-2018


गुरु अर्जन देव (अंग्रेज़ी: Guru Arjan Dev, जन्म: 15 अप्रैल, सन 1563; मृत्यु: 30 मई, 1606) सिक्खों के पाँचवें गुरु थे। ये 1 सितम्बर, 1581 ई. में गद्दी पर बैठे। गुरु अर्जन देव का कई दृष्टियों से सिक्ख गुरुओं में विशिष्ट स्थान है। 'गुरु ग्रंथ साहब' आज जिस रूप में उपलब्ध है, उसका संपादन इन्होंने ही किया था। गुरु अर्जन देव सिक्खों के परम पूज्य चौथे गुरु रामदास के पुत्र थे। गुरु नानक से लेकर गुरु रामदास तक के चार गुरुओं की वाणी के साथ-साथ उस समय के अन्य संत महात्माओं की वाणी को भी इन्होंने 'गुरु ग्रंथ साहब' में स्थान दिया।

जीवन परिचय

गुरु अर्जन देव जी का जन्म 18 वैशाख 7 संवत 1620 (15 अप्रैल सन् 1563) को गुरु रामदास भेजे हुए जब दो वर्ष बीत गए। पिता गुरु की तरफ से जब कोई बुलावा ना आया। तब आपने अपने पिता द्वारा जहाँगीर सहन नहीं कर सका, और उसने अपने पुत्र खुसरों की सहायता से अर्जन देव को क़ैद कर लिया।

  • रावी के तट पर आकार गुरु अर्जन देव का देहांत हो गया।


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