केन्द्रीय बागवानी संस्थान

Kendriya Baagwani Sansthan

GkExams on 21-11-2018

  • केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान की स्थापना 4 सितंबर 1972 को भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बैंगलोर के तत्वावधान में केन्द्रीय आम अनुसंधान केन्द्र के नाम से की गयी थी।
  • अनुसंधान केन्द्र का उन्नयन कर 1 जून 1984 को इसे केन्द्रीय उत्तर मैदानी उद्यान संस्थान के रूप में पूर्ण संस्थान का दर्जा दिया गया।
  • 14 जून 1995 को संस्थान का नाम बदलकर केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान कर दिया गया। संस्थान अधिदेशित उपोष्ण फलों के विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान कार्य के द्वारा राष्ट्र की सेवा कर रहा है।
  • संस्थान के दो प्रायोगिक प्रक्षेत्र हैं। पहला प्रायोगिक प्रक्षेत्र शहर से लगभग 25 कि.मी. दूर रहमानखेड़ा में 132.5 हेक्टेयर का है जिसमें 4 ब्लाॅक (ब्लाॅक 1-15.5 हेक्टेयर, ब्लाॅक 2-35.5 हेक्टेयर, ब्लाॅक 3-37.42 हेक्टेयर, ब्लाॅक 4-44.08 हेक्टेयर) हैं जबकि दूसरा लखनऊ शहर में रायबरेली मार्ग पर 13.2 हेक्टेयर का है।
  • संस्थान में उच्च स्तर की पौधशाला, वैज्ञानिक पद्धति पर स्थापित फलोद्यान तथा आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित प्रयोगशालाएँ हैं जिसके द्वारा उपोष्ण बागवानी के महत्वपूर्ण चुनौतियों पर कार्य किया जाता है।
  • संस्थान ने सैम हिग्गिनबौटम कृषि एवं प्रौद्योगिकी संस्थान समतुल्य विश्वविद्यालय, इलाहाबाद, ए.पी. एस. विश्वविद्यालय, रीवा, बाबा साहेब भीमराव अंबेदकर विश्वविद्यालय, झांसी, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ के साथ स्नातकोत्तर एंव पीएच. डी. उपाधियों के अनुसंधान कार्य हेतु समझौता ज्ञापन किया हुआ है।
  • संस्थान को इग्नू द्वारा फलों एवं सब्जियों के मूल्य सवंर्धित उत्पादों विषय पर एक वर्ष का डिप्लोमा एवं 6 माह का जैविक खेती में प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रमों के अध्ययन केन्द्र के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।
  • राष्ट्रीय बागवानी मिशन से पुराने एवं अनुत्पादक आम के बागों के जीर्णोद्धार तथा अमरूद में मीडो बागवानी पर प्रशिक्षण के लिये संस्थान को नोडल केन्द्र के रूप में मान्यता प्राप्त हैं।
  • पूर्ण सुसज्जित रेाग एवं कीटनाशी अवशेष विश्लेषण तथा जैव नियंत्रण प्रयोगशालाएँ संस्थान की अनय विशेषताएँ हैं।
  • संस्थान में तुड़ाई उपरान्त प्रबंधन एवं मूल्यवर्धन हेतु आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
  • साथ ही किसान काॅल सेन्टर (18001801551) में दूरभाष द्वारा किसान अपनी बागवानी समस्याओं का निदान कर सकते हैं।

अधिदेश

संस्थान निम्नलिखित अधिदेशों के द्वारा कार्य कर रहा है।

  • उपोष्ण फलों की उत्पादकता बढ़ाने तथा मूल्य श्रृंखला विकसित करने के लिए मौलिक और व्यावहारिक अनुसंधान का कार्य करना।
  • उपोष्ण फलों की उत्पादकता बढ़ानें तथा मूल्य श्रृंखला विकसित करने के लिए
  • उपोष्ण फलों विशेष कर आम एवं अमरूद पर राष्ट्रीय निधान के रूप में कार्य करना।
  • मानव-संसाधन विकास के केन्द्र के रूप में कार्य करना तथा सहभागियों (स्टकहोल्डरों) को परामर्श देना।

उद्देश्य

संस्थान निम्नलिखित उददेश्यों की पूर्ति अधिदेशों के द्वारा कर रहा है।

  • अधिदेशित फल फसलों के आनुवांशिक संसाधनों का प्रबंधन।
  • प्रजनन तथा आनुवंशिक अभियांत्रिकी द्वारा फसल सुधार।
  • पौध सामग्री की गुणवत्ता में सुधार लाते हुए जैव एवं अजैव तनावों का प्रबंधन, यांत्रिकीकरण, आधुनिक प्रवर्धन तकनीक, मूलवृन्त एवं प्रिसिजन फार्मिंग द्वारा उत्पादकता बढ़ाना।
  • तुड़ाई उपरान्त हानि को कम करना तथा समेकित तुड़ाई पूर्व एवं उपरन्त प्रबंधन पद्धतियों, मूल्य संवर्धन तथा उत्पादों के विविधीकरण द्वारा लाभ बढ़ाना।
  • मानव संसाधन विकास, प्रौद्योगिकी हस्तान्तरण, क्षमता उन्नयन तथा इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का मूल्यांकन।
  • आॅंकड़ों एवं अधिदेशित फल फसलों का संकलन।




Comments Jitendra pratap singh on 26-09-2020

Contect no de visarjan jankari kar sake hame aam ke podhe lena hai jankari nahi mil pa rahi pareshababoo madad kare contect no de jisase bat ho jaye jitendra pratap singh vp nayagaon distt jalaun block madhosh tabdeel madhogarh

Vijay kumar on 24-09-2020

Strawberry ki training kaha hoti hai or kab hogi uska koi time btao

Number please on 06-06-2020

Apna contact number bato

Samar kochar on 23-02-2020

We need seeds of jamvant jamun so how can we get it

राजकपूर on 06-02-2020

केन्द्र अनुसंधान कहा है

Aditya jaiswal on 25-04-2019

Kendriya bagwani sansthan ko English me Kya bolenge




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