मचकुंड धौलपुर हिस्ट्री

मचकुंड Dholpur History

GkExams on 02-02-2019


तीर्थोंं की नानी देवयानी के बारे में आपने सुना होगा, लेकिन आज हम आपको बता रहे है तीर्थों के भांजे के बारे में। राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित मचकुंड को तीर्थों का भांजा कहा जाता है।

मान्यता है कि मचकुंड में स्थान के बाद ही चार धाम की यात्रा पूरी होती है। इस मेले में राजस्थान ​के विभिन्न जिलों के लोगों के साथ—साथ ग्वालियर, मुरेना, अयोध्या, वृन्दावन, मथुरा एवं अन्य स्थानों से भी श्रद्धालु आते है। यहां भी साधु संत शाही स्नान करते है और उसके बाद मेले का आगाज होता है। यह मेला गणेश चतुर्थी के अगले दिन ऋषि पंचमी और छठ को आयोजित होता है। इस दौरान यहां बड़ी संख्या में साधु-संत बैंड-बाजों के साथ पहुंचते है। मान्यता है कि मचकुंड सरोवर में देवछठ वाले दिन स्नान करने वालों को पुण्य लाभ मिलता है।

मचकुंड मेले की मान्यता है कि देवासुर संग्राम के बाद जब राक्षस कालयवन के अत्याचार बढ़ने लगे। सभी परेशान थे, तब भगवान श्री कृष्ण ने कालयवन को युद्ध के लिए ललकारा और उससे युद्ध किया। इस युद्ध में लीलाधर को भी हार का मुह देखना पड़ा, तब लीलाधर ने छल से मचकुंड महाराज के जरिए कालयवन का वध कराया था, जिसके बाद कालयवन के अत्याचारों से पीड़ित ब्रजवासियो में खुशी कि लहर दोड़ गई। इसके बाद से ही आज तक मचकुंड महाराज की तपोभूमि देवछठ के मौके स्नान पर्व आयोजित होता है।



Comments Dr Devashish Bhattacharya on 11-01-2021

कालयवन कौन थे, क्या कालयवन और कालिया नाग एक ही चरित्र का नाम है...?



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