Hindi Sahitya Ka Itihas Ramchandra Shukl हिंदी साहित्य का इतिहास रामचंद्र शुक्ल

हिंदी साहित्य का इतिहास रामचंद्र शुक्ल



GkExams on 19-08-2022


आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के बारें में : इन महाशय (ramchandra shukla ka jivan parichay) का जन्म सन 1884 ई0 में उत्तरप्रदेश के बस्ती जिले के अगौना नामक गाँव में हुआ। उनकी आरम्भिक शिक्षा मिर्ज़ापुर में हुई। इसके बाद सन 1910 ई0 में उन्होंने मिशन हाईस्कूल से स्कूल परीक्षा पास की। फिर वे प्रयाग के कायस्थ इण्टर कॉलेज में एफ. ए. की पढ़ाई करने के लिए आ गए।




आचार्य शुक्ल इन परीक्षाओं के अतिरिक्त निरंतर साहित्य, मनोविज्ञान, इतिहास आदि के पं. केदारनाथ पाठक, बदरी नारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ के संपर्क में आकर उनकी अध्ययनवृत्ति को और बल मिला। इसी समय उन्होंने हिन्दी, उर्दू, संस्कृत तथा अंग्रेजी साहित्य गहन अध्ययन किया।


Acharya ramchandra shukla image :



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हिन्दी साहित्य का इतिहास रामचन्द्र शुक्ल :




आपको बता दे की आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हिन्दी के प्रथम साहित्यिक इतिहास (Hindi Sahitya ka Itihas) लेखक हैं, जिन्होंने सही मायने में इतिहास-लेखन का कार्य किया। उनका ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ पूर्ववर्ती इतिहासों की भांति मात्र कवि-वृत संग्रह मात्र नहीं है।


बल्कि उन्होंने इतिहास लेखन में “शिक्षित जनता की जिन-जिन प्रवृतियों के अनुसार हमारे साहित्य के स्वरूप में जो-जो परिवर्तन होते आए है, जिन-जिन प्रभावों की प्रेरणा से काव्यधारा की भिन्न-भिन्न शाखाएँ फटती रही हैं, उन सबके सम्यक निरूपण तथा उनकी दृष्टि से किये हुए सुसंगठित काल-विभाग” की विशेष रूप से ध्यान में रखा है।


आचार्य शुक्ल के इतिहास-लेखन ही नहीं, बल्कि आलोचना अन्य ग्रन्थों में उनकी छवि एक गंभीर समीक्षक के रूप में उभरती है। संभवत: वे पहले-समीक्षक हैं, जो किसी कवि अथवा रचना के ग्रंथ-दोष गिनाने में ही नहीं रमते। आलोचना के आदर्श में आमूल परिवर्तन करते हुए उन्होनें कवियों विशेषताओं एवं उनकी “अंत: प्रकृति की छानबीन” की ओर भी ध्यान दिया।


किसी भी काल की आलोचना करते हुए आचार्य शुक्ल उसे ‘लोक’ की कसौटी पर परखते है। इसीलिए आचार्य शुक्ल को साहित्य का वहीं पक्ष प्रीतिकर लगता है, जो उनके ‘लोक’ के पक्ष में खड़ा दिखाई देता है।


आचार्य शुक्ल के इतिहास दृष्टि का विवेचन करने के उपरांत हम यह देखते हैं कि आचार्य शुक्ल की दृष्टि अतीत से वर्तमान के सम्यक मेल से विकसित हुई है। उनकी इतिहास दृष्टि लगभग उन सभी पहलुओं से होकर गुजरती है जिनका उपयोग करें हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन में हुआ है आचार्य शुक्ल जी का साहित्य इतिहास तथा उनकी इतिहास दृष्टि एक इतिहासकार के रूप में अद्वितीय तथा अनुकरणीय है जिसका लाभ परवर्ती इतिहासकारों को मिला।




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Comments gopichand jinagal on 26-12-2019

साहित्य क्या है?





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