अंबिकापुर पर्यटन स्थल

अंबिकापुर Tourism Sthal

GkExams on 06-02-2019

दर्शनीय स्थल

चेन्द्रा ग्राम


मैनपाट

अम्बिकापुर- रायगढ राजमार्ग पर 15 किमी की दूरी पर चेन्द्रा ग्राम स्थित है। इस ग्राम से उत्तर दिशा में तीन कि॰मी॰ की दूरी एक जल प्रपात स्थित है। इस जलप्रपात के पास ही वन विभाग का एक नर्सरी है, जहां विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों को रोपित किया गया है। इस जल प्रपात में वर्षभर पर्यटक प्राकृतिक सौन्दर्य का आनंद लेने आते हैं। यहां पर एक तितली पार्क भी विकसित किया जा रहा है।

ठिनठिनी पत्थर

अम्बिकापुर नगर से 12 किलोमीटर की दूरी पर दरिमा हवाई अड्डा है। दरिमा हवाई अड्डे के पास बड़े - बड़े पत्थरों का समूह है। इन पत्थरों को किसी ठोस चीज से ठोकने पर आवाजें आती हैं। सर्वाधिक आश्चर्य की बात तो यह है कि ये आवाजें विभिन्न धातुओं की आती हैं। इनमें से किसी - किसी पत्थर से तो खुले बर्तन को ठोकने के समान आवाज आती है। इस पत्थरों में बैठकर या लेटकर बजाने से भी इसके आवाज में कोई अंतर नहीं पड़ता है। एक ही पत्थर के दो टुकड़े अलग-अलग आवाज पैदा करते हैं। इस विलक्षणता के कारण इस पत्थरों को अंचल के लोग ठिनठिनी पत्थर कहते हैं।

सतमहला

अम्बिकापुर के दक्षिण में लखनपुर से लगभग दस कि॰मी॰ की दूरी पर कलचा ग्राम स्थित है, यहीं पर सतमहला नामक स्थान है। यहां सात स्थानों पर महलों के भग्नावशेष हैं। एक मान्यता के अनुसार यहां पर प्राचीन काल में सात विशाल शिव मंदिर थे, जबकि जनजातियों के अनुसार इस स्थान पर प्राचीन काल में किसी राजा का सप्त प्रांगण महल था। यहां पर दर्शनीय स्थल शिव मंदिर, षटभुजाकार कुंआ और सूर्य प्रतिमा है।

महामाया मन्दिर

सरगुजा जिले के मुख्यालय अम्बिकापुर के पूर्वी पहाड़ी पर प्राचीन महामाया देवी का मंदिर स्थित है। इन्हीं महामाया या अम्बिका देवी के नाम पर जिला मुख्यालय का नामकरण अम्बिकापुर हुआ है। एक मान्यता के अनुसार अम्बिकापुर स्थित महामाया मन्दिर में महामाया देवी का धड़ स्थित है और इनका सिर बिलासपुर जिले के रतनपुर के महामाया मन्दिर में है। इस मन्दिर का निर्माण महाराजा रघुनाथ शरण सिंहदेव ने कराया था। चैत्र व शारदीय नवरात्र में विशेष रूप अनगिनत भक्त इस मंदिर में जाकर पूजा अर्चना करते हैं।

तकिया

अम्बिकापुर नगर के उतर-पूर्व छोर पर तकिया ग्राम स्थित है इसी ग्राम में बाबा मुराद शाह, बाबा मुहम्मद शाह और उन्ही के पैर की ओर एक छोटी मजार उनके तोते की है यहां पर सभी धर्म के एवं सम्प्रदाय के लोग एक जुट होते हैं मजार पर चादर चढाते हैं और मन्नते मांगते है बाबा मुरादशाह अपने "मुराद" शाह नाम के अनुसार सबकी मुरादे पूरी करते हैं। इसी मजार के पास ही एक देवी का भी स्थान है इस प्रकार इस स्थान पर हिन्दू देवी देवता और मजार का एक ही स्थान पर होना धार्मिक एवं सामाजिक समन्वय का जीवंत उदाहरण है।

बिलद्वार गुफा

यह गुफा शिवपुर के निकट अम्बिकापुर से एक घण्टे की दूरी पर है। इसमें अनेक प्राचीन मूर्तियां हैं। इसमें महान नामक एक नदी का पानी निकलता रहता है, वहीं इस नदी का उद्गम भी है। इस गुफा का दूसरा छोर महामाया मंदिर के निकट निकलता है। वर्तमान में बिलद्वार गुफा बन्द हो चुका है क्योंकि कुछ वर्षों पूर्व अम्बिकापुर जिले में बहुंत भयंकर वर्षा के कारण बिलद्वार गुफा के चट्टान धस गए और गुफा मार्ग बंद हो गया।

बांक जल कुंड

अम्बिकापुर से भैयाथान से अस्सी कि.मी की दूरी पर ओडगी विकासखंड है, यहां से 15 किलोमीटर की दुरी पर पहाडियों की तलहटी में बांक ग्राम बसा है। इसी ग्राम के पास रिहन्द नदी वन विभाग के विश्राम गृह के पास अर्द्ध चन्द्राकार बहती हुई एक विशाल जल कुंड का निर्माण करती है। इसे ही बांक जल कुंड कहा जाता है। यह जल कुंड अत्यंत गहरा है, जिसमें मछलियां पाई जाती है। यहां वर्ष भर पर्यटक मछलियों का शिकार करने एवं घुमनें आते हैं।



Comments

आप यहाँ पर अंबिकापुर gk, पर्यटन question answers, general knowledge, अंबिकापुर सामान्य ज्ञान, पर्यटन questions in hindi, notes in hindi, pdf in hindi आदि विषय पर अपने जवाब दे सकते हैं।

Labels: , , , , ,
अपना सवाल पूछेंं या जवाब दें।




Register to Comment