किशोरावस्था में शिक्षक की भूमिका

Kishoravastha Me Shikshak Ki Bhumika

Gk Exams at  2018-03-25


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GkExams on 12-11-2018


विद्यालय व शिक्षकों की भूमिका -

किशोरों के विकास पर विद्यालय व शिक्षकों का अत्यंत प्रभाव पड़ता है। विद्यालय में यदि स्कूल का अनुशासन बहुत सख्त नही है और विद्याथ्र्ाी की भावनाओं का आदर किया जाता है तो विद्याथ्र्ाी को पढ़ार्इ करने में आनंद आता है। शिक्षक उचित रूप से प्रशिक्षित, है हँसमुख एवं उत्साहित हो तों बच्चों में छिपी प्रतिभा को जागृत कर सकते है। किशोर अपने बारे में सकारात्मक सोंच बना सकते है। अप्रशिक्षित, अयोग्य अध्यापक व छात्रों की अधिक संख्या, अधिक कार्यभार, सख्त पाठ्यक्रम तथा नियम बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव डालते है। विद्यालय जाने से कतराते हैं। पढ़ार्इ में रूचि कम हो जाती है तथा अच्छे परिणाम नहीं ला पाते।

शैक्षणिक व सामाजिक कौशल देने की भूमिका के अतिरिक्त विद्यालय अभिभावकों तथा किशोरों के मध्य ‘पीढ़ी अंतराल’ को कम करने का दायित्व भी निभा सकते हैं। अत: विद्यालय में समय-समय पर अभिभावकों की बैठक भी लेना चाहिए जिससे अध्यापक अभिभावकों के विचारों को उनके बच्चों तक मित्रवत् ढंग से पहुॅंचाने में मददकर सकें।



Comments Thanks on 05-01-2020

Kisor k vikas me abhibhavk k bhumika

Thanks on 05-01-2020

Kisor k vikas me abhibhavk k bhumika

Thanks on 05-01-2020

Kisor k vikas me abhibhavk k bhumika

Smt jyotsana on 16-06-2019

Buddhi ka arth aur prakriti kya hai.

ranjan soniaya on 30-04-2019

kisoro ke vikas me teacher ki bhumika ka varnan



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