देहली तरंग दैर्ध्य

Dehali Tarang Dairdhy

Gk Exams at  2018-03-25


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GkExams on 26-12-2018

भौतिकी में, कोई साइन-आकार की तरंग, जितनी दूरी के बाद अपने आप को पुनरावृत (repeat) करती है, उस दूरी को उस तरंग का तरंगदैर्घ्य (wavelength) कहते हैं। 'दीर्घ' (= लम्बा) से 'दैर्घ्य' बना है।


तरंगदैर्घ्य, तरंग के समान कला वाले दो क्रमागत बिन्दुओं की दूरी है। ये बिन्दु तरंगशीर्ष (crests) हो सकते हैं, तरंगगर्त (troughs) या शून्य-पारण (zero crossing) बिन्दु हो सकते हैं। तरंग दैर्घ्य किसी तरंग की विशिष्टता है। इसे ग्रीक अक्षर 'लैम्ब्डा' (λ) द्वारा निरुपित किया जाता है। इसका SI मात्रक मीटर है।


किसी तरंग के तरंगदैर्घ्य (λ), तरंग के वेग (v) तथा तरंग की आवृति (f) में निम्नलिखित सम्बन्ध होता है-





Comments Akash on 26-11-2018

किसी धातु के कार्य फलन तथा देहली तरंगदैर्ध्य मैं क्या संबंध है?

Rohit on 15-10-2018

किसी धातु के कार्य फलन तथा देहली तरंगदैर्ध्य मैं क्या संबंध है?



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