प्रेरक प्रसंग कविता

Prerak Prasang Kavita

GkExams on 10-02-2019

मुझे तो अँधेरों में जलना भी आता है
राह कितनी भी मुश्किल हो पर चलना भी आता है।।

कितने भी पत्थर बिछा दो तुम राहों में कोई फर्क नहीं पड़ता
क्योंकि मुझे गिरकर संभलना भी आता है।।

हम नहीं मानते कि ये सब किस्मत में लिखा था
इरादे के पक्के हैं हमें किस्मत बदलना भी आता है।।

तुम्हें क्या लगता है हम यूँ ही रेंगते रहेंगे जमीन पर
थोड़ी दम तो भरने दो हमें उछलना भी आता है।।

तूने ये कैसे सोच लिया कि हम भी पत्थर दिल हैं तेरी तरह
अरे तुम नज़रें तो झुकाओ हमें पिघलना भी आता है।।



Comments Vijay sahani on 13-04-2021

Good

Okharam on 20-10-2019

प्रेरक पर्सन



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