भारत का संविधान-अनुच्छेद 15 धर्म मूलवंश जाति लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध Gk ebooks


Rajesh Kumar at  2018-08-27  at 09:30 PM
विषय सूची: संविधान के भाग विषय सूची >> संविधान भाग 3 मूल अधिकार >>> अनुच्छेद 15 धर्म मूलवंश जाति लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध

अनुच्छेद 15 धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध
(1) राज्य, किसी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूल वंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई विभेद नहीं करेगा।
(2) कोई नागरिक केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर—
(क) दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, होटलों और  सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों में प्रवेश, या
(ख) पूर्णत:— या भागत— राज्य-निधि से पोषित या साधारण जनता के प्रयोग के लिए समर्पित कुओं, तालाबों, स्नानघाटों, सड़कों और सार्वजनिक समागम के स्थानों के उपयोग, के संबंध में किसी भी निर्योग्यता, दायित्व, निर्बन्धन या शर्त के अधीन नहीं होगा।
(3) इस अनुच्छेद की कोई बात राज्य को स्त्रियों और  बालकों के लिए कोई विशेष उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी।
1[ (4) इस अनुच्छेद की या अनुच्छेद 29 के खंड (2) की
कोई बात राज्य को सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों के किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिए या अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए कोई विशेष उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी।] 

2[ (5) इस अनुच्छेद या अनुच्छेद 19 के खंड (1) के
उपखंड (छ) की कोई बात राज्य को सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों के किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिए या अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के लिए, विधि द्वारा, कोई विशेष उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी, जहां तक ऐसे विशेष उपबंध, अनुच्छेद 30 के खंड (1) में निर्दिष्ट अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थाओं से भिन्न, शिक्षा संस्थाओं में, जिनके अंतर्गत प्राइवेट शिक्षा संस्थाएं भी हैं, चाहे वे राज्य से सहायता
प्राप्त हों या नहीं, प्रवेश से संबंधित हैं।]

1संविधान (पहला संशोधन) अधिनियम 1951 की धारा 2 द्वारा जोड़ा गया।
संविधान (तिरानवेवां संशोधन) अधिनियम 2005 की धारा 2 द्वारा (20-1-2006 से) अन्त—स्थापित।


सम्बन्धित महत्वपूर्ण लेख
अनुच्छेद 21 प्राण और दैहिक स्वतंत्रता
संवैधानिक उपचारों का अधिकार इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए उपचार।
कुछ निदेशक तत्वों को प्रभावी करने वाली विधियों की व्यावृत्ति
कुछ अधिनियमों अौर विनियमों का विधिमान्यकरण।
29 अल्पसंख्यक - वर्गों के हितों का संरक्षण
शिक्षा संस्थाओं की स्थापना अौर प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार
संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण
अनुच्छेद 25 26 27 28 धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
अनुच्छेद 23 और 24 शोषण के विरुद्ध अधिकार
अनुच्छेद 22 कुछ दशाओं में गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण
अनुच्छेद 13. मूल अधिकारों से असंगत या उनका अल्पीकरण करने वाली विधियां
अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण
अनुच्छेद 19 स्वातंत्र्य-अधिकार - वाक्-स्वातंत्र्य आदि
अनुच्छेद 18 उपाधियों का अंत
अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का अंत
अनुच्छेद 16 लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता
अनुच्छेद 15 धर्म मूलवंश जाति लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध
अनुच्छेद 14 विधि के समक्ष समता
मूल अधिकार अनुच्छेद 12 परिभाषा

Anuchhed 15 Dharm Moolvansh Jati Ling Ya JanmSthan Ke Aadhaar Par Vibhed Ka Pratishedh 1 Rajya Kisi Nagrik Viruddh Kewal Inme Se Koi Nahi Karega । 2 — क Dukanon Sarwjanik Bhojanalayon Hotels Aur Manoranjan Sthano Me Pravesh Kha Purnnt Bhaagat - Nidhi Poshit Sadharan Public Prayog Liye Samarpit Kuon Talabo SnanGhaton Sadko Samagam Upyog Sambandh Bhi Niryogyata Dayitva Nirbandhan Shart Adheen Hoga 3 Is Ki Baat Ko Striyon Balakon


Labels,,,