राजपूतों के पतन के कारण

Rajputon Ke Patan Ke Karan

Gk Exams at  2018-03-25


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Pradeep Chawla on 14-10-2018

आज हम राजपूत समाज के पतन के कारणो पर प्रकाश डालते जिनमे सुधार करना अतिआवश्यक हे ओर मे कुछ समाजिक सुधार के सुझाव पेश करूगाँ अच्छे लगे तो अमल जरूर करे॥

1. आपसी फूट
यह राजपूत समाज के पतन का प्रमुख कारण रहा हे हम आपस मे सँगठित नही हे हम अपनी की ही टाँग खिचने मे लगे रहते हे जितने भी बडे शासक हुये उन्ही के अपने भाइ बन्धु विरोधियों से जाकर मिल जाते थे ओर उनकी सारी कमियाँ बता देते इस वजह से हमे हर जगह हार का मुह देखना पडा रियासतों के हिसाब से ही हम बचाते चले गये। शुरू से ही एक दुसरे का अकारण विरोध किया लोकतँत्र स्थापित हुआ हमारे गढ हवेलियाँ जमीन जायदाद हथियार छीन लिये गये ओर हम फिर भी उसका विरोध नही कर सके क्योकि उस समय भी हम आपस मे ही लड रहे थे इस वजह से आज राजपूत समाज पतन के कगार पर आ पहुचा हे॥
सुझाव-
हमे आज के समय आपसी द्रेष भावना का त्याग करके सँगठित होना चाहिये हमे समाज के लोगो का विरोध ना करके आपस मे एक दूसरे का साथ देना सभ्यता ओर सँस्क्रति को बनाये रखना होगा जिससे सामाजिक एकता कायम हो।


2. माँस मदिरा का सेवन
माँस मदिरा भी राजपूत समाज के पतन के मुख्य कारण हे जबसे अँग्रेज भारत मे आये शराब ओर माँस का चलन राजपूत समाज मे बड गया जेसे जसे अँग्रेज राजपूतों के सँपर्क मे आते गये ये चलन बडता गया ओर धीरे धीरे ये एक राजपूत सभ्यता की तरह बन गया इसी कारण कई
राजपूतों ने अपनी जमीन जायदाद तक लुटा दी अपने घरो मे बचपन से यही माहोल देखकर बच्चो मे भी वही सँस्कार पडे माँस खाने से शारिरिक विकास भले ही होता हो अक्रामकता बडती हो लेकिन बुद्धि के विकास पर जरूर बहुत बुरा प्रभाव पडता हे इसलिये इस लोकतँत्र मे आक्रामकता की जरूरत नही हे यहाँ किसी को युद्ध नही करना बल्कि बुद्धि की जरूरत हे आज के समय मे ब्राह्मण बानिये जो आगे हे अपने दिमाक की बजह से ही हे उनमे आक्रामकता की कमी हे लेकिन दिमाक की नही राजपूतों की सँताने बचपन से ही शराब माँस का माहोल अपने घरो मे देखते हे हमारे शादी ब्याहो मे भी माँस मदिरा को खुलकर छूट होती हे ओर आगे जाकर स्कुल काँलेजो मे वो इसी सोसायटी मे पड जाते हे उनका माहोल वही की वही बना रहता हे ओर उनके खुन मे आक्रामकता के कारण आपराधिक प्रवति बना जाती हे ओर वो अपने जीवन मे ज्यादा कुछ नही कर पाते ओर दूसरी तरफ ब्राहाण बानियो के बच्चे शुरू से व्यापारिक माहोल मे पले बडे होते हे इसी वजह से हर छेत्र मे आगे होते हे ॥
सुझाव-
सबसे पहले तो हमे ये सब अपने घरो से दूर करना होगा ताकि हमारी अाने वाली पीडी मे ये सँस्कार ना पडे ओर उन्हे इन चीजो से दूर रखना होगा हाँ अगर हम शोकिया तोर पर ये सब घर से बाहर मित्रगणो के साथ भी कर सकते हे लेकिन लिमिट मे रहकर॥ जिससे की हम अपने परिवारो का माहोल सामान्य बना सके ओर आगे ने सके।।


3. वेश्याव्रती
माँस ओर मदिरा सेवन की तरह ही वेश्याव्रती भी राजपूत समाज मे बहुत बडा अभिषाप हे राजा महाराजा जागीरदार लोग रानियों के होने के बाद भी महलों से दूर के कोठी बनवा दिया करते थे यहाँ तक की मौलिक मे काम करने वाली दासियों को भी नही छोडते थे उनसे होने वाली सँतानो मे से पुरूषो को सेना मे भर्ती कर लेते थे ओर महिलाओं को आजीवन अपने महलो मे काम करने के लिये रखते थे ओर उनकी शादिया नही की जाती थी उन्हे मनोरँजन का साधन बनाया जाता था हवस का शिकार बनाया जाता था ये कितना बडा पाप था ओर ऎसे ही पापो की सजा आज उनके वँशजो को मिल रही हे फिर धीरे धीरे राजपूतों का राज्य खत्म हुआ लेकिन फिर भी हमारा वेश्याव्रती का गँदा शोक नही छूटा बचे हुये गढ हवेलियाँ जमीन जायदाद भी इसी शोक मे उढा दी ओर आज उनकी सँताने दर-दर भटक रही हे ओर वही दासियों की सँताने अच्छे से जीवन यापन कर रही हे।।
सुझाव-
जहाँ तक हो सकता हे समाज के युवाओं को इस चलन मे ना पडकर अपने लछ्य पर ध्यान देना होगा जिससे की समय ओर पेसा भी नष्ट ना हो ओर अपनी मँजील से पथभ्रष्ट ना हो पाये।
4. सत्ता की भूख
ये राजपूत समाज की सबसे कमजोर कडीयो मे से एक हे । हम किसी का भी नेत्रत्व स्वीकार नही करते चाहे वो अपना भाइ ही क्यो ना हो इतिहास गवाह हे इस बात का जितने भी राजपूत सरदारों को पराजय का मुहँ देखना पडा सब अपनी की वजह से ओर अपने दोगले क्यो हुये सत्ता की वजह से सब अपना राज पाठ चाहते थे ओर नही मिलने पर सत्ता के लालच मे दुश्मनो से जा मिले ओर इसी बात का फायदा अँग्रेजो ने मुगलो ने सभी विरोधियों ने उठाया। ओर यही आज के समय हो रहा हे हम लोग इस दूसरे की सुनना पसन्द नही करते यही कारण हे की हम ऎसी हालत तक पहुच गये वर्तमान म हो रहा कुछ लोग अपनी तरक्की के लिये अपनो को ही भेट चडा रहे हे॥
सुझाव-
अब हमे सोच बदलनी पडेगी सत्ता के लिये अपनी का गला घोटना बँद करना होगा बल्कि अपनो का साथ लेकर आगे बडना होगा तो ही कुछ हो सकता हे॥


5. प्रोपर्टी विवाद
आज हमारे समाज के जो भाइ बन्धू विवाद हे 95%से ऊपर प्रोपर्टी के मामलो को लेकर हे क्योकि हम अपनी जवानी तो माँस मदिरा वेश्याव्रति लडाई झगडो मे निकाल देते हे जब कुछ भी हाथ नही रहता तो पुरखो की बची हुइ जमीन जायदाद प्रोपर्टीयो के लिये अपने ही भाइ बन्धुओं से ही लडते रहते हे जिससे की आपसी सँबध भी खराब होते हे ओर सामाजिक एकता भी नही हो पाती॥।
सुझाव-
जहाँ तक हो युवाओं को अपने मँजील पर कमाने पर ध्यान देना चाहिये जिससे की आर्थिक स्थिति मजबूत हो ओर आगे जाकर विवादों की स्थिति भी ना बने ॥


6. घँमड
आज घँमड हमारे समाज पर इस तरह छाया हुआ हे जेसे बारिष मे बादल छा जाते हे कोइ किसी की मदद करना नही चाहता कोइ किसी की मदद लेना नही चाहता सब अपने घँमड मे मस्त हे हमारे घर परिवार रिश्तेदारों मे अगर कोइ नेता बडा आधिकारी या पेसेवाला हे तो हम अपने गुरूर की वजह से उससे मदद लेना पँसद नही करते हे शायद उसकी मदद करने से हम छोटे हो जाँयेगे। हमारे समाज का युवा वर्ग छोटे मोटे रोजगारो पर ध्यान ही नही देते छोटे छोटे काम करना ही नही चाहते सीधे बडा आदमी बनने का सपना देखते हे ॥
सुझाव-
हमे एक दुसरे की मदद करनी होगी मदद लेनी होगी जिससे हमारा हरेक काम हो सके ओर सामाजिक एकता भी स्थापित हो वही युवा वर्ग फाल्तू बेठने से अच्छा रोजगार पर ध्यान देना होना चाहे कम पेसे वाला क्यो ना हो।


7. हाइप्रोफाइल लोगो का समाज के प्रति समर्पित ना होना
समाज के पेसेवाले, नेता, बडे अधिकारी जेसे तेसे अपनी मँजीलो पर पहूचँ जाते हे लेकिन सक्सेज होने के बाद समाज को भूल जाते हे उन्हे समाज के मीडियम वर्ग गरीब वर्ग से कोइ मतलब नही होता हे वो उनकी कोइ मदद नही करते इसी वजह से गरीव वर्ग को मजबूरन मजदूरी चोकीदारी करनी पडती हे ओर वो गरीव के गरीब बनकर रह जाते हे।
सुझाव-
हाइ प्रोफाइल लोगो को आगे आकर ऎसे गरीब परिवारों की मदद करनी होगी जिससे उनके मन मे समाज के प्रति सहानुभूति पेदा हो ओर वो समाज सेवा के लिये आगे आये।।


8. सभ्यता ओर सँस्क्रति को भुलना
राजपूत सभ्यता ओर सँस्क्रति को भूलते जाना ओर पश्चिमी सभ्यता को अपनाते जाना ये बहुत बडा कारण हे हमारे पिछडने का जिससे हमारी सामाजिक एकता पर बहुत बडा दुष्प्रभाव पडा हे। किसी भी देश या समाज के प्रगति का सबसे बडा कारण उस देश की सभ्यता ओर सँस्क्रति होती हे जिस दिन वो देश या समाज अपनी सभ्यता ओर सँस्क्रति को भूलने लग जाता हे उस दिन उस देश का पतन निश्र्चित हो जाता हे ओर यही राजपूत समाज के साथ हो रहा हे आज भी मुसलमान जैन बोद्ध सिख्ख आदि ने अपनी सभ्यता ओर सँस्क्रति अपना रखी हे ओर लगातार प्रगति की राह पर हे।।
सुझाव-
हमे अपनी राजपूत सभ्यता ओर सँस्क्रति को नही छोडना हे हमारी माताओं बहनो ओर हमे खुदको विदेशी भेषभूषा विदेशी सभ्यता से दूर रखना होगा तो तो हम सक्सेज होगे।।


9. सामाजिक समानता की कमी
माना की राजपूत वँश सबसे ऊँचा कुल हे लेकिन जब राज दरबारो का समय था उस समय हम किसी भी वँश की इज्जत नही करते थे वेश्य ब्रहामणो को दरबारो मे अपमानित कर दिया जाता था सभी जातियाँ उस समय हमे सहयोग करती थी क्योकि हमारे पराक्रम ओर बाहुबल के डर से लेकिन हम उन्हे समय समय पर अपमान झेलना पडता था वो हमारे साथ बेठकर खाना नही खा सकते थे सामने सर ऊठाकर बोल नही सकते थे हमने जो कर दिया अटल था लेकिन जेसे जेसे समय बीतता गया राजतँत्र खत्म हुआ लोकतँत्र आया ओर जेसे ही मोका मिला लोक तँत्र मे सब जातियो ने हमारा साथ छोड दिया ओर धीरे धीरे हमारी विरोधी बन गई॥
सुझाव-
हमे द्रेस भावना छोडकर सभी जातियो को साथ लेना होगा भाट चारण राव दरोगे को भेदभाव की नजरों से नही देखना जिससे सामाजिक समानता कायम होगी हाँ हम केवल सगाई सँबध ना करे ओर सब मे समानता रखनी होगी।


10. मेहनत की कमी
ये भी मुख्य मुद्दा हे समाज के पिछडने का हमारे समाज के लोग जब युवावस्था के समय अपने लछ्य को लेकर भविष्य को लेकर गँभीर नही होते उनके मन मे राजपुताना एट्युट्युट भरा रहता उनकी सोच ऎसी होती कि हमारे पूरवजो ने राज किया हे हम राजाओ की सँताने हे वो लोग पडाइ लिखाई रोजगार पर ध्यान नही देते लछ्य प्राप्ती के लिये मेहनत नही करते ओर जेसे ही उम्र निकल जाती हे फिर पुरखो के बचे हुये टुकडो को लेकर भाइ बन्धुओं से झगड्ते हे॥
सुझाव-
हमे फालतू के व्यसन ओर सोसायटी छोडकर जीवन के मूल उदेश्यों पर ध्यान देना होगा लछ्य प्राप्ती के लिये मेहनत करनी होगी राजा महाराजाओं की सोच को छोडकर आम आदमी की तरह मेहनत करनी होगी।


11. स्वार्थी पन
समाज के लोगो मे स्वार्थ कूट कूट कर भरा हुआ हे हम अपने मतलब के लिये अपने ही भाइ बँन्धुओ से लेते झगडते रहते हे सक्सेज होने के लिये समाज को युक्त कर लेते हे फिर सक्सेज होकर भूल जाते हे ॥
सुझाव-
समाज को अगर आगे बढाना हे तो त्याग की भावना से काम करना हो स्वार्थ की भावना को छोडना होगा।

12. दहेज प्रथा एवँ शादी ब्याहो मे अनावश्यक खर्चे
दहेज प्रथा समाज के लिये बहुत बडा अभिषाप बन चुका हे अगर घर मे बेटी हो तो एक साधारण परिवार को उसकी शादी करना भारी पड जाता हे जिस तरह से आज के समय दहेज प्रथा का चलन चरम सीमा पर पहुच चुका हे एक साधारण लडके से भी शादी करने के लिये लडकी वालो को उनकी डिमान्डो के अनूसार सोना चाँदी ओर रुपयों की व्यवस्था करनी पडती हे सछम परिवार तो कर लेता हे लेकिन जो गरीब परिवार हे उन्हे अपनी प्रोपर्टी जमीन जायदाद बेचनी पड जाती हे ओर उनकी स्थिति ओर भी बदतर हो जाती हे इसके अळावा शादी ब्याह मे होने वाले दिखावे मे ज्यादा पेसा खर्च करना पडता हे अगर नही करो तो समाज के लोग भाइ बन्धु ही उपहास करते हे॥
सुझाव-
हमे दहेज पर रोक लगानी होगी रूपया पेसा ना देखकर खानदार सँस्कार देखने होगे सामूहिक विवाह सम्मेलनों को बडावा देना होगा चाहे आपके पास कितना ही पेसा हो।



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