शुष्क सेल कार्यप्रणाली

Shushk Sale KaryaPrannali

GkExams on 17-11-2018

शुष्क सेल (dry cell) एक प्रकार के विद्युतरासायनिक सेल है जो कम बिजली से चल सकने वाले पोर्टेबल विद्युत-युक्तियों (जैसे ट्रांजिस्टर रेडियो, टार्च, कैलकुलेटर आदि) में प्रयुक्त होते हैं। इसके अन्दर जो विद्युत अपघट्य (electrolyte) उपयोग में लाया जाता है वह लेई-जैसा कम नमी वाला होता है। इसमें किसी द्रव का प्रयोग नहीं किया जाता जिसके कारण इसे "शुष्क" सेल कहा जाता है। (कार आदि में प्रयुक्त बैटरियों में प्रयुक्त विद्युत अपघट्य द्रव के रूप में होता है।) चूंकि इसमें कुछ भी चूने (लीक) लायक द्रव नहीं होता, पोर्टेबल युक्तियों में इसका उपयोग सुविधाजनक होता है।


सामान्यत: प्रयोग में आने वाला शुष्क सेल वस्तुत: एक जिंक-कार्बन बैटरी होती है जिसे शुष्क लेक्लांची सेल (Leclanché cell) भी कहते हैं। इसकी सामान्य स्थिति (बिना धारा की स्थिति में) में वोल्टता 1.5 वोल्ट होती है जो कि अल्कलाइन बैटरी के सामान्य वोल्टता के बराबर ही है। जहाँ 1.5 वोल्ट से अधिक वोल्टेज की जरूरत होती है वहाँ कई ऐसे सेल श्रेणी क्रम (series) में जोड़ दिये जाते हैं। (3 सेल श्रेणी क्रम में जोड़ने पर 4.5 वोल्ट देते हैं; 9 वोल्ट की बहुप्रचलित बैटरी में 6 कार्बन-जिंक या अल्कलाइन-सेल सीरीज में जुड़े होते हैं)। इसी तरह जहाँ अधिक धारा की आवश्यकता होती है वहाँ कई सेलों को समान्तर क्रम (parallel) में जोड़ दिया जाता है।

शुष्क सेल के प्रकार

  • प्राथमिक शुष्क सेल - जिन्हें डिचार्ज होने के बाद पुनः चार्ज नहीं किया जा सकता
    • जिंक-कार्बन सेल (इन्हें 'लेक्लांची सेल' भी कहते हैं।)
    • अल्कलाइन सेल
    • लिथियम सेल
    • मर्करी सेल
    • सिल्वर आक्साइड सेल
  • द्वितीयक शुष्क सेल - जिन्हें डिचार्ज होने के बाद पुनः चार्ज किया जा सकता है।
    • निकल-कैडमियम सेल
    • लिथियम आयन सेल
    • निकल-मेटल आक्साइड सेल




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