1857 की क्रान्ति-1857 के विद्रोह की असफ़लता के कारण Gk ebooks


Rajesh Kumar at  2018-08-27  at 09:30 PM
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1857 के विद्रोह की असफ़लता के कारण


आजादी के लिये 1857 की क्रांति में सभी वर्ग के लोगों ने अपना सहयोग दिया था परन्तु यह क्रांति विफ़ल रही। इतिहासकार इस क्रांति की विफ़लता के निम्न कारण बताते है।

निश्चित तिथि के पूर्व क्रांति का भड़कना

क्रांति का स्थानीय स्वरूप

क्रांतिकारियों में प्रभावी नेता की कमी

निश्चित लक्ष्य का अभाव

साधन का अभाव

कैनिंग की उदारता

जन साधारण का क्रांति के प्रति उदासीन होना

अन्य कारण



निश्चित तिथि के पूर्व क्रांति का भड़कना

लक्ष्मी बाई, नाना साहब, अजीमुल्ला खां, बहादुर शाह जफ़र, तांया टोपे आदि क्रांतिकारियों ने 31 मई को क्रांति आरम्भ करने के बारे में योजना बनाई। इन सबने इस दिन बंदियों को मुक्त कराने, ब्रिटिश पदाधिकारियो को जान से मारने, ब्रितानियों के हथियारों व सरकारी खजाने को लूटने जैसी कई योजनाएं बनाई। इस योजना की खबर ब्रितानियों को नहीं थी। लेकिन उसी समय 24 मार्च को मंगल पांडे ने आवेश में आकरचर्बी वालेकारतूसों का विरोध करके क्रांति की शुरूआत कर दी। यह क्रांति बंगाल के अलावा दिल्ली, मेरठ, कानपुर, इलाहाबाद, बनारस आदि जगह फ़ैल गई। अगर क्रांति निश्चित समय पर हुई होती तो वह जरू र सफ़ल हुई होती।

क्रांति का स्थानीय स्वरूप

1857 की क्रांति पूरे राष्ट्र तक नहीं फ़ैल पाई। देश के सिंध, नर्मदा का दक्षिण हिस्सा, आदि भागों में क्रांति की लहर बिल्कुल भी नहीं पहुँच पाई। कई देशी राजाओं ने क्रांतिकारियों का साथ दिया लेकिन कुछ देशी राजाओं व अन्य लोगों ने ब्रितानियों का साथ दिया।

क्रांतिकारियो में प्रभावी नेता की कमी

इस क्रांति की विफ़लता का एक कारण यह भी था कि इसमें कुशल सेनानायक का अभाव था। यद्यपि ये सब साहसी, व कष्ट सहिष्णु थे लेकिन ये सब सही तरीके से एकत्रित नहीं हो पाए। कई बार ये आपस में ही लड़ते रहते थे। कई लोग लक्ष्मी बाई जैसी बहादुर क्रांतिकारी को सिर्फ़ महिला होने के कारण क्रांति का नेतृत्व नहीं करने दे रहे थे। इसी तरह बख्त खां को भी सिर्फ़ साधारण परिवार से सम्बंधित होने के कारण बहादुर होते हुए भी क्रांति का नेतृत्व नहीं करने दिया गया। इस क्रांति की विफ़लता के पीछे सफ़ल नेता का अभाव व आपसी फ़ूट ही था। यदि सब आपस में मिलकर ब्रितानियों का विरोध करते तो निश्चित ही सफ़ल हो जाते।

निश्चित लक्ष्य का अभाव

सभी क्रांतिकारियों के क्रांति के पीछे उद्धेश्य अलग-अलग थे। जैसे बेगम हजरत महल अवध को कंपनी सरकार में मिलाने के कारण ब्रितानियों की विद्रोही बनी। कुंवरसिंह ब्रिटिश सरकार के व्यवहार से खुश नहीं थे। नाना साहब पेंशन ना मिलने के कारण ब्रितानियों के खिलाफ़ हुए। सबका उद्धेश्य साझा या आम नहीं था लेकिन वे सभी ब्रितानियों को भारत से निकालना चाहते थे। अगर सभी देशी राजाओं ने उनका साथ दिया होता वएक सुनिश्चित उद्धेश्य होता तो ब्रितानियों को इंग्लैंड की ओर भागना ही पड़ता।

साधन का अभाव

क्रांतिकारियों के पास पुराने शस्त्र थे जबकि ब्रितानियों के पास आधुनिक शस्त्र थे। क्रांतिकारियों के पास संदेश भेजने का भी साधन नहीं था तथा उनके पास धन की भी कमी थी, इसलिये सेना में नये लोग भर्ती नहीं होते थे। अतः क्रांति विफ़ल रही।

कै निंग की उदारता

1857 में ब्रितानियों द्वारा भारत सरकार अधिनियम पारित किया गया जिसमे भारतीय लोगों को कई सब्जबाग दिखलाये गये। डलहौजी के बाद कैनिंग को गवर्नर जनरल बनाया गया जो क्रांति को दबाना चाहता था। जिसमें वह कुछ सफ़ल भी रहा। क्रंाति के दमन के बाद सेनापति निकोलसन ने आदेश दिया की बचे हुए क्रांतिकारियों को फ़ांसी पर चढ़ा दिया जाए। कैनिंग द्वारा क्रांति का दमन करने के बाद क्रांति फ़िर नहीं भड़की।

जन साधारण का क्रांति के प्रति उदासीन होना

इस क्रांति में सैनिकों राजाओं व कुछ लोगों के अलावा व्यापक जनता ने हिस्सा नहीं लिया इसके अलावा कुछ किसानों व मजदूरों ने भी हिस्सा नहीं लिया। इसका एक कारण अशिक्षा भी था जिससे जनता क्रांति का उद्धेश्य नहीं समझ पाई। एक तरफ़ क्रांतिकारियों ने लूटपाट मचाई, जेल तोड़ने से सिपाहियों के साथ चोर डाकू भी बाहर निकल गये जिससे समाज में फ़िर से अशान्ति फ़ैल गई। लोगों ने इन सबका जिम्मेदार सरकार की बजाय क्रांतिकारियों को बताया जिससे क्रांति विफ़ल रही थी।

अन्य कारण

यद्यपि कई क्रांतिकारियों ने साहस के साथ दुश्मन के छक्के छुड़ाये लेकिन कुछ दूसरे कारण भी थे जिनके कारण यह क्रांति विफ़ल रही ।

ब्रिटिश सेना का एक संगठन व एक केन्द्र होता था। एक सेना के हटने पर दूसरी सेना आ जाती थी। जबकि भारतीय सेना में यदि युद्ध में कोई सैनिक मारा जाता तो सैनिक अपनी हार मान लेते थे व कई बार युद्ध बंद कर देते थे। उनमें धैर्य की कमी थी लेकिन ब्रितानियों की सेना में यह नहीं होता था उनका युद्ध जारी रहता था। इस कारण क्रांति विफ़ल रही। फ़िर भी, इन सब के बावजूद 1857 की क्रांति का विवरण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है।



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