सूर्यातप को प्रभावित करने वाले कारक

Suryatap Ko Prabhavit Karne Wale Kaarak

Pradeep Chawla on 27-09-2018

आतपन को प्रभावित करने वाले कारक

भूपृष्ठ और उसके वायुमंडल को गरम करने में धूप का विशेष महत्व है। किंतु आतपन, अर्थात् किसी स्थान के भूपृष्ठ को गरम करने, में धूप का अंशदान दिवालोक की अवधि के अतिरिक्त अनेक अन्य बातों पर भी निर्भर करता है, जिनमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण हैं :

क्षितिज के समतल पर सूर्यकिरणों की नति

आतपन सौर उच्चता, या सौर किरणों द्वारा क्षितिज पर बनाए हुए कोण, पर निर्भर करता है। किसी क्षैतिज पृष्ठ पर आतपन की तीव्रता इस कोण की ज्या (sine) की अनुलोमानुपाती होती है। भूअक्ष के झुकाव के कारण ज्यों ज्यों कोई गोलार्ध सूर्य के सम्मुख होता जाता है, त्यों त्यों किसी स्थान पर सौर किरणों द्वारा क्षितिज पर बनाया गया यह कोण वर्ष भर, प्रत्येक क्षण बदलता रहता है।

सूर्य से पृथ्वी की दूरी

दीर्घवृत्ताकार पथ पर परिक्रमा करते समय पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी वर्ष भर बदलती रहती है। जनवरी में पृथ्वी सूर्य के निकटतम और जुलाई में दूरतम होती है। स्पष्ट है पृथ्वी पर आतपन की तीव्रता जनवरी में जुलाई की अपेक्षा अधिक होनी चाहिए। आतपन में वृद्धि तो होती है, लेकिन बहुत कम। बहुधा यह वृद्धि, आतपन को कम करनेवाले कुछ अन्य कारकों से, क्षतिपूरित हो जाती है।

वायुमंडल में पारेषण, अवशोषण एवं विकिरण

वायुमंडल में पारेषण (ट्रांसमिशन), अवशोषण (एब्जॉर्ब्सन) तथा विकिरण (रेडिएशन) घटनाओं की परस्पर जटिल क्रिया होती है। सूर्यकिरणों की तरंग लघुदैर्ध्य के आपतित विकिरण का लगभग 42 प्रति शतअंश पृथ्वी के वायुमंडल की बाह्य सीमा से ही अंतरिक्ष को तत्काल लौट जाता है। शेष विकिरण का लगभग 15 प्रतिशत वायुमंडल द्वारा और 43 प्रतिशत भूपृष्ठ द्वारा सीधे अवशोषित हो जाता है। इस अवशोषित विकिरण के आठ प्रति शत को भूपृष्ठ पुन: दीर्घतरंगों के रूप में विकिरण करता है और 35 प्रतिशत को वायुमंडल में पारेषित करता है। पारेषण द्वारा प्राप्त विकिरण को वायुमंडल दीर्घतरंग ऊष्मा विकिरण के रूप में अंतरिक्ष को पुन: विकीर्ण करके, आगामी लघुतरंग और प्रगामी दीर्घतरंग विकिरणों में संतुलन करता है। इस प्रकार धूप में हेरफेर होने पर भी भूपृष्ठ का माध्य ताप व्यवहारत: लगभग एक सा रहता है।


किसी दिन, किसी स्थान पर धूप की कुल अवधि बदली, कोहरा आदि आकाश को धुँधला करनेवाले अनेक घटकों पर निर्भर करती है। धूप अभिलेखक (Sunshine Recorder) नामक उपकरण से वेधशालाओं में धूप के वास्तविक घंटों का निर्धारण किया जाता है। इस उपकरण में एक चौखटे पर काच का एक गोला स्थापित रहता है, जिसे इस प्रकार समंजित किया जा सकता है कि गोले का एक व्यास ध्रुव की ओर संकेत करे। गोले के नीचे उपयुक्त स्थान पर समांतर रखे, घंटों में अंशाकिंत पत्रक (card) पर सौर किरणों को फोकस करते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच जब भी बदली, कोहरा आदि नहीं होते, तब फोकस पड़ी हुई किरणें पत्रक को समुचित स्थान पर जला देती हैं।





Comments Shekhar on 13-07-2021

सूर्यातप को प्रभावित करने वाले तत्व

Nirmala ninama on 23-06-2021

Gograpy me smja ye

Ajeet Kumar prajapati on 13-04-2021

सूर्यातप के भिन्नता को प्रभावित करने वाले मूल कारकों को बताइए

karina on 01-03-2021

सूर्य तप को prabhavit karne vale karak Kya hai

Dinesh Kumar on 08-02-2021

Surytap KO prabhavit karne wale karak

Ke Nam Kya hai .

Bhartiy krishi kitane prakar Ki ki jati hai.

Surytap. Kise. Kahtehe on 29-01-2021

Soorytapkisekahtehe


Yunus on 29-12-2020

Suryetap ko prabhasit Karne wale karako ko varnan kijiye

Bhisham Bhisham Bhidham on 29-11-2020

सूर्य को नियंत्रित करनेवाले कारकों को समझाइए

Karan on 06-09-2020

तत्व और कारक में अंतर बताइए

Vindeshwari on 09-12-2019

Suryatap koa bitran parbhabit hota hi

abhishek abhishek on 30-11-2019

Suratap ka mapan kiya jata h

नीरज राज on 27-11-2019

सूर्यताप के वितरण को प्रभावित कर देने वाले कारकों का वर्णन कीजिए

8959634439 पर आप sms पर उत्तर दें


Sukhdev on 16-10-2019

Rajshthan ke jile kitne h

Brijmohan Meena on 14-10-2019

Suryatap ko prabhavit Karne Wale Karak kaun kaun se Hain

Sonu on 12-05-2019

सूर्यातप gk, प्रभावित question answers, कारक

Avni singh on 23-04-2019

Jalpratap kya hai

Avni singh on 23-04-2019

Surya pratap kya hai



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