1857 की क्रान्ति-मंगल पाण्डेय Gk ebooks


Rajesh Kumar at  2018-08-27  at 09:30 PM
विषय सूची: आधुनिक-भारत का इतिहास >> 1857 की क्रांति विस्तारपूर्वक >> 1857 के क्रांतिकारियों की सूची >>> मंगल पाण्डेय

मंगल पाण्डेय

मंगल पांडे 1857 की क्रांति के महानायक थे। ये वीर पुरुष आजादी के लिये हंसते-हंसते फाँसी पर लटक गये। इनके जन्म स्थान को लेकर शुरू से ही वैचारिक मतभेद हैं। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इनका जन्म जुलाई 1827 में उत्तर प्रदेश (बालिया) जिले के सरयूपारी (कान्यकुब्ज) ब्राह्मण परिवार में हुआ। कुछ इतिहासकार अकबरपुर को इनका जन्म स्थल मानते हैं। इनके पिता का नाम दिवाकर पांडे था जो कि भूमिहर ब्राह्मण थे।

बड़े होकर वे कलकत्ता के बैऱकपुर की नेटिव इनफैन्ट्री में सिपाही के पद पर नियुक्त हुए। वहां से 1849 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में भर्ती हुए। उस समय इनकी आयु 22 साल की थी। मंगल पांडे शुरू से ही स्वतंत्रता प्रिय व धर्मपरायण व्यक्ति थे। वे इनकी रक्षा के लिये अपनी जान भी देने के लिये तैयार रहते थे।

जब वे सेना में थे तो एक दिन दमदम के निकट कुएं से पानी भर रहे थे तब एक निम्न जाति के व्यक्ति (अछूत) ने उनसे लोटा मांगा तो उन्होंने देने से इंकार कर दिया तब उस निम्न जाति के व्यक्ति ने कहा की आप मुझे (अछूत होने के कारण) लोटा मत दो लेकिन जब फ़ौज में गाय व सूअर की चर्बी वाले कारतूसों का उपयोग करना पड़ेगा तो आप अपने धर्म को कैसे बचाओगे। ये बात सुनकर मंगल पांडे का दिमाग ठनका। उन्होंने सोचा अब या तो धर्म छोड़ना पडे़गा या विद्रोह करना पड़ेगा। फ़िर तय किया की प्राण भले ही जाये पर धर्म नहीं छोडूंगा। फ़लस्वरूप नेताओं द्वारा निश्चित तिथि से पहले ही उन्होंने विद्रोह का बिगुल बजा दिया। अंत में 31 मई को सारे देश में क्रांति की शुरू आत हो गई। इस क्रांति की शुरूआत परेड़ मैदान में हुई थी।

29 मार्च की एक शाम को बैरकपुर में मंगल पांडे ने अपनी रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट पर हमला कर दिया। सेना के जनरल ने सब सिपाहियों को मंगल पांडे को गिरफ़्तार करने का आदेश दिया, परन्तु किसी ने आदेश नहीं माना। इस पर मंगल पांडे ने अपने साथियों को विद्रोह करने के लिये कहा, लेकिन किसी ने भी उनका साथ नहीं दिया।

इस क्रांति में मंगल पांडे ने कई ब्रितानी सिपाहियों व अधिकारियों को मौत के घाट उतारा व हिम्मत नहीं हारी। जब अंत में अकेले हो गये तो उन्होंने ब्रितानियों के हाथ से मरने के बजाय खुद मरना स्वीकार किया। उन्होंने खुद को गोली मार दी और बुरी तरह से घायल हो गये। कुछ समय तक अस्पताल में उनका इलाज चला।

ब्रिटिश सरकार ने 8 अप्रैल 1857 को मंगल पांडे का कोर्ट मार्शल किया व उनको फ़ांसी पर चढ़ा दिया। रेजिमेन्ट के जिन सिपाहियों ने मंगल पांडे का विद्रोह में साथ दिया ब्रिटिश सरकार ने उनको सेना से निकाल दिया और पूरी रेजिमेन्ट को खत्म कर दिया। अन्य सिपाहियों ने इस निर्णय का विरोध किया। वे इस अपमान का बदला लेना चाहते थे। इसी विरोध ने 1857 की क्रांति को हवा दी धीरे -धीरे ये लहर हर जगह फ़ैलती गई। इलाहाबाद, आगरा आदि स्थानों पर तोड़फोड़ व आगजनी की घटनाएँ हुई। नेताओं द्वारा तय की गई तिथि से पहले क्रांति की शुरूआत करने के कारण शायद यह क्रांति विफ़ल हो गई। फ़िर भी हम शहीद मंगल पांडे के बलिदान को कभी भी भुला नहीं पायेंगे ।



सम्बन्धित महत्वपूर्ण लेख
नाना साहब पेशवा
बाबू कुंवर सिंह
मंगल पाण्डेय
मौलवी अहमद शाह
अजीमुल्ला खाँ
फ़कीरचंद जैन
लाला हुकुमचंद जैन
अमरचंद बांठिया
झवेर भाई पटेल
जोधा माणेक बापू माणेक भोजा माणेक रेवा माणेक रणमल माणेक दीपा माणेक
ठाकुर सूरजमल
गरबड़दास मगनदास वाणिया जेठा माधव बापू गायकवाड़ निहालचंद जवेरी तोरदान खान
उदमीराम
ठाकुर किशोर सिंह, रघुनाथ राव
तिलका माँझी
देवी सिंह, सरजू प्रसाद सिंह
नरपति सिंह
वीर नारायण सिंह
नाहर सिंह
सआदत खाँ

Mangal Pandey Pande 1857 Ki Kranti Ke Mahanayak The Ye Veer Purush Aajadi Liye Hanste - Fansi Par Latak Gaye Inke Janm Sthan Ko Lekar Shuru Se Hee Vaicharik Matbhed Hain Kuch Itihaskaron Ka Manna Hai Inka July 1827 Me Uttar Pradesh Balia Jile SaryuPari Kanyakubj Brahmann Pariwar Hua Itihaskar AkbarPur Sthal Mante Pita Naam diwakar Tha Jo भूमिहर Bade Hokar Ve Calcutta Bairakpur Native infantry Sipahi Pad Niyukt Hue Wahan 1849


Labels,,,