कांसा धातु

kaansa Dhatu

GkExams on 20-02-2019

कांसा एक मिश्र धातु है, जो ताँबे और जस्ते अथवा ताँबे और टिन के योग से बनाई जाती है। कांसा, ताँबे की अपेक्षा अधिक कड़ा होता है और कम ताप पर पिघलता है। इसलिए कांसा सुविधापूर्वक ढाला जा सकता है। आमतौर पर साधारण बोलचाल में कभी-कभी पीतल को भी कांसा कह दिया जाता है, जो ताँबे तथा जस्ते की मिश्र धातु है और पीले रंग का होता है। ताँबे और राँगे की मिश्र धातु को 'फूल' भी कहते हैं। वर्तमान में आभूषण आदि बनाने के हेतु एक प्रकार के कांसे का व्यवहार किया जाता है, जिसका रंग सुनहरा होता है। इस धातु को ऐल्युमिनियम तथा ताँबा विविध भाग में मिलाकर निर्मित किया जाता है। खुदाई आदि का कार्य इस पर बड़ा सुंदर बनता है।

नाम तथा अर्थ

पुराकालीन वस्तुओं में कांसा से निर्मित वस्तुएँ काफ़ी महत्त्वपूर्ण थीं। इसीलिए उस युग को "कांस्य युग" का नाम दिया गया था। कांसे को अंग्रेज़ी में 'ब्रोंज़' कहते हैं। यह फ़ारसी भाषा का मूल शब्द है, जिसका अर्थ होता है- 'पीतल'। कांसा, जिसे संस्कृत में 'कांस्य' कहा जाता है, संस्कृत कोशों के अनुसार श्वेत ताँबे अथवा घंटा बनाने की धातु को कहते हैं। विशुद्ध ताँबा धातु के पत्तों में या इनसे बनी पत्तलों में किया गया भोजन 'चान्द्रायण व्रत' एवं 'एकादशी व्रत' के समान पुण्य प्रदान करने वाला माना गया है। इतना ही नहीं, पलाश के पत्तों में किया गया एक-एक बार का भोजन त्रिरात्र व्रत के समान पुण्यदायक और बड़े-बड़े पातकों का नाश करने वाला बताया गया है। चतुर्मास में बड़ के पत्तों या पत्तल पर किया गया भोजन भी बहुत पुण्यदायी माना गया है।





Comments Anjali on 28-08-2018

Kansa dhatu kin dhatuvo se mil kr b
anate hai



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