प्राकृतिक चयन की प्रक्रिया को समझाए

Prakritik Chayan Ki Prakriya Ko Samjhaye

GkExams on 14-01-2019

जिस प्रक्रिया द्वारा किसी जनसंख्या में कोई जैविक गुण कम या अधिक हो जाता है उसे प्राकृतिक वरण या 'प्राकृतिक चयन' या नेचुरल सेलेक्शन (Natural selection) कहते हैं। यह एक धीमी गति से क्रमशः होने वाली अनयादृच्छिक (नॉन-रैण्डम) प्रक्रिया है। प्राकृतिक वरण ही क्रम-विकास(Evolution) की प्रमुख कार्यविधि है। चार्ल्स डार्विन ने इसकी नींव रखी और इसका प्रचार-प्रसर किया।


यह तंत्र विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक प्रजाति को पर्यावरण के लिए अनुकूल बनने मे सहायता करता है। प्राकृतिक चयन का सिद्धांत इसकी व्याख्या कर सकता है कि पर्यावरण किस प्रकार प्रजातियों और जनसंख्या के विकास को प्रभावित करता है ताकि वो सबसे उपयुक्त लक्षणों का चयन कर सकें। यही विकास के सिद्धांत का मूलभूत पहलू है।


प्राकृतिक चयन का अर्थ उन गुणों से है जो किसी प्रजाति को बचे रहने और प्रजनन मे सहायता करते हैं और इसकी आवृत्ति पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ती रहती है। यह इस तथ्य को और तर्कसंगत बनाता है कि इन लक्षणों के धारकों की सन्ताने अधिक होती हैं और वे यह गुण वंशानुगत रूप से भी ले सकते हैं।


प्राकृतिक वरण के सिद्धान्त को समझाने के लिये जिराफ़ का उदाहरण दिया जाता है।



Comments Irfan khan on 27-02-2021

क्या पहले जनन के बाद ही किट रूपी चने के विभिन रंगो की आपेचिक संख्या में बहुत ज्यादा में बहुत ज्यादा अंतर देखने को मिलता है?


Suraj on 22-02-2021

Prakritk Chauhan Ki prakriya ko samjhana

Sona Raj on 06-02-2021

Prakritik chayan ki prakriya ko samjhana

Drishti kanwar on 12-01-2021

Prakrikit chayan ki prakriya ko samjhaya

Gulshan sahu on 21-01-2020

Parktik chayan kiy hota hy

प्राकृतिक चयन की प्रकियासमझना on 02-09-2018

प्राकृतिक चयन की प्रकिया को समझाना या समझना




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