उमर खय्याम की शायरी

Umar Khayyam Ki Shayari

Gk Exams at  2018-03-25


Go To Quiz

GkExams on 23-11-2018



हरे - भरे वृक्षों के नीचे दो टुकड़े रोटी के साथ,
मिला एक मदिरा का सागर, कविता पुस्तक मेरे हाथ.
निकट बैठ तुम गीत सुनातीं छेड़े मन वीणा के तार,
यों समझो इस वीराने में मुझको मिला स्वर्ग का द्वार.
कुछ के मुख से बरबस निकला कितना सुन्दर है भूलोक,
कहा किसी ने स्वर्गलोक के होते हैं मनमोहन भोग.
मिले आज जो उसको भोगें कल के सपने ठगते हैं,

अरे अबोधो, सदा दूर के ढोल सुहाने लगते हैं।
प्राणप्रिये, ढालो मदिरा जो कर दे मेरे सब दुःख दूर,
बीते पर क्यों खेद करुँ मैं, क्यों समझूं कल होगा क्रूर.
कल किसने देखा है जग में मत गाना प्रिय कल के गीत,
आज पिला दो हो सकता है कल तक जीवन जाए बीत।



Comments

आप यहाँ पर उमर gk, खय्याम question answers, शायरी general knowledge, उमर सामान्य ज्ञान, खय्याम questions in hindi, शायरी notes in hindi, pdf in hindi आदि विषय पर अपने जवाब दे सकते हैं।

Total views 185
Labels: , ,
अपना सवाल पूछेंं या जवाब दें।

Comment As:

अपना जवाब या सवाल नीचे दिये गए बॉक्स में लिखें।

Register to Comment