आनुवंशिकी शब्दावली

आनुवंशिकी Shabdawli

Pradeep Chawla on 12-10-2018


आनुवंशिक शब्दावली

आनुवंशिक विज्ञान को समझने के लिए कुछ शब्दावली का प्रयोग आवश्यक हैं जो निम्नलिखित हैं –

1 – जनक पीढ़ी (Parent Generation)

आनुवंशिक विज्ञान में संकरण के प्रयोग में जो पौधे प्रयोग किए जाते हैं , उन्हें जनक पौधे तथा पीढ़ी को जनक पीढ़ी कहते हैं |

2 – प्रथम पीढ़ी (F1 Generation)

दो जनको के मध्य संकरण कराने के फलस्वरूप उत्पन्न पीढ़ी को F1 पीढ़ी कहते हैं | जैसे – शुद्ध लम्बे (TT) तथा शुद्ध बौने (tt) पौधों के बीच क्रास कराने पर F1 पीढ़ी में सभी पौधे संकर लम्बे (Tt) प्राप्त होते हैं |

3 – द्वितीय पीढ़ी (F2 Generation)

F1 पीढ़ी के सदस्यों के मध्य क्रास कराने पर उत्पन्न सन्तति को F2 पीढ़ी कहते हैं | संकर लम्बे (Tt) पौधों के मध्य क्रास कराने पर F2 पीढ़ी में लम्बे तथा बौने पौधे 3 : 1 के फीनोटाइप तथा 1 : 2 : 1 के जीनोटाइप के अनुपात में प्राप्त होते हैं |

4 – जीन (Gene)

गुणसूत्र पर स्थित D.N.A. अणु का वह खण्ड जो आनुवंशिक लक्षणों का वहन करता हैं , जीन कहलाता हैं | जीन को आनुवंशिकीय विज्ञान की मूल ईकाई कहते हैं | मेंण्डल ने जीन शब्द का प्रयोग न करके फैक्टर शब्द का प्रयोग किया | जैसे – एक पौधे की लम्बाई |

5 – जीनोम (Genome)

अगुणित (haploid) गुणसूत्रों का वह पूर्ण समुच्चय जो एक ईकाई या युग्मक (gamete) के रूप में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में वंशागत होते हैं , जीनोम कहलाते हैं | इसे मुख्यत: n गुणसूत्र से प्रदर्शित करते हैं |

6 – जीन प्रारूप या जीनोटाइप (Genotype)

किसी एक लक्षण के जीनिक प्रदर्शन को जीनोटाइप कहते हैं | जैसे – लाल रंग के फूल वाले पौधे का समयुग्मजी जीनोटाइप (RR) तथा विसमयुग्मजी जीनोटाइप (Rr) हैं |


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7 – लक्षण प्रारूप या फीनोटाइप (Phenotype)

किसी लक्षण का वाह्य या भौतिक रूप से प्रदर्शित होना फीनोटाइप कहलाता हैं | यह समयुग्मजी या विसमयुग्मजी हो सकता हैं | जैसे – पौधे का लम्बा या बौना होना |

8 – संकर (Hybrid)

जब भिन्न-भिन्न लक्षणों वालो दो जनकों के मध्य क्रास कराया जाता हैं तो उत्पन्न संतति को संकर संतति कहते हैं | जैसे – जब शुद्ध लम्बे तथा शुद्ध बौने पौधे के बीच संकरण या क्रास कराया जाता हैं तो संकर लम्बे पौधे प्राप्त होते हैं |

9 – संकरण (Hybridization)

ईच्छित लक्षणों की संतान प्राप्ति हेतु आनुवंशिक रूप से भिन्न दो प्राणियों के मध्य अपनायी जाने वाली कृत्रिम परपरागण की क्रियाविधि को संकरण (hybridization) कहते हैं |

10 – उपार्जित लक्षण (Acquired characters)

किसी भी जीव की आकारिकी (morphology) या शरीर क्रिया (physiology) में पर्यावरण के कारण होने वाले परिवर्तन के उपरांत उत्पन्न लक्षणों को उपार्जित लक्षण कहते हैं | ये सामान्यत: वंशागत नहीं होते हैं |

11 – प्रभावी लक्षण (Dominant character)

जब तुलनात्मक लक्षणों वाले पौधों या जीवों के मध्य संकरण कराया जाता हैं तो प्रथम पीढ़ी में प्रदर्शित लक्षण को प्रभावी लक्षण कहते हैं | जैसे – लम्बेपन (T) या लाल रंग (R) का गुण |

12 – अप्रभावी लक्षण (Recessive character)

जब तुलनात्मक लक्षणों वाले पौधों या जीवों के मध्य संकरण कराया जाता हैं तो प्रथम पीढ़ी में जो लक्षण प्रदर्शित नहीं हो पता, उसे अप्रभावी लक्षण कहते हैं | जैसे – बौनेपन (t) या सफेद रंग (r) का गुण |

13 – एेलिल या एेलिलोमार्फ (Alleles or Allelomorph)

तुलनात्मक लक्षणों वाले जीन जोड़े को एेलिल कहते हैं | ये गुणसूत्र के एक ही स्थल (Locus) पर स्थित होते हैं | जैसे – पौधे की लम्बाई के लिए लम्बा (T) तथा बौना (t) लक्षण आदि |

14 – समयुग्मजी या शुद्ध लक्षणी पौधे (Homozygous or True breeding)

जब किसी लक्षण के जोड़े के दोनों जीन समान होते हैं, तो उन्हें समयुग्मजी (Homozygous) पौधे कहते हैं | जैसे – लम्बाई के लिए दोनों प्रभावी जीन (TT) या दोनों अप्रभावी जीन (Tt) एक साथ हो |

15 – विसमयुग्मजी या संकर पौधे (Heterozygous or Hybrid)

जब किसी लक्षण के जोड़े के दोनों जीन असमान या भिन्न-भिन्न होते हैं, तो उन्हें विसमयुग्मजी (Heteroygous) पौधे कहते हैं | जैसे – लम्बे और बौने पौधे के जीन (Tt) एक साथ हो |

16 – संकर पूर्वज संकरण (Back cross)

जब विसमयुगम्की संकर सन्तान तथा उनके समयुगम्की जनको के मध्य संकरण या क्रास कराया जाता हैं , तो इस प्रकार के संकरण को संकर पूर्वज संकरण कहते हैं | जैसे – F1 पीढ़ी में प्राप्त संकर सन्तान (Tt) का संकरण जनक पीढ़ी के किसी भी पौधे (प्रभावी या अप्रभावी) से कराने की क्रियाविधि को |

17 – परीक्षण संकरण (Test cross)

F1 पीढ़ी की संकर सन्तान तथा अप्रभावी जनक के बीच कराया जाने वाले संकरण की क्रियाविधि को परीक्षण संकरण कहते हैं | जैसे – जनक पीढ़ी (P) की अप्रभावी जनक (tt) तथा F1 पीढ़ी की संकर संतान (Tt) के मध्य होने वाला संकरण |



Comments Is parsn ka answer dijiye on 30-10-2020

Pratham pidhi me prapt poodhe me svapragan karane par dvitiy pidhi f2 me prapt safed pusp vale poodhe ka pratisat btaiye



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