बौद्ध धर्म के नियम

Bauddh Dharm Ke Niyam

Gk Exams at  2018-03-25

GkExams on 28-02-2019

| हर धर्म की तरह दो जीवन शैलियां तय कीं। एक सामान्य गृहस्थी और दूसरा संन्यास। बौद्ध धर्म में बौद्ध भिक्षु बनने की पूरी प्रोसेस को इस तरह कठिन बनाया गया है कि हर कोई उसे फॉलो नहीं कर सकता। सिर्फ जो पूरे मन से धर्म प्रचार में लगना चाहता है वो ही इसको फॉलो कर सकता है। बौद्ध धर्म और वैदिक सनातन धर्म में कई समानताएं हैं लेकिन बौद्ध धर्म में वैदिक यज्ञ परंपरा को पूरी तरह नकारा है। बौद्ध धर्म में ज्योतिष और तंत्र को हिंदु धर्म की तरह ही मान्यता मिली है।


गौतम बुद्ध ने बौद्ध भिक्षुओं के लिए कुछ नियम तय किए थे जिनका मिला-जुला रुप ये था कि बौद्ध भिक्षु का जीवन पूरी तरह त्याग, वैराग्य और समाधि के आसपास ही रहेगा।


ये हैं बौद्ध भिक्षु बनने के कुछ सामान्य नियमः

ध्यान और समाधि – बौद्ध भिक्षुओं का सबसे बड़ा नियम होता है ध्यान। उन्हें अपनी साधना और समाधि की स्थिति को किसी भी अवस्था में नहीं छोड़ना होता है। ध्यान के जरिए कुंडलिनी जागरण ही उनका सबसे बड़ा उद्देश्य होता है।


परम अवस्था – ध्यान के जरिए समाधि की प्राप्ति, स्वाध्याय और कुंडलिनी जागरण के जरिए परम अवस्था को प्राप्त करना ही उनका ध्येय होता है।


ध्यान का स्थान – बौद्ध भिक्षुओं के प्रशिक्षण काल में उन्हें अलग-अलग वातावरण में भी ध्यान करने का प्रशिक्षण मिलता है। बहुत ठंडे या बहुत गर्म जगह, बहुत सुनसान या बहुत भीड़ वाली जगह। ऐसे अलग-अलग स्थान पर भी वो अपनी ध्यान की अवस्था का प्रशिक्षण लेते हैं।





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