उचकना (Uchakna) = To speak up
उचकना ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ उच्च = ऊँचा + करण = करना]
१. ऊँचा होने के लिये पैर के पंजों के बल एँडी उठाकर खड़ा होना । कोई वस्तु लेने या देखने के लिये शरीर को उठाना और सिर ऊँचा करना । जैसे,— (क) दीवार की आड़ से क्या उचक उचककर देख रहे हो । (ख) वह लड़का टोकरे में से आम निकालने के लिये उचक रहा है । उ॰—सुठि ऊँचे देखत वह उचका । दृष्टि पहुँच पर पहुँच न सका । —जायसी (शब्द॰) ।
२. उछलना । कूदना । उ॰—यों कहिकै उचकी परजंक ते पूरि रही दृग बारि की बूँदे । —देव (शब्द॰) । उचकना ^२ क्रि॰ स॰ उछलकर लेना । लपककर छीपना । उठाकर चल देना । जैसे—जो चीज होती है तुम हाथ से उचक ले जाते हो । संयो॰ क्रि॰—ले जाना । उचकना ^३ संज्ञा पुं॰ उचकने की क्रिया या भाव ।
उचकना ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ उच्च = ऊँचा + करण = करना]
१. ऊँचा होने के लिये पैर के पंजों के बल एँडी उठाकर खड़ा होना । कोई वस्तु लेने या देखने के लिये शरीर को उठाना और सिर ऊँचा करना । जैसे,— (क) दीवार की आड़ से क्या उचक उचककर देख रहे हो । (ख) वह लड़का टोकरे में से आम निकालने के लिये उचक रहा है । उ॰—सुठि ऊँचे देखत वह उचका । दृष्टि पहुँच पर पहुँच न सका । —जायसी (शब्द॰) ।
२. उछलना । कूदना । उ॰—यों कहिकै उचकी परजंक ते पूरि रही दृग बारि की बूँदे । —देव (शब्द॰) । उचकना ^२ क्रि॰ स॰ उछलकर लेना । लपककर छीपना । उठाकर चल देना । जैसे—जो चीज होती है तुम हाथ से उचक ले जाते हो । संयो॰ क्रि॰—ले जाना ।
उचकना ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ उच्च = ऊँचा + करण = करना]
१. ऊँचा होने के लिये पैर के पंजों के बल एँडी उठाकर खड़ा होना । कोई वस्तु लेने या देखने के लिये शरीर को उठाना और सिर ऊँचा करना । जैसे,— (क) दीवार की आड़ से क्या उचक उचककर देख रहे हो । (ख) वह लड़का टोकरे में से आम निकालने के लिये उचक रहा है । उ॰—सुठि ऊँचे देखत वह उचका । दृष्टि पहुँच पर पहुँच न सका । —जायसी (शब्द॰) ।
२. उछलना । कूदना । उ॰—यों कहिकै उचकी परजंक ते पूरि रही दृग बारि की बूँदे । —देव (शब्द॰) ।
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