सांप काटने की आयुर्वेदिक दवा

Sanp Katne Ki ayurvedic Dawa

Gk Exams at  2018-03-25


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GkExams on 17-01-2019


सर्व सुलभ चिकित्सा

सर्प दंश हो

जाने पर काटे हुए स्थान से काला सा रक्त कुछ लसीलापन लिये हुये बहने लगता

है. दंश स्थान पर जलन, चुभन तथा शोथ हो जाती है. रोगी कमजोर एवं

तंद्रायुक्त और सुस्त हो जाता है. रोगी का सिर नीचे की ओर झुक जाता है.

चक्कर आने लगते है तथा रोगी भयभीत हो जाता है. श्वासवरोध भी पाया जाता है.

मुख से कफ तथा झाग निकलने लगते है. किसी के विभिन्न अंगों से रक्त स्राव भी

होता है. रोगी का रस ज्ञान प्रायः नष्ट हो जाता है. जैसे नीम के पत्ते,

लहसुन, मिर्च आदि का वास्तविक स्वाद न अनुभव होना. यहाँ यह स्मरण रहे कि

जैसा सर्प होगा वैसे ही वातज, पित्तज, कफज लक्षणों की अधिकता होगी. यह

निश्चय हो जाने के बाद कि रोगी को सर्प ने ही काटा है हमे चाहिये कि-

  1. रोगी

    को बार बार बलपूर्वक कहे कि काटने वाले समस्त सर्प विषैले नहीं होते अतः

    उसकी बिलकुल घबराने की आवश्यकता नहीं है और उसकी जान को कोई खतरा नहीं है.
  2. रोगी को तेज चलाए या दौड़ाएं जाने से रोकें. कारण, ऐसा करने पर विष उसके शरीर में शीघ्रतिशीघ्र फैल जायेगा.
  3. रोगी

    को चाय या काफी पीने को दी जा सकती है परंतु मदिरा या मदिरा मिश्रित पेय

    कोई भी किसी मात्रा में नहीं दें. मदिरा जाति के पेयोग से विष की गति रक्त

    में बढ़ जाती है.
  4. रोगी को पूर्ण आराम की अवस्था में रखे परंतु सोने न दें.

उपर्युक्त

व्यवस्थाओं को करने के पश्चात रोगी को पकड़कर उसके दंश स्थान के ऊपर एक

मजबूत बंधन कस कर बांध दें. बंधन में रस्सी, रूमाल या किसी कपड़े का प्रयोग

किया जा सकता है. प्रथम बंधन के थोड़ा ऊपर दूसरा बंधन और बांध दें.

तत्पश्चात रूग्ण स्थल को मूलत्र अथवा स्वच्छ जल से प्रक्षालन करें. घाव को

साफ करने के बाद किसी चाकू, ब्लेड या धारधार शस्त्र से आधा इंच लंबा तथा

पाव इंच गहरा चीरा लगा दें. चीरा देने पर रक्त बहना लगेगा तथा उस स्थान का

संचित सर्प विष भी उसके साथ बह जायेगा. कदाचित चीरा देने पर रक्त न निकलें,

तो बंधनों को एक या दो मिनट के लिये ढीलें कर दें, रक्त बहना आरंभ होने पर

पुनः बंधनों को सख्त कर दें. ऐसा करने के पश्चात घाव पर साधारण पट्टी

बांधकर रोगी के निकटस्थ औषधालय में ले जायें और योग्य चिकित्सक की सेवाएं

उपलब्ध करें. बंधन बांधते समय इस बात पर पूरा ध्यान रखे कि प्रति आधे घंटे

के बाद बंधनों को एक एक मिनट के लिए खोले दिया करें.




सांप काटने पर रोगी की प्राथमिक चिकित्सा

  1. रोगी

    अगर मूर्च्छित हो गया हो तो कुचले को पानी में घोंट उसका पानी थोड़ा थोड़ा

    रोगी को पान करावें. कुछ गाढ़ा गाढ़ा कल्क रोगी की गर्दन पर भी मसलते रहें.

    इससे बेहोशी दूर होगी.
  2. किसी

    भी औषधि के अभाव में रोगी को उसका मूत्रपान करावें. अगर उसका स्वयं का

    मूत्र उपलब्ध न हो तो, रोगी को यदि वह पुरुष हो, तो स्त्री का मूत्र और अगर

    स्त्री हो तो पुरुष के मूत्र का पान करावें. मूत्र पान कराते समय रोगी को

    यह पता न लगने दें कि उसको मूत्र पान कराया जा रहा है.
  3. आम

    की गुठली की गिरी को यथेष्ट मात्रा में पीस कर उसका पेय जल रोगी को

    पिलावें. इससे रोगी को दस्त होंगे और विष निकलेगा. जब तक रोगी के शरीर मे

    विष होगा उपर्युक्त पेय कड़वा लगेगा, विष निकल जाने पर यही पेय मीठा लगने

    लगेगा.
  4. लहसुन को पीस कर दूध में मिलाकर रोगी को पान करावें. ऐसा करने पर एकाध घंटे में रोगी का विष घटने लगेगा.
  5. सर्प

    दंशित रोगी की चिकित्सा पूर्ण करने के बाद प्रतिदिन पूरे एक मास तक 2 से 4

    तोला तक गौ घृत पान करावें. इससे रोगी के नेत्रों की हानि नहीं होगी.

किसी

किसी सर्प दंशित रोगी को कुछ वर्षो तक दंश स्थान पर दर्द या मूंह से रक्त

निर्हरण होता है ऐसे रोगियो को प्रवाल पिष्टी 2 रत्ती तथा सत्व गिलोय 4

रत्ती मधु के साथ दिन में दो बार पान करावें. खट्टे और गर्म पदार्थ खाने को

न दें.

सांप काटने पर घरेलु चिकित्सा

  1. बेहोश आदमी को गोबर में दबाने से होश आ जाता है और जहर उतर जाता है |
  2. हुक्के

    के नाल की कीट पानी में घोलकर पिलाने से अथवा गुड़ के साथ मिलाकर गोली

    बनाकर खिलाने अथवा पुराने हुक्के का पानी पिलाने और घाव पर लगाने से साँप

    का असर जाता रहता है |
  3. नौसादर

    और सूखा चूना खूब बारीक अलग-अलग पीस कर शीशियों में रख लें और साँप काटने

    पर दोंनो को थोड़ा – थोड़ा मिलाकर दोनों नथुनों में फूकें| इस प्रकार दो तीन

    बार फूंकने से साँप का असर जाता रहेगा |
  4. अगर

    साँप ने आदमी को काटा है तो दूसरे आदमी का और यदि औरत को काटा है तो दूसरी

    औरत का पेशाब बिना बताये पिला दें इससे साँप का जहर दूर हो जायेगा |
  5. यदि

    शक हो कि साँप ने काटा है या नही तो कटी हुई जगह पर नीबू का रस या कच्चा

    नीबूं पीसकर मलें| यदि साँवला पड़ जाय तो समझें कि साँप ने काटा है, यदि न

    पड़ें तो समझे कि साँप ने नही काटा है |
  6. नीम के पत्ते चबाने पर अगर कडुआ मालुम हो तो समझना चाहिये कि विष उतर गया है, अगर कडुआ न मालुम हो तो समझे कि अभी विष नही उतरा |
  7. गाय के दूध में लहसुन की एक गांठ पीसकर पिलावें | इससे आधे घंटे में आराम हो जाएगा |
  8. हर प्रकार के जहरीले जानवरों अथवा कीड़ों के काटी हुई जगह पर पेशाब करना बहुत फायदेमन्द है |
  9. साँप के काटे हुए घाव पर उस समय तक आक का दूध भरते रहे, जब तक घाव दूध चुसना बंद न करे इससे अवश्य फायदा होगा |
  10. आधा सेर कडुवा तेल पिलावें | अगर उल्टी हो जाय तो फिर पिलायें | जल्द आराम हो जायेगा |
  11. पांच-छ: माशे तेल और तम्बाकू पानी में पीस कर पिलावें | यह साँप के जहर की अक्सीर दवा है |
  12. नीला थोथा सुरमें की तरह बारीक पीसकर दोनों नथुनों में पाँच-छ: बार फूँके इससे अवश्य लाभ होगा |
  13. दूब पीस करके उसका डेढ़ तोला रस पिलावें आधे घंटे बाद आराम होगा |
  14. नौसादर

    और राई पीस कर चूहे आदि के बिलों में डाल दिया जाय तो साँप भाग जायेगें और

    फिर नही आयेंगें | ये दानों चीजें साँप के लिए विष का काम करती है |
  15. काटी हुई जगह पर उतना भिलावे का तेल डालते रहे जितना कि घाव पी सके | इससे अवश्य लाभ होगा |
  16. साँप

    काटने पर प्यास का रस दो तोला व इसके बराबर सरसों का तेल मिलाकर आधा-आधा

    घन्टे पर तीन खुराक पिलाने से साँप का विष उतर जाता है तथा घाव को चाक़ू से

    थोडा काटकर नमक मिले गरम पानी से धोना चाहिये |

आवश्यक बात

– साँप के काटते हि जहाँ तक जहर चढ़ चूका हो उसके ऊपर से मजबूत रस्सी से

खूब कस –कर बाँध दें और नौसादर बारीक पीसकर दोनों आँखों में भर दें जिससे

आँखों ख़राब न हों क्योकि जहर का असर सबसे पहले आँखों पर होता है | इसके बाद

तुरन्त आधा शेर घी अथवा कडुवा तेल पिला दें और घाव को तेज औजार से काटकर

(चोरकर) खून दबा-दबा कर निकाल दें | आग में लोहा गरम करके उससे घाव को जला

दें और इसके बाद दूसरी दवा शुरू करें |



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