नाभिकीय संलयन की खोज

Nabhikiy Sanlayan Ki Khoj

GkExams on 19-11-2018


जब दो हल्के नाभिक परस्पर संयुक्त होकर एक भारी तत्व के नाभिक की रचना करते हैं तो इस प्रक्रिया को नाभिकीय संलयन कहते हैं। नाभिकीय संलयन के फलस्वरूप जिस नाभिक का निर्माण होता है उसका द्रव्यमान संलयन में भाग लेने वाले दोनों नाभिकों के सम्मिलित द्रव्यमान से कम होता है। द्रव्यमान में यह कमी ऊर्जा में रूपान्तरित हो जाती है। जिसे अल्बर्ट आइंस्टीन के समीकरण E = mc2 से ज्ञात करते हैं। तारों के अन्दर यह क्रिया निरन्तर जारी है। सबसे सरल संयोजन की प्रक्रिया है चार हाइड्रोजन परमाणुओं के संयोजन द्वारा एक हिलियम परमाणु का निर्माण।



Comments लखन मीना on 11-06-2021

एनरीको फरमी

Balkrishna saket on 31-12-2020

Bal kya hai

NEM SINGH on 26-10-2020

Nabhikiy sanlayan ki khoj

Badal on 09-01-2020

Nabhikiya sanlayan ki Khoj kisne ki

Navikiya sanlayan ki khoj kishne ki on 18-06-2019

Euehghutfj



Labels: , , , , ,
अपना सवाल पूछेंं या जवाब दें।




Register to Comment