कुकरी प्रथा क्या है

Cookery Pratha Kya Hai

Gk Exams at  2020-10-15

GkExams on 25-12-2018

शादी के बाद नई नवेली दुल्हन की ससुराल में पहली रात. क्या सोंच रही होगी अकेले? ज्यादा कुछ नहीं, बस अपने आने वाले भविष्य के सुनहले ख्यालों को सजाती हुई, बिना बात के चहरे पर एक भीनी मुस्कान, खोयी खोयी सी. अचानक एक आहत से उसकी तन्द्रा टूटती है. और सामने उसका पति हाथ में सफ़ेद धागे का एक गुच्छा लिए दिखाई देता है.


लड़की घबरा जाती है. क्यूंकि वो जानती है कि उसका पति धागे से जांचेगा कि वो कुंवारी है या नहीं. लड़की सिसकियाँ लेती रहती है. पति बाहर आकर चिल्लाते हुए कहता है. ये तो शादी से पहली ही ****** चुकी है. लड़के के घर वाले लड़की को घेर लेते है, और पूंछते है कि "बता कौन है वो जिसके साथ तूने मुँह काला किया है. बेचारी लड़की डरी-सहमी कहती है कि उसने ऐसा कुछ नहीं किया. लेकिन उसकी एक नहीं सुनी जाती. ससुराल वाले बेचारी लड़की को मारते पीटते है. और दबाव बनाते है कि वो (लड़की) पंचायत के सामने मान ले कि उसने शादी से पहले किसी और के साथ सबंध बनाये है. रोज की मारपीट के आगे बेचारी (लड़की) को मजबूरन ससुराल वालो द्वारा थोपा गया आरोप स्वीकार्य कर लेती है. इसके बाद ससुराल पक्ष द्वारा लड़की के माता पिता के ऊपर दबाव बनाने लगते हैं. और लड़की को प्रताड़ित करने का सिलसिला तब तक जारी रखते है जबतक की ससुराल पक्ष को लड़की के पिता (घरवालों) से (लड़की ) वर्जिन या कुंवारी न होने की भरपाई के रूप में मोटी रकम नहीं मिल जाती.
मोटी रकम मिल जाने के बाद बहू सबको प्यारी और संस्कारी लगने लगती है.



ये कोई कहानी या फ़िल्मी सीन नहीं है, यहाँ हम बात कर रहे हैं राजस्थान की जहाँ लगभग 100 साल से भी ज्यादा समय से सांसी समुदाय द्वारा कुकरी नाम की वाहियात प्रथा चल रही है.
जब गहनता से इस सन्दर्भ में जब गहन जाँच पड़ताल और जानकारी इकट्ठी की गयी तो पता चला कि ऐसी कोई प्रथा थी ही नहीं. बात कुछ यूँ ही कि जब हिन्दुस्तान में विदेशी घुसे तो वे लड़कियों और महिलाओं को बलपूर्वक उठाकर लेजाते थे, और फिर बलात्कार करके फेंक कर चले जाते थे. उस समय राजपूत अपने घर आई नवी नवेली दुल्हन के कुंवारी होने कि पुष्टि के लिए धागे का इस्तेमाल करते थे. दरअसल राजपूत ये जानने के लिए ऐसा करते कि कंही उनकी बहू का विदेशियों द्वारा बलात्कार तो नहीं हुआ.
बहरहाल समय के साथ राजपूतों ने इस कुप्रथा को त्याग दिया लेकिन सांसी समुदाय ने इस कुप्रथा को अपना लिया. और कुकरी प्रथा के नाम पर स्त्री के वर्चस्व को तार तार करने एवं मोटी रकम वसूलने के लिए अभी तक इस कुप्रथा को आगे बढ़ा रहे हैं.
गहनता से पड़ताल करने के बाद पता चला कि ज्यादातर सांसी समुदाय कि मानसिकता रहती है कि उनकी बहू वर्जिन न हो ताकि उनको मोटी रकम हथियाने का मौका मिल जाये.
ये कुप्रथा 100 सालों से बरक़रार है. अगर देखा जाय तो ये प्रथा दहेज़ वसूलने का अमानवीय तरीका मात्र है.





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