शैशवावस्था में मानसिक विकास

Shaishavavastha Me Mansik Vikash

Gk Exams at  2018-03-25


Go To Quiz

Pradeep Chawla on 24-10-2018

जन्म के समय शिशु का मस्तिष्क पूर्णतया अविकसित होता है और वह अपने वातावरण को नही जानता। जैसे-जैसे उसका मस्तिष्क विकसित होता है, उसे अपने वातावरण के बारे में अधिक से अधिक ज्ञान प्राप्त होता जाता है।

  • जन्म से तीन माह तक शिशु केवल अपने हाथ-पैर हिलाता है। भूख लगने पर रोता है। हिचकी लेना, दूध पीना कष्ट का अनुभव करना, चैंकना। चमकदार चीज को देखकर आकर्षित होना या कभी-कभी हंसना आदि क्रियाएँ करता है।
  • चौथे से छः मास तक शिशु सब व्यंजनों की ध्वनियां करता है। वस्तुओं को पकड़ने का प्रयास करता है। सुनी हुई आवाज का अनुकरण करता है व अपना नाम समझने लगता है।
  • सातवें मास से नौवे मास तक वह घुटने के बल चलने और सहारे से खड़ा होने लगता है।
  • दसवें माह से 1 वर्ष तक वह बालेने का अनुकरण करता है।
  • दूसरे वर्ष से शब्द व वाक्य बालेने लगता है।
  • तीसरे वर्ष में पूछे जाने पर अपना नाम बताने लगता है। कविता या कहानी भी छोटी-छोटी सुनाता है। अपने शरीर के अंग पहचानने लगता है।
  • चौथे वर्ष तक वह 4-5 तक गिनती लिखना व अक्षर लिखना जानने लगता है।
  • पाचंवे वर्ष में शिशु हल्की और भारी वस्तु में अन्तर करने लगता है व विभिन्न रंग पहचानने लगता है। वह अपना नाम लिखने लगता है।

इस पक्रार शैशवावस्था में मानसिक विकास शीघ्रता से होता है। तर्क व निर्णय करने की क्षमता अधिक विकसित नही होती है। जन्म से शिशु की स्मरण शक्ति बहुत कम होती है। ज्ञानेन्द्रियों के विकास के साथ संवदेन क्रिया आरम्भ हो जाती है। इस अवस्था में बच्चे कल्पना जगत में रहते हैं। वे अधिकतर अनुभव, निरीक्षण व अनुकरण द्वारा सीखते हैं। वह छोटी- छोटी समस्याओं का समाधान करने लगता है।





Comments Sarjesh kumar on 12-10-2018

Shaishvavstha me masuk vikas



आप यहाँ पर शैशवावस्था gk, मानसिक question answers, general knowledge, शैशवावस्था सामान्य ज्ञान, मानसिक questions in hindi, notes in hindi, pdf in hindi आदि विषय पर अपने जवाब दे सकते हैं।

Labels: , ,
अपना सवाल पूछेंं या जवाब दें।

Comment As:

अपना जवाब या सवाल नीचे दिये गए बॉक्स में लिखें।

Register to Comment