शिक्षा का अधिकार की आलोचना

Shiksha Ka Adhikar Ki Aalochana

Pradeep Chawla on 14-10-2018


इस विधेयक की आलोचना में जो बातें कहीं जा रहीं हैंुनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

  • मुफ्त और अनिवार्य से जरूरी है समान शिक्षा - अच्छा होता कि सरकार मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का बिल लाने पर जोर देने के बजाय कॉमन स्कूल का बिल लाने पर ध्यान केंद्रित करती। सरकार यह क्यों नहीं घोषणा करती कि देश का हर बच्चा एक ही तरह के स्कूल में जाएगा और पूरे देश में एक ही पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा।
  • मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के तहत सिर्फ 25 फीसदी सीटों पर ही समाज के कमजोर वर्ग के छात्रों को दाखिला मिलेगा। यानि शिक्षा के जरिये समाज में गैर-बराबरी पाटने का जो महान सपना देखा जाता वह अब भी पूरा नहीं होगा।
  • मुफ्त शिक्षा की बात महज धोखा है, क्योंकि इसके लिए बजट प्रावधान का जिक्र विधेयक में नहीं है।
  • विधेयक में छः साल तक के 17 करोड़ बच्चों की कोई बात नहीं कही गई है। संविधान में छः साल तक के बच्चों को संतुलित आहार, स्वास्थ्य और पूर्व प्राथमिक शिक्षा का जो अधिकार दिया गया है, वह इस विधेयक के जरिए छीन लिया गया है।
  • इस विधेयक में लिखा है कि किसी भी बच्चे को ऐसी कोई फीस नहीं देनी होगी, जो उसको आठ साल तक प्रारंभिक शिक्षा देने से रोक दे। इस घुमावदार भाषा का शिक्षा के विभिन्ना स्तरों मनमाने ढंग से उपयोग किया जाएगा।
  • इस कानून का क्रियान्वन कैसे होगा, यह स्पष्ट नहीं है। नि:शुल्क शिक्षा को फीस तक परिभाषित नहीं किया जा सकता। इसमें शिक्षण सामग्री से लेकर सम्पूर्ण शिक्षा है या नहीं, यह देखना होगा।



Comments Mantuk Kumar panjiyar on 19-05-2020

शिक्षा के अधिकार अधिनियम २००९की विस्तृत आलोचना

Or कोई आलोचना on 20-01-2020

Or कोई आलोचना है to btae

aditi on 24-11-2019

iske paksh me talk do

रामबाबू विश्वकर्मा पूर्व जनपद सदस्य राजगढ़ on 12-05-2019

शिक्षा का अधिकार अधिनिय 2009 के प्रावधानों के अनुसार बच्चों को निः शुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कहा मिल रही है।शिक्षक समय पर स्कूल नही पहुचते 12 बजे स्कूल खोलते 3:30पpm पर स्कूल बंद कर घर लौट आते है । क्योकि 1से 8 तक की कक्षाओं में फेल करने का कोई प्रावधान ही नही है पढ़ाने की कोई जरूरत ही नही,मेने छोटे बच्चों को स्कूल में झाड़ू लगाते हुए देखा जिससे उनको ए लर्जि भी हो जाती है।बहुत कमियां है कहा तक बताए मुझे तो इस समस्या को लेकर अनिश्चित कालीन धरने पर बेठना ही पड़ेगा।




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