PradhanMantri Awaas Yojana In Hindi


Rajesh Kumar at  2016-12-04   04:21:00

2022 तक सबके लिए आवास हेतु प्रधानमंत्री आवास योजना की ग्रामीण आवास योजना - ‘ ग्रामीण ’ का क्रियान्वयन
23 मार्च , 2016

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण आवास योजना ‘ ग्रामीण ’ के क्रियान्वयन को अनुमति प्रदान कर दी है । इस योजना के तहत सभी बेघर और जीर्ण - शीर्ण घरों में रहने वाले लोगों को पक्का मकान बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है ।
इस परियोजना के क्रियान्वयन हेतु 2016 - 17 से 2018 - 19 तक तीन वर्षों में 81975 रुपये खर्च होंगे । यह प्रस्तावित किया गया है कि परियोजना के अंतर्गत वर्ष 2016 - 17 से 2018 - 19 के कालखंड में एक करोड़ घरों को पक्का बनाने के लिए मदद प्रदान की जाएगी । दिल्ली और चंडीगढ़ को छोड़ कर यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में पूरे भारत में क्रियान्वित की जाएगी । मकानों की क़ीमत केंद्र और राज्यों के बीच बांटी जाएगी ।
विस्तृत जानकारी निम्न हैः -
क ) प्रधानमंत्री आवास योजना की ग्रामीण आवास योजना - ग्रामीण का क्रियान्वयन ।
ख ) ग्रामीण क्षेत्रों में एक करोड़ आवासों के निर्माण के लिए 2016 - 17 से 2018 - 19 तक तीन वर्षों में मदद प्रदान की जाएगी ।
ग ) समतल क्षेत्रों में प्रति एकक 1 , 20 , 000 तक एवं पहाड़ी क्षेत्रों में 1 , 30 , 000 तक सहायता में बढ़ोतरी ।
घ ) 21 , 975 करोड़ रुपए की अतिरिक्त वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक ( नाबार्ड ) से की जाएगी ।
ड. ) लाभान्वितों की पहचान के लिए सामाजिक - आर्थिक - जातीय जनगणना - 2011 का उपयोग ।
च ) परियोजना के तहत लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी सहायता हेतु नेशनल टेकनिकल सपोर्ट एजेंसी का गठन ।
क्रियान्वयन की रणनीति एवं लक्ष्यः -
• पूर्ण पारदर्शिता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित करते हुए लाभान्वितों की पहचान का कार्य सामाजिक - आर्थिक - जातीय जनगणना की सूचनाओं का प्रयोग कर किया जाएगा ।
• पूर्व में सहायता प्राप्त लाभान्वितों एवं अन्य कारणों से अयोग्य लोगों की पहचान के लिए सूची ग्राम सभा को दी जाएगी । अंतिम सूची का प्रकाशन किया जाएगा ।
• घरों के निर्माण की क़ीमत केंद्र एवं राज्य द्वारा समतल क्षेत्रों में 60 40 के अनुपात में तथा पहाड़ी / उत्तर - पूर्वी क्षेत्रों हेतु 90 10 के अनुपात में रखी जाएगी ।
• लाभान्वितों की वार्षिक सूची की पहचान ग्राम सभा द्वारा सहभागिता पूर्वक की जाएगी । मूल सूची की प्राथमिकता में परिवर्तन के लिए ग्राम सभा को लिखित में न्यायसंगत ठहराना होगा ।
• लाभान्वित के खाते में सीधे धनराशि स्थानांतरित की जाएगी ।
• फोटोग्राफ एप के माध्यम से अपलोड किए जाएंगे , भुगतान की प्रगति को लाभान्वित एप के माध्यम से देख पाएंगे ।
• लाभान्वित मनरेगा के अंतर्गत 90 दिनों के अकुशल श्रम का अधिकारी होगा , सर्वर से लिंक कर तकनीकी आधार पर इसको सुनिश्चित किया जाएगा ।
• मकानों की संरचना ऐसी होगी जो क्षेत्रीय आधार पर उपयुक्त हों , मकानों की रचना में ऐसी खासियतें रखी जाएंगी जो उन्हें प्राकृतिक आपदाओं से बचा सकें ।
• मिस्त्रियों की संख्या में कमी को देखते हुए उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी ।
• मकान बनाने में प्रयुक्त सामग्री की अतिरिक्त ज़रूरत को देखते हुए ईंटों के निर्माण हेतु सीमेंट या फ्लाई एश का मनरेगा के अंतर्गत कार्य किया जाएगा ।
• लाभान्वित को 70 , 000 रुपए तक का ऋण लेने की सुविधा प्रदान की जाएगी ।
• मकान का क्षेत्रफल मौजूदा 20 वर्ग मीटर से बढ़ाकर भोजन बनाने के स्वच्छ स्थान समेत 25 वर्ग मीटर तक किया जाएगा ।
• परियोजना से जुड़े सभी लोगों के लिए गहन क्षमता सर्जक प्रक्रिया रखी जाएगी ।
• ज़िला एवं ब्लॉक स्तर पर आवासों के निर्माण हेतु तकनीकी सुविधाएं प्रदान करने के लिए मदद मुहैया कराई जाएगी ।
• आवासों के निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एवं केंद्र और राज्य सरकारों को तकनीकी मदद देने के लिए एक नेशनल टेक्निकल सपोर्ट एजेंसी का गठन किया जाएगा ।
मकान एक आर्थिक सम्पत्ति है एवं स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव डालने के साथ ही सामाजिक उन्नति में योगदान देता है । किसी परिवार के लिए रहने का स्थाई मकान होने के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष फायदे अमूल्य एवं ढेरों हैं ।
निर्माण क्षेत्र भारत में दूसरा सबसे बड़ा रोज़गार प्रदाता है । इस क्षेत्र का 250 से भी ज़्यादा अधीनस्थ उद्योगों से वास्ता है । ग्रामीण आवास योजना के विकास से ग्रामीण समाज में रोज़गारों का सृजन होता है और इससे गांवों के अर्थतंत्र का विकास होता है ।
रहने के लिए वातावरण बेहतर होने के अप्रत्यक्ष फायदे श्रम उत्पादकता एवं स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव के रूप में होते हैं । पोषण , स्वच्छता , माता एवं बच्चे के स्वास्थ्य समेत मानव विकास के मापदण्डों पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है । जीवन स्तर बेहतर होता है ।


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