अकबर द्वारा लड़े गए युद्ध

Akbar Dwara Lade Gaye Yudhh

Gk Exams at  2018-03-25


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Pradeep Chawla on 28-09-2018

राज्य का विस्तार

खोये हुए राज्य को पुनः प्राप्त करने के लिये अकबर के पिता के अनवरत प्रयत्न अंततः सफल हुए और वह सन्‌ में पहुँच सका किंतु अगले ही वर्ष सन्‌ में राजधानी में उसकी मृत्यु हो गई और के नामक स्थान पर 14 वर्ष की आयु में अकबर का राजतिलक हुआ। अकबर का संरक्षक बैराम खान को नियुक्त किया गया जिसका प्रभाव उस पर तक रहा। तत्कालीन राज्य केवल से तक ही फैला हुआ था। इसके साथ ही अनेक समस्याएं भी सिर उठाये खड़ी थीं। 1563 में शम्सुद्दीन अतका खान की हत्या पर उभरा जन आक्रोश, 1564-65 के बीच उज़बेक विद्रोह और 1566-67 में मिर्ज़ा भाइयों का विद्रोह भी था, किंतु अकबर ने बड़ी कुशलता से इन समस्याओं को हल कर लिया। अपनी कल्पनाशीलता से उसने अपने सामंतों की संख्या बढ़ाई। इसी बीच 1566 में महाम अंका नामक उसकी धाय के बनवाये मदरसे (वर्तमान में) से शहर लौटते हुए अकबर पर तीर से एक जानलेवा हमला हुआ, जिसे अकबर ने अपनी फुर्ती से बचा लिया, हालांकि उसकी बांह में गहरा घाव हुआ। इस घटना के बाद अकबर की प्रशसन शैली में कुछ बदलाव आया जिसके तहत उसने शासन की पूर्ण बागडोर अपने हाथ में ले ली। इसके फौरन बाद ही के नेतृत्व में अफगान सेना पुनः संगठित होकर उसके सम्मुख चुनौती बनकर खड़ी थी। अपने शासन के आरंभिक काल में ही अकबर यह समझ गया कि को समाप्त किए बिना वह चैन से शासन नहीं कर सकेगा। इसलिए वह के सबसे शक्तिशाली शासक पर आक्रमण करने चल पड़ा।

दिल्ली की सत्ता-बदल
अकबर के समय मुग़ल साम्राज्य

दिल्ली का शासन उसने मुग़ल सेनापति तारदी बैग खान को सौंप दिया। सिकंदर शाह सूरी अकबर के लिए बहुत बड़ा प्रतिरोध साबित नही हुआ। कुछ प्रदेशो मे तो अकबर के पहुंचने से पहले ही उसकी सेना पीछे हट जाती थी। अकबर की अनुपस्थिति मे हेमू विक्रमादित्य ने दिल्ली और पर आक्रमण कर विजय प्राप्त की। को हेमु ने स्वयं को भारत का महाराजा घोषित कर दिया। इसी के साथ दिल्ली मे हिंदू राज्य की पुनः स्थापना हुई।

सत्ता की वापसी

दिल्ली की पराजय का समाचार जब अकबर को मिला तो उसने तुरन्त ही बैरम खान से परामर्श कर के दिल्ली की तरफ़ कूच करने का इरादा बना लिया। अकबर के सलाहकारो ने उसे की शरण में जाने की सलाह दी। अकबर और हेमु की सेना के बीच मे युद्ध हुआ। यह युद्ध के नाम से प्रसिद्ध है। संख्या में कम होते हुए भी अकबर ने इस युद्ध मे विजय प्राप्त की। इस विजय से अकबर को 1500 हाथी मिले जो मनकोट के हमले में सिकंदर शाह सूरी के विरुद्ध काम आए। ने आत्मसमर्पण कर दिया और अकबर ने उसे प्राणदान दे दिया।

चहुँओर विस्तार

दिल्ली पर पुनः अधिकार जमाने के बाद अकबर ने अपने राज्य का विस्तार करना शुरू किया और को में, को में, को में, को में, को में और को में मुग़ल साम्राज्य के अधीन कर लिया। अकबर ने इन राज्यों में एक एक राज्यपाल नियुक्त किया। अकबर यह नही चाहता था की मुग़ल साम्राज्य का केन्द्र जैसे दूरस्थ शहर में हो; इसलिए उसने यह निर्णय लिया की मुग़ल राजधानी को ले जाया जाए जो साम्राज्य के मध्य में थी। कुछ ही समय के बाद अकबर को राजधानी फतेहपुर सीकरी से हटानी पड़ी। कहा जाता है कि पानी की कमी इसका प्रमुख कारण था। फतेहपुर सीकरी के बाद अकबर ने एक चलित दरबार बनाया जो कि साम्राज्य भर में घूमता रहता था इस प्रकार साम्राज्य के सभी कोनो पर उचित ध्यान देना सम्भव हुआ। सन में उत्तर पश्चिमी राज्य के सुचारू राज पालन के लिए अकबर ने को राजधानी बनाया। अपनी मृत्यु के पूर्व अकबर ने सन में वापस आगरा को राजधानी बनाया और अंत तक यहीं से शासन संभाला।





Comments Suraj on 30-10-2019

Akbar dwara lade Gaye Pramukh Yudh ke naam V Varsh

Dipali gupta on 30-10-2019

Akbar ke yudh

Dipti on 24-07-2019

Akbar dwara lade gye yudh k name

Dipti on 24-07-2019

Akbar dwara lade gye yudh k name

Aman on 06-07-2019

अकबर का अंतिम युद्ध किसके साथ हुआ था

Ajay ahirwar on 12-05-2019

Akbar long tha


Rizwan ali on 19-04-2019

Akbar dwara lade Gaye Yudh ke Naam bataye



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