बाणभट्ट की आत्मकथा सारांश

Bannbhatt Ki Atmkatha Saransh

GkExams on 12-05-2019

बाणभट्ट की आत्मकथा -हजारीप्रसाद द्विवेदी आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की विपुल रचना-सामर्थ्य का रहस्य उनके विशद शास्त्रीय ज्ञान में नहीं, बल्कि उस पारदर्शी जीवन-दृष्टि में निहित है, जो युग का नहीं युग-युग का सत्य देखती है। उनकी प्रतिभा ने इतिहास का उपयोग ‘तीसरी आँख’ के रूप में किया है और अतीत-कालीन चेतना-प्रवाह को वर्तमान जीवनधारा से जोड़ पाने में वह आश्चर्यजनक रूप से सफल हुई है। बाणभट्ट की आत्मकथा अपनी समस्त औपन्यासिक संरचना और भंगिमा में कथा-कृति होते हुए भी महाकाव्यत्व की गरिमा से पूर्ण है। इसमें द्विवेदी जी ने प्राचीन कवि बाण के बिखरे जीवन-सूत्रों को बड़ी कलात्मकता से गूँथकर एक ऐसी कथाभूमि निर्मित की है जो जीवन-सत्यों से रसमय साक्षात्कार कराती है। इसमें वह वाणी मुखरित है जो सामगान के समान पवित्रा और अर्थपूर्ण है-‘सत्य के लिए किसी से न डरना, गुरु से भी नहीं, मंत्रा से भी नहीं लोक से भी नहीं, वेद से भी नहीं।’ बाणभट्ट की आत्मकथा का कथानायक कोरा भावुक कवि नहीं वरन कर्मनिरत और संघर्षशील जीवन-योद्धा है। उसके लिए ‘शरीर केवल भार नहीं, मिट्टी का ढेला नहीं’, बल्कि ‘उससे बड़ा’ है और उसके मन में आर्यावर्त्त के उद्धार का निमित्त बनने की तीव्र बेचैनी है। ‘अपने को निःशेष भाव से दे देने’ में जीवन की सार्थकता देखने वाली निउनिया और ‘सबकुछ भूल जाने की साधना’ में लीन महादेवी भट्टिनी के प्रति उसका प्रेम जब उच्चता का वरण कर लेता है तो यही गूँज अंत में रह जाती हैद-‘‘वैराग्य क्या इतनी बड़ी चीज है कि प्रेम देवता को उसकी नयनाग्नि में भस्म कराके ही कवि गौरव का अनुभव करे?’’



Comments Shishupal lodhi on 26-07-2021

Banbhatt ki aatmkatha upnyas ki ki Khatarnak ki Samiksha kijiye

Lovely on 19-04-2021

बाणभट्ट की आत्मकथा में अभिव्यक्ति जीवन की दृष्टि का विवेचन करें

PUSHPGANDHA PURNIMA TOPNO on 20-12-2020

वाणभट्ट की आत्मकथा में अभिव्यक्ति जीवन दृष्टि का विवेचन कीजिए

PUSHPGANDHA PURNIMA TOpno on 20-12-2020

वाणभट्ट की आत्मकथा में अभिव्यक्त जीवन दृष्टि का विवेचन कीजिए

Sikha on 21-09-2020

Vanbhaat Ki atmakhath me jivan dristi Ki vivechana

Vinod yadav on 09-05-2019

1




Labels: , , , , ,
अपना सवाल पूछेंं या जवाब दें।




Register to Comment