मीरा के पद अर्थ सहित class 10

Mira Ke Pad Arth Sahit class 10

Pradeep Chawla on 27-09-2018

हरि बिन कूण गती मेरी।
तुम मेरे प्रतिपाल कहिये मैं रावरी चेरी।।
आदि अंत निज नाँव तेरो हीयामें फेरी।
बेर बेर पुकार कहूं प्रभु आरति है तेरी।।
यौ संसार बिकार सागर बीच में घेरी।
नाव फाटी प्रभु पाल बाँधो बूड़त है बेरी।।
बिरहणि पिवकी बाट जोवै राखल्यो नेरी।
दासि मीरा राम रटत है मैं सरण हूं तेरी।।1।।
शब्दार्थ /अर्थ :- कूण = कौन क्या। हीयामें फेरी = हृदय में याद करती रहती हूं।
आरति =उत्कण्ठा, चाह। यौ = यह। पाल बांधो = पाल तान लो।
बेरी =नाव का बेड़ा। नेरी =निकट



Comments

आप यहाँ पर मीरा gk, सहित question answers, class general knowledge, 10 सामान्य ज्ञान, questions in hindi, notes in hindi, pdf in hindi आदि विषय पर अपने जवाब दे सकते हैं।

Labels: , , , , ,
अपना सवाल पूछेंं या जवाब दें।




Register to Comment