रॉकेट के उड़ने का सिद्धांत

Rocket Ke Udne Ka Sidhhant

Gk Exams at  2018-03-25

GkExams on 20-02-2019

सबसे पहले रॉकेट का इतिहास 13 वी सदी से शुरु होता है सबसे पहले रॉकेट अविष्कार चीन में रॉकेट का आविष्कर हुआ था और शुरु में राकेट का इस्तेमाल हथियार के रूप में किया जाता था यह बहुत ही खतरनाक अस्त्र शस्त्र था सबसे पहले राकेट का इस्तेमाल सन , 1232 में किया गया था, चीनी और मंगोलों एक दूसरे के साथ युद्ध में किया था


और कहा जाता मंगोल लड़ाकों के द्वारा रॉकेट टेक्नोलोजी यूरोप पहुँची थी और फिर अलग अलग शासकों से यूरोप और एशिया के अन्य भागों मे प्रचलित हुई कहा जाता है की सन् 1792 में मैसूर के शासक टीपू सुल्तान ने अंग्रेज सेना के साथ युद्ध के समय उनके विरुद्ध लोहे के बने रॉकेटों का प्रयोग किया था


और अंग्रेजो ने यह चीज कभी नही देखी थी पहले और वे घबरा गये और जब वे आखिर में युद्ध हार गये और बाद में अंग्रेज सेना ने रॉकेट के बारे में जाना और उसका महत्त्व को समझा और इसकी टेक्नोलोजी को विकसित कर विश्वभर में इसका इस्तेमाल अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए किया।


और सन् 1926 में, रॉबर्ट गोडार्ड दुनिया का पहला तरल ईंधन रॉकेट शुरू की थी और 16 मार्च, 1926 को ऑबर्न, मैसाचुसेट्स, पर दुनिया का पहला तरल ईंधन रॉकेट प्रक्षेपण था जो 60 मील प्रति घंटा, दूर लैंडिंग 41 फुट और 184 फुट की ऊंचाई तक पहुंच गया। रॉकेट 10 फीट लंबा था और इसमें ईंधन के लिए तरल ऑक्सीजन और पेट्रोल का इस्तेमाल किया गया था रॉकेट को धरती से उठाकर अंतरिक्ष तक पहुंचाने के लिए ऊर्जा के निर्माण की जरूरत होती है। रॉकेट इंजन यही कार्य करता है।


और सन 1907 में बारूद रॉकेट में निर्माण, किया जिनका उपयोग युधो में एक खतरनाक हथियार के रूप में किया जाता है आज कई तरह की अत्या‍धुनिक तोपों से भी रॉकेट को लांच किया जाता है





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