निजामुद्दीन औलिया हिस्ट्री इन हिंदी

Nijamuddin Auliya History In Hindi

GkExams on 11-01-2019

हज़रत ख्वाज़ा निज़ामुद्दीन औलिया का जन्म 1238 में उत्तरप्रदेश के बदायूँ जिले में हुआ था। ये पाँच वर्ष की उम्र में अपने पिता, अहमद बदायनी, की मॄत्यु के बाद अपनी माता, बीबी ज़ुलेखा के साथ दिल्ली में आए। इनकी जीवनी का उल्लेख आइन-इ-अकबरी, एक 16वीं शताब्दी के लिखित प्रमाण में अंकित है, जो कि मुगल सम्राटअकबर के एक नवरत्न मंत्री ने लिखा था


1269 में जब निज़ामुद्दीन 20 वर्ष के थे, वह अजोधर (जिसे आजकल पाकपट्टन शरीफ, जो कि पाकिस्तान में स्थित है) पहुँचे और सूफी संत फरीद्दुद्दीन गंज-इ-शक्कर के शिष्य बन गये, जिन्हें सामान्यतः बाबा फरीद के नाम से जाना जाता था। निज़ामुद्दीन ने अजोधन को अपना निवास स्थान तो नहीं बनाया पर वहाँ पर अपनी आध्यात्मिक पढाई जारी रखी, साथ ही साथ उन्होंने दिल्ली में सूफी अभ्यास जारी रखा। वह हर वर्ष रमज़ान के महीने में बाबा फरीद के साथ अजोधन में अपना समय बिताते थे। इनके अजोधन के तीसरे दौरे में बाबा फरीद ने इन्हें अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया, वहाँ से वापसी के साथ ही उन्हें बाबा फरीद के देहान्त की खबर मिली।

चिल्ला निज़ामुद्दीन औलिया, हुमायून का मक़्बरा के करीब, दिल्ली.

निज़ामुद्दीन, दिल्ली के पास, ग़यासपुर में बसने से पहले दिल्ली के विभिन्न इलाकों में रहे। ग़यासपुर, दिल्ली के पास, शहर के शोर शराबे और भीड़-भड़क्के से दूर स्थित था। उन्होंने यहाँ अपना एक “खंकाह” बनाया, जहाँ पर विभिन्न समुदाय के लोगों को खाना खिलाया जाता था, “खंकाह” एक ऐसी जगह बन गयी थी जहाँ सभी तरह के लोग चाहे अमीर हों या गरीब, की भीड़ जमा रहती थी।


इनके बहुत से शिष्यों को आध्यात्मिक ऊँचाई की प्राप्त हुई, जिनमें ’ शेख नसीरुद्दीन मोहम्मद चिराग़-ए-दिल्ली” “अमीर खुसरो”, जो कि विख्यात विद्या ख्याल/संगीतकार और दिल्ली सलतनत के शाही कवि के नाम से प्रसिद्ध थे।

इनकी मृत्यु 3 अप्रेल1325 को हुई। इनकी दरगाह, हजरत निज़ामुद्दीन दरगाह दिल्ली में स्थित है।



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