राजस्थान सामान्य ज्ञान-अलवर शैली Gk ebooks


Rajesh Kumar at  2018-08-27  at 09:30 PM
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अलवर शैली

यह शैली मुगल शैली तथा जयपुर शैली का सम्मिश्रण माना जा सकता है। यह चित्र औरंगजेब के काल से लेकर बाद के मुगल कालीन सम्राटों तथा कम्पनी काल तक प्रचुर संख्या में मिलते हैं। जब औरंगजेब ने अपने दरबार से सभी कलात्मक प्रवृत्तियों का तिरस्कार करना शुरु किया ते राजस्थान की तरफ आने वाले कलाकारों का प्रथम दल अलवर में आ टिका, क्योंकि कि मुगल दरबार से यह निकटतम राज्य था। उस क्षेत्र में मुगल शैली का प्रभाव वैसे तो पहले से ही था, पर इस स्थिति में यह प्रभाव और भी बढ़ गया।

इस शैली में राजपूती वैभव, विलासिता, रामलीला, शिव आदि का अंकन हुआ है। नर्त्तकियों के थिरकन से युक्त चित्र बहुतायक में निर्मित हुए। मुख्य रुप से चित्रण कार्य स्क्रोल व हाथी-दाँत की पट्टियों पर हुआ। कुछ विद्वानों ने उपर्युक्त शैलियों के अतिरिक्त कुछ अन्य शैलियों के भी अस्तित्व को स्वीकार किया है। ये शैलियाँ मुख्य तथा स्थानीय प्रभाव के कारण मुख्य शैलियाँ से कुछ अलग पहचान बनाती है।



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Alwar Shaili Yah Mugal Tatha Jaipur Ka Sammishrann Mana Jaa Sakta Hai Chitra AuRangjeb Ke Kaal Se Lekar Baad Kaleen Samraton Company Tak Prachur Sankhya Me Milte Hain Jab ne Apne Darbar Sabhi Kalatmak Pravritiyon तिरस्कार Karna Shuru Kiya te Rajasthan Ki Taraf Ane Wale Kalakaron Pratham Dal Aa टिका Kyonki Nikattam Rajya Tha Us Shetra Prabhav Waise To Pehle Hee Par Is Sthiti Aur Bhi Badh Gaya Rajputi Vaibhav Vilasita Ramleela


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