सीसा संचायक सेल को आवेशित करने पर

Seesa Sanchayak Sale Ko Aaveshit Karne Par

Gk Exams at  2018-03-25


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GkExams on 07-02-2019

लेड-एसिड बैटरी (Lead-acid batteries) बहुतायत में प्रयोग आने वाली बैटरी है जिसका आविष्कार सन् 1859 में फ्रांसीसी भौतिकशास्त्री गैस्टन प्लेन्टी (Gaston Planté) ने किया था। पुन: आवेशित (चार्ज) करने योग्य बैटरियों में यह सबसे पुरानी बैटरी है।


सबसे कम उर्जा-से-भार के अनुपात की दृष्टि से निकिल-कैडमियम बैटरी के बाद यह दूसरे स्थान पर आती है। इसमें थोड़े समय के लिये उच्च धारा प्रदान करने की क्षमता होती है। उपरोक्त गुणों के अतिरिक्त यह बहुत ही सस्ती भी होती है जिसके कारण कारों, ट्रकों, अन्य गाड़ियों तथा व्यवधानरहित शक्ति स्रोतों में बहुतायत में प्रयोग की जाती है।


लेड-एसिड बैटरी में एक या अधिक सेल श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं। उदाहरण के लिये 12 वोल्ट की बैटरी में 6 सेल श्रेणीक्रम में होते हैं। प्रत्येक सेल दो प्लेटों (धनात्मक ऋणात्मक) से मिलकर बना होता है। इन दोनों प्लेटों के बीच कोई विद्युत कुचालक रखा जाता है ताकि दोनों प्लेटे आपस में सटने न पायें। प्लेटें और उनको विलग रखने वाला कुचालक आदि सब कुछ जल और तनु गंधकाम्ल(water:acid=3:1) में डूबा रहता है (विद्युत अपघट्य)। धनात्मक प्लेट लेड पेराक्साइड (PbO2) की बनी होती है जो ऋणात्मक प्लेट लेड (Pb) होती है।





Comments Viresh on 21-11-2019

Shiksha sanchsyak sell ko avrshit karne par kya hogaya?

Brijesh chaudhary on 12-05-2019

Seesa sanchayak s
el ko aavesit Keane par kya hota hai



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