राज मिस्त्री उपकरण

Raj Mistri Upakarann

GkExams on 31-01-2021



राजमिस्त्री और उसके औजार (भारतीय शिल्प और शिल्पी)

भारत में मकान बनाने वाले कारीगरों को राजमिस्त्री कहते है।।और वो अपने काम में बहुत ही दक्ष होते है।। येलोग बहुत ही साधारण औजारों से असाधारण शिल्पों का निर्माण करते करते थे। सैकड़ों साल पहले से ही उन्होंने बहुमंजिला गगनचुम्वी इमारतें बनाना शुरू कर दिया था। वे गरीब की झोपडी से ले कर राजाओं के महल, विशाल देवालय (मंदिर), मस्जिद, गुरूद्वारे, और ताजमहल जैसे मक़बरे तक बनाते थे। इन लोगों ने सुरक्षा की दृष्टि से बेजोड़ किलों (दुर्ग), भण्डार और नदियों पर पुल भी बनाये है।। कुएं और बावड़ियां भी ये ही लोग बनाते थे। स्था।त्य कला के अनेक निदर्शन भारत के कोने कोने में बिखरे हुए है। इन राज मिस्त्रियों का मुख्य औजार करनी था।जिसके सहारे वे चुनाई भी करते थे।और पलस्तर भी. चुनाई को गंथनि भी कहते थे। चुना-सुरकी हो या बालू/रेत-सीमेन्ट करनी के सहारे ये मसाला भी बनाते थे। छोटी मोती चीजों को तोड़ने में भी करनी काम आती थी। मसाला (गारा) मिलाने के लिए लोहे की कढ़ाई (तगारी) का इस्तेमाल होता था। इन मसालों से ही चुनाई का काम होता था। हथौड़ा/हथोडी इनका एक और प्रमुख औजार होता था।जिससे वे पत्थर और ईंट तोड़ा करते थे। कील ठोकने के लिए भी हथौड़ी ही काम आती थी।

किसी मजबूत या मोटी दीवार आदि को तोड़ने के लिए शब्बल काम में लेते थे। यह लोहे का मोटा और मजबूत धारदार डंडे जैसा होता था। किसी भारी चीज को उठाने के लिए इसे "Lever" की तरह भी काम में लिया जाता था। छोटी चीजों को तोड़ने या काटने के लिए छेनी काम में ली जाती थी। छोटी छेनी, जिससे पत्थर तरासने का काम होता था।उसे टांची कहते थे। रेट बगैरह छानने के लिए चलनी काम आती थी। ज्यादा मात्रा में मसाला मिलाने और मिटटी की खुदाई करने के लिए कुदाल या कुदाली काम में लेते थे। फावड़ा भी कुदाल जैसा ही होता था। पथरीली जमीन को खोदने में गैंती काम आती थी। मार्बल या अन्य पत्थर काटने के लिए आरी भी काम में ली जाती रही है।

पलस्तर को सही और समरूप करने के लिए लकड़ी के जिस समतल पाटे पर एक हैंडल जोड़ कर जो औजार बनाया जाता था।उसे रूसा कहते थे। इसी तरह नापने के लिए लकड़ी के स्केल के अलावा सूत का भी इस्तेमाल किया जाता था। सूत के नीचे कोई भारी वजन बांध कर इसे दिवार की सिधाई नापने के लिए भी काम में लिया जाता था।

पुताई करने के लिए कुंची काम में ली जाती थी।जो की Brush जैसा होता था। उसमे जो मुंज या पटसन बांधा जाता था।उसे जेवड़ी कहते थे।

ऊँची दीवारों पर चढ़ने के लिए बांस की जो सीढ़ी बनाई जाती थी।उसे पेढ़ा या भारा कहा जाता था। छत भरने में भी इसका इस्तेमाल होता था।और उसमे बल्लियों के साथ लकड़ी का पाटा लगाया जाता था। मुख्य कारीगर के साथ सहायक के रूप में काम करनेवाले मजदुर बेलदार कहलाते थे। बंगाल में इन्हें पायेट कहा जाता है।




Comments Pawan on 12-06-2021

Rajmistri ki visesh taye

Omprakash on 22-12-2020

Hm raj Mistri kaise jude acc

sol on 22-10-2020

sol ko hindi me kya kahete hai

Sandeep on 25-09-2020

Raj Mistri or Kumhar main kya aatar Hai

Deepak soni on 09-07-2020

ईटों रेत की गुणवत्ता की जांच कैसे की जाती है

Rajkumar on 21-05-2020

छत के बीम को जोड़ने के नीयम


Md.Rajaullah on 08-05-2020

Rajmistiri.

Rakesh kumar on 05-04-2020

Asa konsa Kam he Jo insan jinge me ek he bar karta hii

Ramanuj on 20-12-2019

Khirki ki lintel setring design

Tolaram bhabhar on 29-06-2019

Do bricks ke bhich ki duri kya hai

Pradeep saw on 28-05-2019

House ki chhat dalai me ciment .baloo chharri. Pani kitna ke banaya jata hai

Akram on 01-02-2019

Raj mistari me ojar kiya him




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