शैशवावस्था की विशेषता

Shaishavavastha Ki Visheshta

Gk Exams at  2018-03-25


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GkExams on 12-05-2019

शैशवावस्था की विशेषताएं –
जन्म से छ: वर्ष की अवस्था को शैशवावस्था कहा जाता है. इस अवस्था में ग्रहनशीलता और विकास की गति तीव्र होती है. बालक में पैरों की कौशल सम्बन्धी विकास 18वें महीने से शुरू हो जाता है. शारीरिक विकास भी तेजी से होता है. इस अवस्था में शारीरक मानसिक विकास के साथ-साथ संवेगात्मक, भाषाई, सामाजिक चारित्रिक, इत्यादि का भी विकास होनें लगता है. वास्तव में शैशवावस्था जीवन का वह काल है जब शिशु परनिर्भरता से आत्मनिर्भरता की और बढ़ने लगता है. आत्म अधिकारों का ज्ञान भी बच्चों में इसी अवस्था से होने लगता है. शिक्षा की दृष्टी से ये अवस्था बहुत ही महत्त्वपूर्ण है, प्रयोगों एवं निरिक्षण के द्वारा यह तथ्य उजागर हुआ है की प्रथम 6 वर्ष में बच्चे आगे के 6 वर्षों से अधिक सीखते हैं. लेकिन यह तभी संभव है जब शिशुओ की शिक्षा व्यवस्था उनके शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक और सामाजिक विषयों को मुख्य आधार बनाकर किया जाय.



Comments Anurag on 05-01-2020

Shaishwa awastha ki do vishestaye

Ajay on 05-01-2020

शैशवावस्था की दो विशेषताएं लिखिए

Ajay on 05-01-2020

शैशवावस्था की दो विशेषताएं लिखिए

Bipin jayswal on 28-09-2018

Year

भानुप्रताप सिंह on 11-09-2018

भ्रूण क्या है



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