सामुदायिक विकास के सिद्धांत

Samudayik Vikash Ke Sidhhant

Pradeep Chawla on 20-10-2018

सामुदायिक संगठन के सिद्धान्त

मेकनील ने सामुदायिक संगठन के सिद्धान्तोंका उल्लेख किया हैं:-
  1. समाज कल्याण के लिए सामुदायिक संगठन व्यक्तियों औंर उनकी अवययकताओं सेसम्बन्धित हैं।
  2. समाज कल्याण के लिए सामुदायिक संगठन में समुदाय एक प्राथमिक सेवाथ्र्ाी मानाजाता है। यह समुदाय, पड़ोस, नगर जनपद या राज्य या देश या अन्र्तराष्ट्रीय समुदाय होसकता है।
  3. सामुदायिक संगठन में यह स्वयं -सिद्ध धारणा है कि समुदाय जैसा भी है, जहॉ भी है,उसे वैसा ही स्वीकार किया जाता है। समुदाय के वातावरण को समझना इस प्रक्रिया मेंअनिवार्य है
  4. समुदाय के सभी व्यक्ति इसके स्वा-अध्याय एवं कल्याण सेवाओं में रूचि रखते हैंसमुदाय के सभी कार्यो और तत्वों द्वारा संयुक्त प्रयासों में भाग लिया जाना सामुदायिकसंगठन में अनिवार्य होता है।
  5. हर समय बदलती रहती मानव आवश्यकताएॅ और व्यक्तियों के आपसी सम्बन्धों कीवास्तविकता ही सामुदायिक संगठन प्रक्रिया की गति मानी जाती है। सामुदायिक संगठन मेंइस उद्देश्य पूर्ण परिवर्तन को स्वीकार किया जाता है।
  6. सामुदायिक संगठन में समाज कल्याण की सभी संस्थाओं और संगठनों की परस्परनिर्भरता को माना जाता है कोर्इ भी संस्था अकेले में उपयोगी नहीं हो सकती बल्कि दूसरीसंस्थाओं के संन्दर्भ में ही कार्य करती है।
  7. समाज कल्याण के लिए सामुदायिक संगठन एक प्रक्रिया के रूप में सामान्य समाजकार्य का ही एक भाग है। समाज कल्याण के लिए सामुदायिक संगठन के अभ्यास केलिये व्यावसायिक शिक्षा समाज कार्य शिक्षा संस्थाओं के माध्यम से ही अच्छे तरीके से दीजा सकती है।




Comments Samudayik vikas ki nitiya on 18-09-2021

Samudayik vikas ki nitiya

Piyush on 12-05-2019

Principles of
Community development



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