यूनेस्को के ई पी ए का लक्ष्य

UNESCO Ke Ee P A Ka Lakshya

Pradeep Chawla on 14-10-2018

  1. शिक्षा
  2. सभी तीन फोकस क्षेत्रों – पहुंच, गुणवत्‍ता एवं अंतर्वस्‍तु पर शिक्षा में भारत सरकार और यूनेस्‍को के बीच घनिष्‍ट एवं सतत सहयोग का इतिहास रहा है। भारत सबके लिए शिक्षा (ई एफ ए) के लक्ष्‍यों, 2015 पश्‍चात वैश्विक शिक्षा एजेंडा तथा संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव की वैश्विक शिक्षा प्रथम पहल (जी ई एफ आई) की दिशा में यूनेस्‍को के प्रयासों का हिस्‍सा रहा है, जिसकी यूनेस्‍को अग्रणी कार्यान्‍वयन एजेंसी है। प्रारंभिक बाल्‍यावस्‍था देखरेख एवं शिक्षा, माध्‍यमिक शिक्षा, तकनीकी एवं व्‍यावसायिक शिक्षा तथा प्रशिक्षण, उच्‍च शिक्षा आदि में भारत सरकार को नीतिगत एवं कार्यक्रम संबंधी सहायता के माध्‍यम से भारत में यूनेस्‍को द्वारा ई एफ ए के लक्ष्‍यों की प्राप्ति में सहयोग किया जाता है। इस समय भारत शिक्षकों पर ई एफ ए कार्य बल का अध्‍यक्ष है। यूनेस्‍को अपनी पीठ के कार्यक्रम के माध्‍यम से अनुसंधान की क्षमता बढ़ाने के लिए काम कर रहा है।
  3. भारत में शिक्षा पर यूनेस्‍को के हाल के महत्‍वपूर्ण सम्‍मेलनों में कौशल एवं शिक्षा पर एशियाई शिखर बैठक शामिल है जिसमें संपूर्ण एशियाई क्षेत्र से शिक्षाविदों, मंत्रियों और नीतिनिर्माताओं ने भाग लिया। अफगानिस्‍तान इस्‍लामिक गणराज्‍य के माननीय शिक्षा मंत्री डा. फारूक वारडक ने शिखर बैठक का उद्घाटन किया। सार्क के शिक्षा मंत्रियों की दूसरी बैठक नई दिल्‍ली में 30-31 अक्‍टूबर, 2014 को हुई जिसमें सार्क शिक्षा विकास के लक्ष्‍यों पर प्रगति की समीक्षा की गई; उपलब्धियों को सुदृढ़ करने में सहयोग को सुदृढ़ किया गया तथा चुनौतियों का उल्‍लेख किया गया। मानव संसाधन विकास मंत्री ने बैठक की अध्‍यक्षता की। संस्‍कृति, विरासत और सूचना प्रौद्योगिकी
  4. संस्‍कृति और विरासत भारत में यूनेस्‍को की सबसे प्रमुख गतिविधियों में से एक है तथा इसमें यूनेस्‍को की विश्‍व विरासत सूची में शामिल भारत की सांस्‍कृतिक एवं सभ्‍यतागत विरासत की रक्षा करना शामिल है। वास्‍तव में, 1972 का विश्‍व विरासत अभिसमय और प्रख्‍यात भारतीय श्री किशोर राव की अध्‍यक्षता में विश्‍व विरासत केंद्र के माध्‍यम से इसका कार्यान्‍वयन यूनेस्‍को का एक फ्लैगशिप कार्यक्रम है तथा यह संस्‍कृति मंत्रालय तथा भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण के निकट सहयोग से काम करता है। संयुक्‍त राष्‍ट्र विश्‍व विरासत समिति के सदस्‍य के रूप में भारत इस समय अनेक सांस्‍कृतिक एवं प्राकृतिक परियोजनाओं के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय मान्‍यता प्राप्‍त करने का प्रयास कर रहा है।
  5. संस्‍कृति एवं सूचना प्रौद्योगिकी के तहत, यूनेस्‍को डिजिटल सशक्तीकरण प्रतिष्‍ठान के साथ साझेदारी कर रहा है। ग्रामीण भारत के कारीगरों एवं कलाकारों के लिए ‘आई सी टी का प्रयोग’ पर हाल के सम्‍मेलन में कलाकार एवं ग्रामीण कारीगर, शिल्‍पी संगठन, ऑन लाइन शिल्‍प रिटेलर तथा कला एवं संस्‍कृति के क्षेत्र में आई सी टी का प्रयोग करके नवाचारी कार्य करने वाले संगठन एकत्र हुए। डिजिटल अर्काइव, ग्रामीण क्षेत्रों से लोक कंसल्‍ट का लाइव वेब कास्‍ट, विरासत का समुदाय आधारित प्रलेखन तथा परफार्मर का कापीराइट सहित विविध पहलों पर प्रस्‍तुतियां दी गई।
  6. भारत में 25 मिलियन श्रोताओं के साथ विश्‍व रेडियो दिवस मनाने में यूनेस्‍को ‘सामुदायिक रेडियो एवं सामाजिक समावेशन’ पर एक राष्‍ट्रीय कार्यक्रम के लिए सहायता प्रदान कर रहा है। इसके तहत यूनेस्‍को द्वारा स्‍थापित ''सामुदायिक मीडिया पर दक्षिण एशिया नेटवर्क’’ के उद्घाटन तथा ''आंतरिक पलायन – सामुदायिक रेडियो के लिए मैनुअल’’ नामक यूनेस्‍को के प्रशिक्षण मैनुअल के समर्पण के साथ एक उद्घाटन सत्र शामिल होगा।
  7. यह रेखांकित करना जरूरी है कि यूनेस्‍को में विज्ञान के लिए ‘एस’ को उस समय विशेष स्‍थान दिया गया जब संगठन स्‍थापित किया गया। द्वितीय विश्‍व युद्ध की समाप्ति के शीघ्र बाद संक्षेपाक्षर यूनेस्‍को में से विज्ञान के लिए ‘एस’ गायब हो गया। सर जूलियन, हक्‍सले के नेतृत्‍व में यूनाइटेड किंगडम के वैज्ञानिक समूह ने सुनिश्चित किया कि नवंबर, 1945 में ‘एस’ जोड़ा गया जिससे इसके बाद संयुक्‍त राष्‍ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्‍कृतिक संगठन (यूनेस्‍को) का सृजन हुआ। पहली बार, किसी अंतर्सरकारी संगठन को विज्ञान में अंतर्राष्‍ट्रीय संबंधों के विकास की महती जिम्‍मेदारी सौंपी गई थी। इस क्षेत्र की गतिविधियों में निम्‍नलिखित शामिल हैं :

    · विज्ञान में क्षमता का सुदृढ़ीकरण;
    · विज्ञान नीति से संबंधित गतिविधियां;
    · विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लिए सूचना प्रणालियां; और
    · विज्ञान, समाज एवं विकास।
  8. प्रमुख विशेषताओं में भारत के प्राकृतिक बायोस्फियर भंडार, महासागरीय संसाधन तथा जल शामिल हैं, जो प्राकृतिक विज्ञान के क्षेत्र में भारत - यूनेस्‍को सहयोग के फोकस क्षेत्र हैं। भारत 2015 में आई आई ओ ई की 50वीं वर्षगांठ मनाने के लिए दूसरे अंतर्राष्‍ट्रीय हिंद महासागर अन्‍वेषण (आई आई ओ ई – 2) के लिए अंतर्सरकारी महासागर आयोग का समर्थन करने की योजना बना रहा है। भारत इस आयोग की कार्यपालक परिषद का सदस्‍य है। मानव एवं बायोस्फियर कार्यक्रम वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्‍यम से मानव जाति एवं उनके पर्यावरण के बीच संबंध को संवारने की दिशा में काम कर रहा है तथा भारत के नौ बायोस्फियर भंडार यूनेस्‍को के बायोस्फियर भंडार के विश्‍व नेटवर्क में शामिल हैं।




Comments Sandeep on 02-09-2018

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