जयपुर के किस कवि ने ‘ मंडन पराग मकरंद अंग अंगराज , चांदनी बिछाती चंद सिर भ्राज है ‘ कह कर राजमहल में गुजरे आपने बासन्ती दिनों को याद किया है ?

Jaipur Ke Kis Kavi ne ‘Mandan Parag Makrand Ang Angraaj , Chandni Bichhati Chand Sir Bhraz Hai ‘Kah Kar Rajmahal Me Gujre Aapne Baasanti Dino Ko Yaad Kiya Hai ?

Gk Exams at  2018-03-25

A. ब्रजनिधि
B. गुलाबचन्द चतुर्वेदी
C. श्रीकृष्ण भट्ट
D. देवर्षि भट्ट

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