हेक्साडेसिमल संख्याओं उपयोग करने का लाभ क्या है

HexaDecimal Sankhyaon Upyog Karne Ka Labh Kya Hai

Gk Exams at  2018-03-25


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GkExams on 02-11-2018


और में, हेक्साडेसिमल (आधारांक , या हेक्स अर्थात् षोडश) एक स्थितीय अंक प्रणाली (पोजीशनल न्यूमरल सिस्टम) है जिसके एक मूलांक (रैडिक्स) या आधारांक (बेस) का मान 16 होता है। इसमें सोलह अलग-अलग प्रतीकों का इस्तेमाल होता है जिसमें 0से 9 तक के प्रतीक शून्य से नौ तक के मानों को प्रदर्शित करते हैं और A, B, C, D, E, F (या वैकल्पिक रूप से a से f) तक के प्रतीक दस से पंद्रह तक के मानों को प्रदर्शित करते हैं। उदाहरण के लिए, हेक्साडेसिमल संख्या 2AF3 का मान दाशमिक संख्या प्रणाली में (2 × 163) + (10 × 162) + (15 × 161) + (3 × 160) या 10,995 के बराबर होता है।


प्रत्‍येक हेक्साडेसिमल अंक, चार बाइनरी अंकों (बिट्स) (जिसे "निबल" (nibble) भी कहा जाता है) का प्रतिनिधित्व करता है और हेक्साडेसिमल नोटेशन का उपयोग, कंप्यूटिंग एवं डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स में बाइनरी कोडित मानों के एक मानव-अनुकूल प्रदर्शन के रूप में किया जाता है। उदाहरण के लिए, बाईट के मान 0 से 255 (दशमलव अंक) तक हो सकता है लेकिन इसके मानों को और सुविधाजनक ढ़ंग से 00 से लेकर FF तक वाले दो हेक्साडेसिमल अकों के रूप में प्रदर्शित किया जा सकता है। हेक्साडेसिमल का इस्तेमाल आम तौर पर कंप्यूटर मेमोरी एड्रेसों को दर्शाने के लिए भी किया जाता है।



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