अंडमान और निकोबार द्वीप पर सुनामी का प्रभाव 2004

Andman Aur Nicobar Dveep Par Sunami Ka Prabhav 2004

Gk Exams at  2018-03-25


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GkExams on 17-11-2018

भारतवर्ष के परिप्रेक्ष्य में सुनामी उतनी अधिक मात्रा में नहीं है जैसे कि जापान अलास्का व प्रशांत क्षेत्रों में है हाँलाकि यह नहीं कह सकते हैं कि कभी हमारे देश में ऐसा नहीं हुआ है। हमारा विचार है कि भगवान कृष्ण की द्वारका कलयुग के प्रारम्भ में लगभग 5,000 साल पहले सुनामी के कारण आए सागर में दब गई थी व इसी प्रकार दक्षिण भारत में चोला राज्य की राजधानी 1000 साल पहले इसी प्रकार सुनामी के कारण हिन्द महासागर में काल की ग्रास बन गई थी। 26 दिसम्बर, 2004 को आये भूचाल जनित सुनामी ने कई देशों के साथ-साथ भारत के पूर्वी तट पर बहुत अधिक तबाही मचाई थी इस सुनामी के कुछ पहलू इस प्रकार हैं।

भूकम्प का अभिकेन्द्र


इस भूचाल का अभिकेन्द्र सिमीजलेइ द्वीप में भूकम्प व ज्वालामुखी की चापाकार में इंडोनेशिया देश के उत्तरी-पश्चिमी प्रांत सुमात्रा में था जो वादा अंक से 257 किमी उत्तर पश्चिमी (सुमात्रा प्रांत), 990 किमी दक्षिण पूर्व में पोर्ट ब्लेयर (अंडमान सागर) से दूर था। तथा 1806 किमी पूर्वी दक्षिण पूर्व कोलम्बो (श्रीलंका) सब 2028 किमी दक्षिण पूर्व में चेन्नई (भारत) से था इस भूचाल ने 40 साल के इतिहास में सबसे शक्तिशाली सुनामी उत्पन्न की और जिसके कारण मानव इतिहास में सबसे अधिक 3 लाख इन्सानों की मृत्यु हुई।

भूकम्प के दूसरे विवरण


अक्षांश (3.3 डिग्री उत्तर) देशांन्तर (95.8 डिग्री पूर्व) उत्पत्ति समय (6.28 सुबह, भारतीय समय व 0.58 अंतरिक्ष) तीव्रता 9.0 रिक्टर पैमाने पर उद्गम की सतह गहराई (30 किमी) जबकि पहले 10-15 किमी बताई गई थी भूचाल की अवधि (210 सेकेंड तीन भ्रासन की अवस्था में = 60, 60 व 30 सेकेंड की) सुनामी की तरंग की ऊँचाई (20 मीटर, कुछ लोगों का कहना है कि 30-40 मीटर ऊँचाई है) सीधी खड़ी सरकन (15 - 20 मीटर सुण्डा खाई के साथ 1000 किमी से ज्यादा लम्बाई में) भ्रंशन की दिशा (उत्तर पश्चिम - दक्षिण पूर्व दिशा में 8 डिग्री उत्तर पूर्व की ओर)।

सुनामी की विनाश लीला


3,00,000 से अधिक व्यक्तियों की अकाल मृत्यु व लाखों डॉलर के बराबर सम्पत्ति का नुकसान, हजारों व्यक्ति घायल व 20 लाख से अधिक लोगों की पुनर्वास की समस्या उत्पन्न हुई। इस सुनामी ने दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में भारी तबाही मचा दी। इस सुनामी में जो देश प्रभावित हुये हैं उनमें भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, थाईलैण्ड, बर्मा, इंडोनेशिया (सबसे अधिक दो/लाख की मृत्यु) मलेशिया है पर इस सुनामी का कहर मालद्वीप, मेडागास्कर व अफ्रीका महाद्वीप का पूर्वी तट पर भी हुआ (चित्र - 1) सबसे अधिक तबाही बांदा अरब (सुमात्रा - इंडोनेशिया) में हुई या फिर थाईलैंड (फुकेट में) भारत में विनाश का अधिकतर असर तमिलनाडु के कडलीट स्थान से विजयनगरम (आंध्रप्रदेश) के स्थान तक देखा गया (चित्र - 2) भारत के सुदूर दक्षिण में विवेकानन्द मेमोरियल (केरल) तक व केरल के अन्य अंदरूनी क्षेत्रों में भी क्षति हुई व वायुसेना का अण्डमान स्टेशन निकोवार द्वीप समुह तबाह हो गये तथा 100 से ज्यादा लोग मारे गये यदि हमारे पास आगाह करने वाले यंत्र होते तो जनहानि को कुछ कम किया जा सकता था यह जनहानि इतनी न होती क्योंकि भूचाल से उत्पन्न हुई सुनामी को भारतीय क्षेत्रों में आने में कम से कम 2-3 घण्टें लगे, इस सुनामी ने अपनी विनाशलीला अफ्रीका के सोमालिया से पोर्ट ऐलिजाबेथ तक व हिन्द महासागर मालद्वीप व मेडागास्कर में भी दिखाई, हम कह सकते हैं कि संसार का हर देश इससे प्रभावित हुआ।

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सुनामी के दूरगामी परिणाम


26 दिसम्बर, 2004 को आये विनाशकारी भूचाल के दूरगामी परिणाम सामने आये हैं व पूर्ण अन्वेषण के बाद और ज्यादा परिणाम सामने आयेंगे इससे उत्पन्न सुनामी के कारण प्रभावित स्थलों की भू-आकृति ही बदल गई है व जैव सम्पदा पर भी काफी असर पड़ा है काफी मात्रा में तटों से अवसादों व अन्य सामान के समुद्र की खाड़ियों में जाकर इकट्ठे होने से प्रवाल भीत्तियों को नुकसान पहुँचाया है। अण्डमान निकोबार द्वीप समूह में कुछ द्वीपों के निचले क्षेत्र तो जलमग्न हो गये और कुछ द्वीपों में तो 1 से 1/2 मी. तक पानी भर गया तथा कहीं पर समुद्र तटों के काफी नजदीक आ गया, बंगाल की खाड़ी में स्थित इंदिरा प्वाइंट का अस्तिव्त ही समाप्त हो गया है। पानी में डूबने के साथ 1.5 मीटर दक्षिण पूर्व की ओर खिसक गया है तथा जीपीएस के द्वारा पाया गया है कि भारतीय तट 1.5 मीटर समान्तर उत्तरपूर्व की ओर खिसक गये हैं, हालाँकि सागर कन्या व सागर सम्पदा नामक समुद्र विकाश विभाग के जहाज अभी भी अन्वेषण में लगे हुये हैं पर उनकी प्रारम्भिक जाँच यह सिद्ध करती है कि काफी दूरगामी परिणाम इस सुनामी से हुये हैं अमेरिका में नासा संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी की भू-आकृति में अवश्य बदलाव आये हैं जैसे कि पृथ्वी कुछ सेन्टीमीटर (2.5 सेमी) उत्तर की ओर खिसक गई है (145 डिग्री. ई अक्षांश पर) उसके भू-मध्य क्षेत्र में उथल होना पाया गया है इसके साथ ही दिन की अवधि 2.66 माइक्रो सेकेंड घट गई है।

अर्थात पृथ्वी की घूमने की गति बढ़ गई है जैसा कि पहले बताया गया है कि भारतीय पर्पटी 15 से 20 मीटर बर्मा - सुन्डा पर्पटी के नीचे चली गई है (सुन्डा खाई के नीचे चित्र -3) इस सुनामी के बाद संयुक्त अरब अमीरात में बर्फ का गिरना एक ओर मौसम में बदलाव बतलाता है और इस क्षेत्र में अभी भी काफी भूकम्प के झटके आ रहे हैं अस्थितरता दर्शाते हैं समाचार पत्र व टेलीविजन ने तो वैरन द्वीप समूह में (बंगाल की खाड़ी में) ज्वालामुखी फटने के चित्र तक दिखाये जोकि एक उम्मीद है क्योंकि यह द्वीप समूह सुन्‍डा खाड़ी के ऊपर है (चित्र - 2 और - 3)




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