बंग महिला की कहानियां

Bang Mahila Ki Kahaniyan

GkExams on 25-12-2018

बंग महिला (वास्तविक नाम- राजेन्द्रबाला घोष) हिन्दी की प्रथम मौलिक (आधुनिक) कहानी लेखिका के रूप में चिरस्मरणीय हैं। इनका रचना काल 1904 ई. है।

  • ये मीरजापुर के एक प्रतिष्ठित बंगाली महाशय राम प्रसन्न घोष की पुत्री और पूर्णचन्द्र की धर्म पत्नी थीं।
  • मीरजापुर में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के संपर्क में आने के बाद बंग महिला हिन्दी लिखने लगीं।
  • इन्होंने हिन्दी में बहुत-सी बंगला कहानियों का अनुवाद प्रस्तुत करके आधुनिक हिन्दी कहानी का पथ प्रशस्त किया। बाद में कुछ मौलिक कहानियाँ भी लिखीं, जिनमें 'दुलाई वाली' प्रसिद्ध है।
  • 'दुलाई वाली' की कहानी को हिन्दी की प्रथम मौलिक कहानी होेने का श्रेय दिया जाता है। यह 1907 ई. में 'सरस्वती'में प्रकाशित हुई थी। स्थानीय रंगत यथार्थ चित्रण तथा पात्रानुकूल भाषा की दृष्टि से यह कहानी दृष्यव्य है।
  • बंग महिला की अन्य कहानियों (पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित) में भी ये विशेषताएँ पाई जाती हैं।
  • इनका एक कहानी संग्रह ‘कुसुम संग्रह’ के नाम से प्रकाशित हुआ था।
  • सन 1950 ई. के आस-पास बंग महिला की मृत्यु हुई।




Comments Noob on 15-11-2021

Bang mahila ki kahaniyan

neha singh on 23-05-2019

bang mahila ki kahaniyo ke naam,



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