मीराबाई के पद

Mirabai Ke Pad

Pradeep Chawla on 30-10-2018


हरि बिन कूण गती मेरी।
तुम मेरे प्रतिपाल कहिये मैं रावरी चेरी।।
आदि अंत निज नाँव तेरो हीयामें फेरी।
बेर बेर पुकार कहूं प्रभु आरति है तेरी।।
यौ संसार बिकार सागर बीच में घेरी।
नाव फाटी प्रभु पाल बाँधो बूड़त है बेरी।।
बिरहणि पिवकी बाट जोवै राखल्यो नेरी।
दासि मीरा राम रटत है मैं सरण हूं तेरी।।1।।
शब्दार्थ /अर्थ :- कूण = कौन क्या। हीयामें फेरी = हृदय में याद करती रहती हूं।
आरति =उत्कण्ठा, चाह। यौ = यह। पाल बांधो = पाल तान लो।
बेरी =नाव का बेड़ा। नेरी =निकट



Comments Anisha on 29-11-2021

मीराबाई के प्रभू उसके पालनहार है

Vaishnavi on 31-10-2021

हरि बिन कूण गती मेरी तुम मेरे प्रतिपाल कहिये मैं रावरी चेरी।।आदि-अंत निज नींव तेरो हीमायें फेरीबेर-बेर पुकार कहूँ प्रभु आरति है तेरी।।यो संसार बिकार सागर बीच में घेरीनाव फाटी प्रभु पाल बाँधो नूडत है मेरीनिरहणि पिवकी बाट जॉबै राखल्यो नेरीदासी मीरा राम रटत है मैं सरण हूँ तेरी1) निम्नलिखित विधान सही है अथवा गलत हैं, लिखिए।1) मीराबाई के प्रभु उसके पालनहार है।i) मीराबाई अपने आप को प्रभु की दासी नहीं कहती।iii) संसार रूपी सागर विकारों से भरा है।iv) संत मीराबाई अपने प्रभु की राह देख रही है।


Meera baai ki bhasa sheli Meera baai ki bhasa she on 03-09-2018

Meera baai ki bhasha sheli



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