जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम कब शुरू हुआ

Zila Prathmik Shiksha Karyakram Kab Shuru Hua

Pradeep Chawla on 12-05-2019

केंद्र द्वारा प्रायोजित जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम (डीपीईपी) (बाहरी विंडो में खुलने वाली वेबसाइट) 1994 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्‍य प्राथमिक शिक्षा प्रणली में फिर से जान फूंकना और प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण का लक्ष्‍य पूरा करना था।



कार्यक्रम मानदंडों के अनुसार 5-7 वर्ष की अवधि के लिए प्रति जिला निवेश सीमा 40 करोड़ रुपये है। इसमें निर्माण कार्यों पर 33.3 प्रतिशत और प्रबंधन मद में व्‍यय सीमा छः प्रतिशत है। शेष राशि गुणवत्ता सुधार कार्यक्रमों के लिए है।



डीपीईपी बाहरी सहायता से चलने वाला कार्यक्रम है। परियोजना व्‍यय का 85 प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा एवं शेष 15 प्रतिशत संबंधित राज्‍य सरकारों द्वारा वहन किया जाता है। केंद्र सरकार का हिस्‍सा विदेशों से प्राप्‍त सहायता के माध्‍यम से आता है। वर्तमान में विदेशी सहायता लगभग 6938 करोड़ रुपये है, जिसमें से 5137 करोड़ रुपये अंतर्राष्‍ट्रीय विकास एजेंसी (आईडीए) से ऋण रूप में तथा शेष 1801 करोड़ रुपये अनुदान के रूप में है।

डीपीईपी की प्रमुख उपलब्‍धियां



डीपीईपी ने अभी तक 1,60,000 से अधिक स्‍कूल खोले हैं, जिसमें लगभग 84,000 वैकल्‍पिक शिक्षण केंद्र (एएस) हैं। इन वैकल्‍पिक शिक्षण केंद्रों में 35 लाख बच्‍चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जबकि अन्‍य दो लाख बच्‍चे विभिन्‍न प्रकार के सेतु (ब्रिज) पाठ्यक्रमों का लाभ उठा रहे हैं।

डीपीईपी के अंतर्गत तैयार किया गया स्‍कूली ढांचा उल्‍लेखनीय है। 52,758 स्‍कूली भवनों 58,604 अतिरिक्‍त कक्षाओं 16,619 संसाधन केंद्रों 29,307 मरम्‍मत कार्यों 64,592 शौचालयों और 24,909 पेयजल सुविधाओं के निर्माण का कार्य या तो पूरा हो चुका है या प्रगति पर है।

पिछले तीन वर्षों के दौरान चरण-I के राज्‍यों में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 93 से 95 प्रतिशत रहा है। वैकल्‍पिक स्‍कूलों/शिक्षा गारंटी केंद्रों में दाखिले का समायोजन करने के बाद वर्ष 2001-02 में जीईआर 100 प्रतिशत से भी अधिक आता है। जो जिले डीपीईपी के अंतर्गत आते हैं और जहां डीपीईपी अलग-अलग चरणों में लागू है, वहां वैकल्‍पिक स्‍कूलों/शिक्षा गारंटी स्‍कूलों (एएस/ईजीएस) सहित सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 85 प्रतिशत से अधिक है।

बालिकाओं के नामांकन (दाखिले) में अच्‍छा-खासा सुधार हुआ है। डीपीईपी चरण-I के जिलों में हुए कुल नामांकनों की तुलना में बालिकाओं के नामांकन में 48 से 49 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि डीपीईपी जिलों में विभिन्‍न चरणों में यह वृद्धि 46 से 47 प्रतिशत है।

वर्तमान में नामांकित विभिन्‍न प्रकार के सक्षम बच्‍चों की कुल संख्‍या 4,20,203 है, जो डीपीईपी राज्‍यों में विभिन्‍न प्रकार के सक्षम बच्‍चों की कुल संख्‍या 5,53,844 का लगभग 76 प्रतिशत है।

सभी परियोजना गांवों/रिहायशी इलाकों/स्‍कूलों में ग्राम शिक्षा समितियों/स्‍कूल प्रबंधन समितियों का गठन किया गया है।

अंशकालिक शिक्षकों, शिक्षाकर्मियों सहित लगभग 1,77,000 अध्‍यापकों की नियुक्‍ति की गई है।

शिक्षा संबंधी सहायता और शिक्षण प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्‍ध कराने के लिए प्रखंड (ब्‍लॉक) स्‍तर पर 3380 संसाधन केंद्र और समूह स्‍तर पर 29,725 केंद्रों की स्‍थापना की गई है।



Comments Samii on 12-05-2019

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