प्रधानमंत्री के कार्य

PradhanMantri Ke Karya

Pradeep Chawla on 12-05-2019

प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का निर्माता होता है, अतः उसका स्थान अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण है. उसकी महत्ता और शक्ति का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंत्रिपरिषद के अस्तित्व में आने के पूर्व ही उसकी नियुक्ति होती है. उसी के परामर्श से राष्ट्रपति अन्य मंत्रियों को नियुक्त करता है. उसके कार्य निम्नलिखित हैं –



Prime Minister देश के राजनीतिक दल का नेता और संसद के बहुमत दल का नेता होता है. अतः यह स्वभाविक है कि वह जनता का प्रिय हो और प्रभावशाली व्यक्ति हो.

वह मंत्रियों को चुनता है और इस प्रकार मंत्रिपरिषद का निर्माण करता है. वह मंत्रियों के बीच कार्यों का बँटवारा भी करता है. इस कार्य में उसे बहुत कुछ स्वतंत्रता रहती है. हाँ, उसे अपने दल के प्रभावशाली व्यक्तियों को चुनना पड़ता है. वह आवश्यकतानुसार किसी भी मंत्री को पदत्याग करने के लिए विवश कर सकता है. यदि उसके चाहने पर भी कोई मंत्री त्यागपत्र न दे, तो वह मंत्रिपरिषद को भंग कर नई मंत्रिपरिषद का निर्माण करता है. इसी कारण प्रधानमंत्री को मंत्रिपरिषद के जन्म, जीवन तथा मृत्यु – तीनों का केंद्रबिंदु कहा जाता है.

वह मंत्रिपरिषद की बैठकों में सभापति का पद ग्रहण करता है. मंत्रिपरिषद के कार्यों, निर्णयों, नीति-निर्धारण इत्यादि में उसका सबसे अधिक हाथ रहता है.

वह मंत्रिपरिषद का नेता है और सभी विभागों के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करने का उसे अधिकार है.

वह विभिन्न विभागों के मतभेद को सुलझाता है और राष्ट्र की नीति निर्धारित करता है. इसका सबसे प्रमाण यह है कि उसके प्रधानमंत्रित्व में सरकार उसी की कहलाती है मोदी सरकार, नेहरु सरकार, इंदिरा सरकार इत्यादि….

PM मंत्रिपरिषद के निर्णयों की सूचना राष्ट्रपति को देता है. वह राष्ट्रपति, लोक सभा तथा मंत्रिपरिषद के बीच कड़ी का कार्य करता है. कोई अन्य मंत्री राष्ट्रपति को किसी बात की सूचना नहीं दे सकता और यदि देगा भी, तो उसकी सूचना प्रधानमंत्री को देगा.

राज्य से बहुत-से ऊँचे पदाधिकारियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के परामर्श से ही करता है जैसे राज्यपाल, राजदूत, संघीय लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्य आदि.

नीति-सम्बन्धी अधिकांश बातों और महत्त्वपूर्ण प्रश्नों पर सरकार की ओर से संसद में वही वक्तव्य देता है. इसी कारण, उसे सरकार का प्रमुख वक्ता कहा जाता है.

चूँकि Prime Minister मंत्रिपरिषद का नेता है, अपनी टीम का कप्तान है, इसलिए समस्त देश के शासन के ऊपर उसका व्यापक अधकार रहता है. देश के आंतरिक एवं बाह्य नीतियों का निर्धारण वही करता है.

संकट के समय PM का अधिकार और भी अधिक बढ़ जाता है क्योंकि उसी के परामर्श से राष्ट्रपति अपने सारे संकटकालीन अधिकारों का प्रयोग करता है.

PM की सिफारिश पर ही राष्ट्रपति लोक सभा को भी विघटित करके नए निर्वाचन की आज्ञा जारी कर सकता है. PM ने अपने इस अधिकार का प्रयोग पहली बार 1970 ई. में किया था. प्रधानमंत्री की सिफारिश पर ही लोक सभा विघटित की गई थी और नए निर्वाचन की व्यवस्था की गई थी. उसी तरह 22 अगस्त , 1979 को भी प्रधानमंत्री की सिफारिश पर लोक सभा विघटित कर नए चुनाव का आदेश जारी किया गया था.



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