राधाकृष्णन का शिक्षा दर्शन

Radhakrishnan Ka Shiksha Darshan

Gk Exams at  2018-03-25


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Pradeep Chawla on 28-09-2018

र्मिक अनुभूति के अंतर्गत ही राधाकृष्णन ने परम सत्ता एवं ईश्वर की समस्या का समाधान प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। सच्चा धर्म, उनके अनुसार न तो किसी विशिष्ट दृष्टिकोण का द्योतक है, न ही वह रूढ़ि और अंध विश्वासपरक आस्था का समानार्थी है। उन्होंने हिन्दू धर्म में अंतर्निहित आध्यात्मिक सत्य को स्वीकार किया है। उन्होंने ऋषियों के साक्षात् अनुभव को आप्तप्रमाण माना है, किन्तु साथ ही यह भी स्वीकार किया है कि तत्व बोध तथा भ्रांतियों के निराकरण के लिए इस अनुभव के सूक्ष्म परीक्षण और तार्किक विश्लेषण की आवश्यकता है। राधाकृष्णन सत्य को आत्मानुभव का विषय मानते हैं। यह आत्मानुभव अथवा सत्यानुभूति धार्मिक अनुभूति है और केवल जिज्ञासा और साधना द्वारा ही सम्भव है। यह धार्मिक अनुभूति स्वत: ही सिद्ध और स्वत: प्रमाण है, परन्तु तर्क निरपेक्ष या बुद्धि निरपेक्ष नहीं बल्कि तर्क और बुद्धि के ऊपर है। ज्ञानात्मक अनुभव के तीन साधन हैं- इन्द्रियानुभव, तर्क, बुद्धि और प्रज्ञा (प्रातिभ ज्ञान)।इन्द्रियानुभव का विषय ज्ञान का क्षेत्र है। इस क्षेत्र को ही हम बाह्य जगत की संज्ञा देते हैं। इन्द्रियों के द्वारा प्राप्त ज्ञान विज्ञान का आधार है। बौद्धिक ज्ञान, विश्लेषण एवं संश्लेषण से प्राप्त किया जाता है। विश्लेषणात्मक होने के कारण बुद्धि जीवन को उसकी समग्रता में नहीं ग्रहण करती है। वह वस्तुओं को पृथक् और खंडित करके ही उनका अध्ययन करती है। परम सत्ता बुद्धि की पहुँच के परे है। ऐसा इसलिए कि बुद्धि विषय और विषयी के भेद को मानकर चलती है, जबकि परम सत्ता भेद रहित है। उसका ज्ञान न तो इन्द्रियों से और न ही बुद्धि से संभव है। उसका ज्ञान तो प्रज्ञा द्वारा अपरोक्षानुभव में होता है। बुद्धिजन्य ज्ञान अपरोक्षानुभव तक पहुँचने का एक अनिवार्य सोपान है। अपरोक्षानुभव वह अनुभूति है, जिसमें परम सत्ता या ज्ञान के विषय के साथ ज्ञाता का अभेद हो जाता है। परम सत्ता या ब्रह्म को जानने का आशय है, ब्रह्म हो जाना (ब्रह्मविद् ब्रह्मेव भवति) यही प्रातिभज्ञान वास्तविक स्वतंत्रता या मुक्ति है। परम सत्ता अपना कारण प्रमाण और अपनी व्याख्या स्वयं है। राधाकृष्णन के अनुसार अपरोक्षानुभूति या प्रातिभज्ञान ही धार्मिक बोध है, जिसमें कलात्मक बोध एवं तार्किक ज्ञान का समन्वय हो जाता



Comments aditya on 04-09-2018

radiakrishan ki primary to hs study



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