अनुबंध खेती परिभाषा

AnuBandh Kheti Paribhasha

Gk Exams at  2018-03-25


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Pradeep Chawla on 01-11-2018


निर्वाह और वाणिज्यिक दोनों फसलों के लिए सदियों से देश के विभिन्न भागों में विभिन्न प्रकार की अनुबंध कृषि की व्यवस्था प्रचलित है। गन्ना, कपास, चाय, कॉफी आदि वाणिज्यिक फसलों में हमेशा से अनुबंध कृषि या कुछ अन्य रूपों को शामिल किया है। यहां तक कि कुछ फल फसलों और मत्स्य पालन के मामले में अक्सर अनुबंध कृषि समझौते किए जाते हैं, जो मुख्य रूप से इन वस्तुओं के सट्टा कारोबार से जुड़े होते हैं। आर्थिक उदारीकरण के मद्देनजर अनुबंध कृषि की अवधारणा का महत्व बढ़ रहा है, विभिन्न राष्ट्रीय या बहुराष्ट्रीय कंपनियां प्रौद्योगिकियां और पूंजी उपलब्ध कराने के द्वारा विभिन्न बागवानी उत्पादों के विपणन के लिए किसानों के साथ अनुबंध में प्रवेश कर रहे हैं।


आम तौर पर अनुबंध कृषि को पूर्व निर्धारित कीमतों पर, उत्पादन और आगे के समझौतों के अंतर्गत कृषि उत्पादों की आपूर्ति के लिए किसानों और प्रसंस्करण और/या विपणन कंपनियों के बीच एक समझौते के रूप में परिभाषित किया गया है। इस व्यापक ढांचे के भीतर, अनुबंध में किए गए प्रावधानों की गहराई और जटिलता के अनुसार संविदात्मक व्यवस्था की तीव्रता के आधार पर अनुबंध कृषि के विभिन्न प्रकार प्रचलित हैं। कुछ विपणन पहलू तक सीमित हो सकते हैं या कुछ में प्रायोजक द्वारा संसाधनों की आपूर्ति और उत्पादकों की ओर से समझौते के द्वारा फसल प्रबंधन विनिर्देशों का पालन करने के लिए विस्तारित हो सकते है। इस तरह की व्यवस्था का आधार किसानों की तरफ से क्रेता को मात्रा और निर्धारित गुणवत्ता के मानकों पर एक विशेष वस्तु प्रदान करने की प्रतिबद्धता और प्रायोजक की ओर से किसान के उत्पादन का समर्थन और वस्तु की खरीद करने की एक प्रतिबद्धता है।

अनुबंध कृषि की जरूरत

  1. अनुबंध कृषि के साधनों ने कृषि क्षेत्र की निम्नलिखित चुनौतियों को संबोधित किया है -
  2. खंडित सम्पत्ति, बाजार के बिचौलियों की लंबी श्रृंखला।
  3. खरीदारों की आवश्यकताओं के बारे में निर्माता की अज्ञानता - विपणन अवधारणा
  4. कम कृषि मशीनीकरण
  5. पूंजी और संकट बिक्री की अपर्याप्तता
  6. पैमाने की अर्थव्यवस्था, कॉर्पोरेट प्रबंधन, उच्च लेनदेन लागत, ऊर्ध्वाधर एकीकरण आदि का अभाव

संविदात्मक व्यवस्था के कारक

संविदात्मक व्यवस्था निम्नलिखित तीन कारकों पर निर्भर करती है-

  1. बाजार प्रावधान- भविष्य की बिक्री के नियम और शर्तें- मूल्य, गुणवत्ता, मात्रा और समय आदि
  2. संसाधनों का प्रावधान- जमीन तैयार करने और तकनीकी सलाह सहित चयनित आदान, विस्तार या साख (क्रेडिट)
  3. प्रबंधन विनिर्देश- उत्पादक द्वारा सिफारिश किए गए उत्पादन के तरीके, आदानों के प्रशासन, खेती और फसल कटाई के विनिर्देशों का पालन करने के लिए सहमत होता है ।

अनुबंध कृषि के लिए उपयुक्त फसलें

  1. नश्वर (जल्दी खराब होने वाली)- लंबी अवधि के लिए भंडारण नहीं किया जा सकता और तुरंत बाजार खोजने की आवश्यकता होती है।
  2. भारी- परिवहन करना महंगा
  3. बागान की फसलें- उत्पादकों (उगाने वालों) सम्पत्ति (एस्टेट) के बागान को छोड़ प्रसंस्करण करने वाले के साथ संबंध में बंद होते हैं।
  4. प्रसंस्करण योग्य- उत्पादकों और प्रसंस्करण करने वालों के बीच प्रसंस्करण निर्मित अंतर-निर्भरता की आवश्यकता। शोषण के लिए असुरक्षित।
  5. गुणवत्ता में बदलाव- गुणवत्ता में बदलाव करने के लिए उत्तरदायी फसलें
  6. अपरिचित- सफेद मूसली, अश्वगंधा, आदि जैसे औषधीय पौधे और खीरा जैसे नए नए उत्पादों के लिए बाजार



Comments vikram khande on 12-05-2019

Anubandh kheti kya he



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