मेहंदीपुर बालाजी अर्जी लगाने का तरीका

Mehandipur Balaji Arji Lagane Ka Tarika

Gk Exams at  2018-03-25


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Pradeep Chawla on 12-05-2019

भूत-प्रेत सहित, ग्रह-नक्षत्र या किसी दुश्मन से परेशान हों, दुर्भाग्य

पीछा न छोड़ रहा हो तो परेशान न हों। हर संकटों से मुक्ति दिलाते हैं-मेहंदीपुर के बालाजी। राजस्थान के दौसा जिले के एक छोटे से स्थान पर स्थित यह मंदिर संकटों से मुक्ति दिलाने के लिए विख्यात है। यहां बालरूप में स्थित महावीर हनुमान (बालाजी) भक्तों की हर समस्या को दूर करते हैं। खासकर भूत-प्रेत या किसी तांत्रिक प्रयोग से पीडि़त व्यक्ति को प्रत्यक्ष रूप में तत्काल राहत मिलती नजर आती है। प्रेत बाधा से ग्रस्त व्यक्ति बालाजी के मंदिर में आते ही ठीक होने लगता है। भूत-प्रेत से मुक्ति के लिए यहां कई स्थानों पर मेला लगता है जिसमें प्रेत बाधा से पीडि़त व्यक्ति की समस्या तत्काल सामने आ जाती है, जिसे लोग प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं।

रोज हजारों लोग पहुंचते हैं बालाजी दरबार में

मेहंदीपुर में बालाजी मंदिर परिसर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इनमें बुरी तरह से संकटग्रस्त लोगों की संख्या भी हर दिन करीब सौ से अधिक रहती है। बालाजी के दर्शन के लिए लंबी लाइनें लगती हैं। इस दौरान श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए अपनी बारी की प्रतीक्षा करते हैं। बालाजी के दर्शन के तत्काल बाद मंदिर परिसर में ही भैरव बाबा का मंदिर है। भीड़भाड़ रहने पर चार घंटे तक की लाइन सामान्य है। इस दौरान संकटग्रस्त लोग लाइन तोड़कर सीधे बालाजी के दर्शन के लिए आगे बढ़ते हैं। मान्यता है कि उन्हें बालाजी का बुलावा आता है, तभी वे ऐसा करते हैं। उन्हें रोका नहीं जाता क्योंकि माना जाता है कि ऐसा करने पर उसका संकट रोकने वालों पर सवार हो जाता है।

भैरव, प्रेतराज व दीवान सरकार के दर्शन भी जरूरी

बालाजी के मंदिर से बाहर निकलते ही उसी परिसर में भैरव मंदिर है। उसके बिल्कुल पास प्रेतराज राज का मंदिर है। प्रेतराज के पीछे दीवार सरकार का मंदिर है। एक ही परिसर में स्थित इन सभी मंदिरों के भी दर्शन एवं उन्हें भोग लगाना अनिवार्य माना जाता है। चूंकि बालाजी के दर्शन के लिए लंबी लाइन में लगना होता है। अत: पहले सिर्फ उनके लिए प्रसाद उनका दर्शन किया जाता है। इसके बाद बाहर आकर बाकी तीनों के लिए प्रसाद लेकर पिछले दरवाजे से इनके दर्शन के लिए अंदर जाने की छूट मिलती है। इसलिए बाद में बाकी तीनों के लिए प्रसाद लेकर उनको अलग से भोग लगाना व उनके दर्शन का लाभ उठाना अच्छा रहता है। बालाजी के प्रसाद का कुछ हिस्सा स्वयं खाकर बाकी बांट दिया जाता है। बाकी के भोग मंदिर परिसर के पीछे स्थित निर्धारित स्थान पर अपने सर के ऊपर घुमाते हुए बिना पीछे देखे पीछे की तरफ फेंक दिया जाता है। यह संकट को दूर करने का प्रभावी उपाय है।

संकट से मुक्ति के लिए दें अर्जी

इनके दर्शन के बाद पुन: बालाजी के दरबार में अपने संकट या समस्या के लिए अर्जी दी जाती है। कई लोग भारी भीड़ के मद्देनजर बालाजी मंदिर के ठीक सामने स्थिति भगवान राम के मंदिर में ही अर्जी लगा देते हैं। मान्यता है कि भगवान राम के पास लगाई अर्जी का महत्व बालाजी के दरबार में लगाई अर्जी के समान ही है। कहा जाता है कि अर्जी लगाने के बाद ही संकटों के समाधान की असली प्रक्रिया शुरू होती है। अर्जी के लिए पास की दुकान से सामग्री लेकर अपनी समस्या के बारे में बालाजी को मन ही मन कहा जाता है और उसके मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की जाती है। इसके साथ ही उन्हें तीस रुपये का नगद चढ़ावा मंदिर में रखे दान पात्र में समर्पित किया जाता है।

आरती का विशेष महत्व

आरती के दौरान उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

बालाजी, श्रीराम दरबार एवं समाधि वाले बाबा के मंदिर में सुबह-शाम होने वाली आरती का विशेष महत्व है। इस दौरान आरती के तत्काल बाद वहां उपस्थित श्रद्धालुओं पर पवित्र जल के छींटे दिये जाते हैं। माना जाता है कि उस पवित्र जल के छींटे से हर तरह के संकटों से मुक्ति मिल जाती है। सबसे पहले श्रीराम दरबार में आरती होती है। फिर बालाजी के दरबार में और उसके तत्काल बाद समाधि वाले बाबा के मंदिर में। आरती के दौरान पवित्र जल के छींटे लेने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। अत: आम श्रद्धालुओं के लिए एक ही समय में तीनों मंदिरों में आरती के दौरान छींटे ले पाना संभव नहीं हो पाता है। यदि आप बालाजी के मंदिर में छींटे लेना चाहते हैं तो उस समय बाकी मंदिरों का लोभ छोडऩा पड़ता है। श्रीराम दरबार के साथ समाधि वाले बाबा के मंदिर में आरती का छींटा एक ही समय में लिया जा सकता है। अत: उचित यही होता है कि श्रद्धालु बालाजी के लिए अलग समय में और बाकी दोनों मंदिरों में अलग समय में आरती में शामिल होने की योजना बनाएं।

तीन पहाड़ी में भी हैं प्रभावी मंदिर

बालाजी मंदिर के सामने तीन पहाड़ी है। अलग-अलग पहाडिय़ों पर भगवान शिव, मां काली, पंचमुखी हनुमान एवं काल भैरव के मंदिर हैं। इन मंदिरों में दर्शन आवश्यक माना जाता है। मान्यता है कि कुछ संकट का हल बालाजी के मंदिर में पूरी तरह से नहीं हो पाता है, उसे भगवान शिव, मां काली एवं काल भैरव दूर कर देते हैं। अत: कई भक्त रूटीन में ही बालाजी के दर्शन के बाद तीन पहाड़ी के मंदिरों का भी दर्शन करते हैं। इन मंदिरों में भी संकट से मुक्ति के दृश्य आम देखने को मिल जाते हैं। शिव मंदिर में जहां दीप जलाने का प्रावधान है, वहीं मां काली के मंदिर में पान के पत्ते पर कपूर, लौंग आदि रखकर जलाया जाता है। जले पान के पत्ते को पुजारी के माध्यम से मां को चढ़ाया जाता है। उसमें से थोड़ा हिस्सा पुजारी भक्तों को वापस दे देते हैं जिसे प्रसाद रूप में खाया जाता है। पंचमुखी हनुमान के मंदिर में छोटे लड्डू का भोग लगता है उसे खाया जा सकता है।

समाधि वाले बाबा

समाधि वाले बाबा का परिसर यहां का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। इन्हीं बाबा की साधना के बल पर इस धार्मिक क्षेत्र का प्रचार-प्रसार हुआ। मान्यता है कि बाबा ने अपनी साधना के बल पर बालाजी के क्षेत्र को इस तरह से बांध दिया था। तब से भूत-प्रेत से पीडि़त जो भी लोग यहां आते हैं, उन्हें वापसी में उस भूत-प्रेत से मुक्ति मिल जाती है। बाबा के प्रयास से बालाजी ने इस क्षेत्र को ऐसा बांध रखा है कि जो भूत-प्रेत एक बार इस इलाके में आ जाता है, वह वापस नहीं जा पाता। उसे यहीं उसके कृत्य के लिए दंड से लेकर मुक्ति तक मिल जाती है। अभी भी बाबाजी की संतान ही बालाजी की सेवा कर रहे हैं। बालाजी का दर्शन करने वालों के लिए समाधि वाले बाबा का दर्शन करना अनिवार्य माना जाता है। समाधि वाले बाबा के मंदिर जाने वाले बाबा को जलेबी का प्रसाद चढ़ाते हैं। इस प्रसाद को वहीं रख दिया जाता है। इसके बाद ग्यारह बार बाबा के मंदिर की परिक्रमा की जाती है।

लगता है भूतों का मेला

प्रेतराज का दरबार

यहां का सबसे महत्वपूर्ण और चमत्कृत करने वाली चीज है-भूतों का मेला। इसमें भूत-प्रेत से पीडि़त लोगों को संकट से मुक्ति मिलती है। इस स्थान की खूबी यह है कि यहां पहुंचते ही भूत-प्रेत पर शिकंजा कसना शुरू हो जाता है। बालाजी, भैरव, प्रेतराज, दीवान सरकार, भगवान शिव एवं मां काली के मंदिर में दर्शन करने से ही भूत-प्रेत समेत, तांत्रिक प्रयोग, ग्रह-नक्षत्र आदि सभी समस्याओं का हल होने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। प्रेतराज के मंदिर में विशाल हाल बना हुआ है, जहां दिन में दो से चार बजे तक भूत-प्रेत से पीडि़त लोग बैठते हैं। मान्यता है कि इसी दौरान प्रेतराज उनका न्याय करते हैं। इसी तरह समाधि वाले बाबा के मंदिर प्रांगण में भी दिन में ऐसा ही एक विशाल दरबार लगता है। इसके लिए किसी पंडित-पुरोहित की आवश्यकता नहीं पड़ती है। पीडि़त सिर्फ वहां बैठता है और उसे परेशान करने वाले भूत-प्रेत का हिसाब होने लगता है और अंतत: पीडि़त व्यक्ति को राहत मिल जाती है। हालांकि वहां इस काम के लिए कुछ पंडे-पुरोहित भी घूमते रहते हैं और मदद के लिए तत्पर रहते हैं। यह संबंधित भक्तों पर निर्भर करता है कि वह उनकी मदद ले या खुद को भगवान पर छोड़ दे। अधिकतर लोग भगवान के न्याय पर ही भरोसा करते हैं और संकट से छुटकारा भी पाते हैं।

जाने का समय

यूं तो सालों भर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। स्कूलों-कालेजों व सरकारी दफ्तरों में छुट्टी के दौरान भीड़ चरम पर पहुंच जाती है। भीड़ से बचने के लिहाज से नवंबर दूसरे सप्ताह से फरवरी का समय सबसे उपयुक्त होता है। मौसम के हिसाब से देखें तो यहां गर्मी खूब पड़ती है। इसी तरह ठंड के दौरान जबर्दस्त ठंड भी पड़ती है। अत: मौसम के लिहाज यहां जाने का सबसे अच्छा समय सितबंर से नवंबर और फरवरी से मार्च तक का तक का है।

जाने का मार्ग

ट्रेन से जाने के लिए दिल्ली-जयपुर रूट में बांदीकुई रेलवे स्टेशन पर उतरना पड़ता है। यहां शताब्दी समेत तमाम प्रमुख ट्रेनों का ठहराव है। इसके साथ ही आगरा व मथुरा से भी बांदीकुई के लिए ट्रेन उपलब्ध है। बांदीकुई से मेंहदीपुर स्थित बालाजी मंदिर की दूरी लगभग 35 किलोमीटर है, जिसके लिए चौबीसो घंटे वाहन उपलब्ध रहता है। यदि आप निजी वाहन या बस से आना चाहें तो आगरा-जयपुर मार्ग के पास स्थित इस स्थान के लिए दिल्ली, जयपुर, मथुरा एवं आगरा से आसानी से पहुंच सकते हैं।

ठहरने का इंतजाम

यहां ठहरने का सस्ता और आरमदेह इंतजाम है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त कई धर्मशालाएं हैं। इनमें पांच सौ से लेकर सात सात रुपये तक में चौबीस घंटे के लिए डबलबेड का ठीकठाक कमरा (अटैच्ड बाथरूम) उपलब्ध हो जाता है। एसी कमरे के लिए करीब हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। मांग के अनुरूप उचित दर पर कमरे में ही चाय से लेकर भोजन तक उपलब्ध हो जाता है। यहां लोग सुविधानुसार एक से तीन दिन तक रहते हैं। यदि सभी मंदिरों के आराम से दर्शन करना चाहते हैं तो तीन दिन रुकना उचित रहेगा। अन्यथा एक दिन में ही बालाजी, श्रीराम दरबार और समाधि वाले बाबजी के दर्शन कर वापस लौटा जा सकता है। ऐसा करने वाले भक्तों की भी कमी नहीं है।

नोट—बालाजी क्षेत्र के किसी भी मंदिर का प्रसाद वहां से बाहर नहीं ले जाना चाहिए। मान्यता है कि उस प्रसाद को खाने वालों का संकट ज्यादा तेजी से उभरता है जिसका समाधान बालाजी के दर्शन करके ही हो पाता है। ऐसे में प्रसाद खाकर परेशान होने वाले लोग खिलाने वाले के प्रति कई बार गलत अर्थ निकालते हैं। अत: यही सलाह है कि वहां का प्रसाद थोड़ा सा खुद खाएं और बाकी उसी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को बांट दें। यदि उपहार के रूप में अपने दोस्त, रिश्तेदार आदि के लिए कुछ ले ही जाना चाहते हैं तो वहां स्थित दुकानों से अन्य उपहार सामग्री खरीद लें लेकिन ध्यान रहे कि उसमें से कोई भी सामग्री बालाजी या वहां के अन्य मंदिरों में होने वाले पूजन (यंत्र आदि) से संबंधित न हो। पूजन सामग्री व प्रसाद का प्रयोग सिर्फ खुद और वहां जाने वाले अन्य लोग ही कर सकते हैं।



Comments Jitendra kumar Jena on 11-11-2019

Kis kis din me arji laga jata hai

Mk on 12-05-2019

arjikeselagaye

ashok kumar kashyap on 12-05-2019

noukri samandhi samashya kaishe door hogi mujh par lage arop kaishe door honge kab tak door honge.

Sonia khqnnq on 12-05-2019

Mere husband ka Kam kisi ne bad diya he meri pray he ki Voh sare raste open ho jae Hussein ki unka Kam chl sake bhut preshan ho gyi he hmari family

SANDEEP KUMAR SINGH on 12-05-2019

mari sister ko kisi ne but pret atmao kra rkha hi hame kasi shri balla ji mandir me arji lagti hi

Aakash on 12-05-2019

mera kaam pichale kai saal se theek nahi chal raha hai mai kya karu mai bahut hi preshan hu plz koi upaye batayen


Pappu shukla ujjain mp on 12-05-2019

बालाजी में अर्जी कैसे लगाई जाती दरखास कैसे लगाई जाती है पैसे कैसे लेते हैं

Ankita the on 12-05-2019

मेहंदीपुर बालाजी में अर्जी कैसे लगाई जाती है देसी कैसे लेते हैं
Lpllll l

Ankita the on 12-05-2019

बालाजी में अर्जी कैसे लगाई जाती दरखास कैसे लगाई जाती है पैसे कैसे लेते हैं

मनोज कुमार on 12-05-2019

हमारी औरत पर एक लडका वशीकरण करा रखा है

satish chauhan on 04-03-2019

मे जिस काम मे हाथ डालता वहा पर मुझे हमेशा असफलताए ही मिलती है कभी भी कोई काम पुरा नही होता है जिसका मे अच्छा करता हूँ हमेशा मेरे उपर बुराई ही आती है जिसके कारण अपनो से तथा दुसरे लोगों से लडाई झगड़े रहते
जय श्री राम ⛳ जय मेंहदीपुर बालाजी की जय


Anil malviya on 06-02-2019

Ek arji me family ke sabhi logo Ki smsya ka hal ho jata hai


Jitend garg on 21-12-2018

Shree sitaram Jai hanuman ji maharaj ki jai shree Ram RAM ram ram ram ram ram ram ram ram ram ram ram ram ram ram ram ram ram ram ram ram

POORAN SINGH on 18-12-2018

Kirpya sabamani ki rasi btaye.

Gaurav. Dilli on 14-11-2018

SABHI PARESANI BUT SAMADHAN EK BALAJGI, 7217751681 jay shri raam

Praveen pal Singh on 15-10-2018

मे जिस काम मे हाथ डालता वहा पर मुझे हमेशा असफलताए ही मिलती है कभी भी कोई काम पुरा नही होता है जिसका मे अच्छा करता हूँ हमेशा मेरे उपर बुराई ही आती है जिसके कारण अपनो से तथा दुसरे लोगों से लडाई झगड़े रहते
जय श्री राम ⛳ जय मेंहदीपुर बालाजी की जय


Pinki on 24-09-2018

Me bahut bimar rahti hu or davai bhi nahi lagti pata ni mujhe kya ho gya ha main pahle thik thi 8 9 saal pahle

Jai bala ji on 26-08-2018

Jai bala ji


Gajendra Nagda on 15-08-2018

Mera vyapar dhire dhire band ho raha he or din be din karja hota jara he

Chandraprakash on 13-08-2018

पैसा तथा कमरा

Chandraprakash Chandraprakash on 13-08-2018

पैसे की तगी तथा किराय के मकान बहुत दुख हैकोई भी काम बानता नही



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