गन्ने से चीनी बनाने की विधि

Ganne Se Chini Banane Ki Vidhi

Pradeep Chawla on 22-10-2018


चीनी बनाने की प्रक्रिया के अंतर्गत गन्ने के रस में सल्फर डाई आक्साइड, फोस्फोरिक एसिड आदि मिलाकार रिफाइन किया जाता है और मटमैले रंग को साफ़ करने के लिए उसे जानवरों की हड्डियों से बने कोयले द्वारा साफ़ किया जाता है| इस प्रक्रिया द्वारा गन्ने के रस में स्थित सारे विटामिन्स (थायामिन, राइबोफ्लेविन, नायसिन, फौलिक एसिड व् अन्य विटामिन बी- काम्प्लेक्स) मिनिरल्स (कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, पोटेशियम, सोडियम, आयरन व् अल्प मात्रा में जिंक व् क्रोमियम) आदि सब निकाल दिए जाते हैं| अब इस चीनी रुपी उत्पाद में सिर्फ ग्लूकोस अर्थात कलोरीज ही बचती है|
चीनी के दुष्परिणाम
• चीनी हमारे रक्त को बहुत गाढा, चिपकने वाला बना देती है जिससे वह रक्त सूक्षम वाहिनियों द्वारा हमारे शारीर के कई भागों में पहुँच नहीं पाता और परिणामस्वरूप कई बीमारियां विशेषकर दांतों व् हड्डियों के रोग उप्तन्न करता है|
• रक्त में चीनी (ग्लूकोस) की मात्रा सामान्य से अधिक होने पर ग्लूकोस कोशिकओं के प्रोटीन से चिपक कर कोशिकाओं की क्रियाओं को बिगाड़ देता है, परिणामस्वरूप गुर्दे (kidney) की बीमारियाँ, आँखों के रोग और यहाँ तक कि शरीर के अंगों को काटने तक की नौबत आ जाती है|
• रक्त में चीनी (ग्लूकोस) की मात्रा सामान्य से अधिक होने पर जब कोशिकाएं मरती है तो कोशिकाओं के DNA व् RNA का रूपांतरण urines में हो जाता है और urine से यूरिक एसिड उत्पन्न होता है| यह यूरिक एसिड nitric oxide घटा अथवा बढ़ा देता है जिस कारण रक्त नलिकाओं के smooth muscle cells सिकुड़ जाते हैं और फलस्वरूप रक्त चाप बढ़ जाता है| यह प्रक्रिया गुर्दे खराब होने का कारण बनती है| इस प्रकार यूरिक एसिड के ह्रदय रोग, उच्च रक्त चाप, मोटापा, स्ट्रोक आदि का कारण बनता है|
• चीनी के पाचन के समय उत्पन्न होने वाले विषैले तत्व हमारे मस्तिष्क व् नाडी संस्थान में एकत्रित होते हैं जिसके कारण इन भागों की कोशिकाएं मर जाती हैं, परिणाम स्वरुप मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र के रोग उत्पन्न होते हैं|
• चीनी जब हमारी आँतों में पहुँचती है तो वह विटामिन बी काम्प्लेक्स पैदा करने वाले जीवाणुओं को मार देती है| विटामिन बी काम्प्लेक्स की कमी के कारण इन्सुलिन कम बनाने लगता है व् इन्सुलिन की कमी के कारण रक्त में ग्लूकोस बढ़ जाती है और इस प्रकार एक दुश्चक्र बन जाता है जो मधुमेह को जन्म देता है| परिणाम स्वरुप बच्चो में गुनाह करने की प्रवृति, अल्प काल के लिए याददाश्त में कमी, numeric calculative ability में कमी व् दिन में उंघते रहने की बिमारी आदि पैदा हो जाती है|
• चीनी हर मिनिरल (कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, पोटेशियम आदि) विशेषतौर पर कैल्शियम के मेटाबोलिज्म को बिगाड़ देती है जिससे कैल्शियम शरीर में कही भी जमा होने लगता है और जब वह पित्ताशय में जमा होता है तो कोलेस्ट्राल के साथ मिलकर पित्ताशय की पथरी बना देता है|
• चीनी कोलेस्ट्रोल, तनाव- चिंता को बढ़ा देती है|
• चीनी बच्चों में hyperactivity (मस्तिष्क को केन्द्रित न कर पाना) व् उत्साह में कमी आदि रोगों को जन्म देती है|
• चीनी growth hormone को कम करके बुढ़ापे को जल्द बुलाती है|
• अधिक चीनी खाने वाले बच्चो को एक्जिमा होने का ख़तरा पैदा हो जाता है|
• चीनी की मिलों में काम करने वाले बहुत से मजदूरों के हाथों में एक्जिमा हो जाता है|
• चीनी Candida Albicans (यीस्ट इन्फेक्शन) को बढ़ाती है|
• चीनी के metabolism के बाद जो अंत उत्पाद (product) बचता है उसकी प्रकृति अम्लीय (acidic) होती है| रक्त में जब अम्लता बढ़ती है तो यह शरीर में अनेक रोग उत्पन्न करती है जो हृदय रोग तक पहुँच सकती है|


चीनी में ग्लूकोस व् फ्रक्टोस बराबर मात्रा में होते हैं, उसी प्रकार गुड़ व् फलों में भी ग्लूकोस व् फ्रक्टोस रहते हैं पर उसके अलावा फाइबर, प्रोटीन, मिनिरल, एंटी आक्सीडेन्ट्स भी रहते हैं| क्यूंकि चीनी में ग्लूकोस एवं फ्रक्टोस के अलावा अन्य पदार्थ उपस्थित नहीं रहते इसलिए चीनी शारीर में बहुत से रोगों का कारण बनती है जबकि गुड़ स्वास्थ्य वर्धक सिद्ध होता है|
गुड़, गुडियल शक्कर, देसी बुरा एवं खांड मीठे का स्रोत्र होने के साथ साथ सेहत के भण्डार हैं क्यूंकि ये सब चीनी की तरह हानिकारक रासायनिक प्रक्रिया द्वारा तैयार नहीं किये जाते| देसी बूरा चीनी का सर्वोत्तम विकल्प है क्यूंकि यह चीनी की ही भाँती किसी भी तरल पेय में मिलाया जा सकता है इसके अतिरिक्त यह चीनी की अपेक्षा अधिक सरलता से घुलता है|



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